Justice Surya Kant Oath: गवई के बाद जस्टिस सूर्यकांत होंगे देश के 53वें CJI, राष्ट्रपति मुर्मू आज दिलाएंगी शपथ; इतने महीने का होगा कार्यकाल
जस्टिस बी. आर. गवई के रिटायर होने के बाद जस्टिस सूर्यकांत आज भारत के 53वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के रूप में शपथ लेंगे. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें आज शपथ दिलाएंगी. शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति भवन में आयोजित होगा.
Justice Surya Kant take oath as 53rd CJI Today: जस्टिस बी. आर. गवई के रिटायर होने के बाद जस्टिस सूर्यकांत आज भारत के 53वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के रूप में शपथ लेंगे. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें आज शपथ दिलाएंगी. शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति भवन में आयोजित होगा.
कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा
CJI के रूप में जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा. जज के रूप में उन्हें दो दशक से अधिक का अनुभव है. हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक के उनके कार्यकाल में अनुच्छेद 370, अभिव्यक्ति की आज़ादी, लोकतंत्र, भ्रष्टाचार, पर्यावरण और लैंगिक समानता से जुड़े कई ऐतिहासिक फैसले शामिल रहे हैं.
राष्ट्रपति ने CJI गवई की सिफारिश पर संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए जस्टिस सूर्यकांत को अगला मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया था।
हरियाणा में जन्म, लंबा न्यायिक सफर
जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के एक मिडिल क्लास परिवार में हुआ था। उन्होंने 1984 में हिसार से अपनी लॉ प्रैक्टिस शुरू की, जिसके बाद वे चंडीगढ़ चले गए और पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे।
इस दौरान उन्होंने संवैधानिक, सेवा, और सिविल मामलों में काम किया. वे यूनिवर्सिटी, बोर्ड, कॉर्पोरेशन, बैंक और खुद हाई कोर्ट तक का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.
2000 में वे हरियाणा के एडवोकेट जनरल बने
जुलाई 2000 में वे हरियाणा के सबसे कम उम्र के एडवोकेट जनरल बने. 2001 में उन्हें सीनियर एडवोकेट का दर्जा मिला और 9 जनवरी 2004 को उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का स्थायी जज नियुक्त किया गया.
बाद में अक्टूबर 2018 से 24 मई 2019 तक वे हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे। नवंबर 2024 से वे सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन के रूप में काम कर रहे हैं।
पेंडेंसी कम करना पहली प्राथमिकता
शनिवार को चार्ज संभालने से पहले मीडिया से बातचीत में जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और देशभर की अदालतों में लंबित मामलों को कम करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
उन्होंने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका पहला कदम सभी हाई कोर्ट के साथ समन्वय कर जिला एवं अधीनस्थ अदालतों के कामकाज में बाधा पैदा करने वाली समस्याओं की पहचान करना होगा.-
(The above story first appeared on LatestLY on Nov 24, 2025 09:44 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

