ITR Filing 2025: सेक्शन 87A में कितनी छूट मिलेगी? 12500, 25000 या 60000 रुपये? जानें नियम
ITR Filing 2025

ITR filing 2025: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग का सीज़न जोरों पर है, और इसी के साथ सेक्शन 87A (Section 87A) की छूट को लेकर टैक्सपेयर्स के बीच काफी भ्रम पैदा हो गया है. कई लोग सोच रहे हैं, कि वह इस बार फाइलिंग में 60,000 रुपये तक की छूट (Rebate) का लाभ उठा सकते हैं, जबकि असलियत इससे अलग है. आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं.

क्या है सेक्शन 87A की छूट?

सेक्शन 87A के तहत सरकार उन लोगों को टैक्स में सीधी राहत देती है, जिनकी टैक्सेबल इनकम (Taxable Income) एक तय सीमा से कम होती है. इसका मतलब यह है, कि अगर आपकी आय निर्धारित सीमा के अंदर है, तो आपको जो टैक्स देना होता है, वह पूरी तरह से माफ हो सकता है. पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Regime) में यदि आपकी टैक्सेबल इनकम 5 लाख रुपये तक है, तो आपको अधिकतम 12,500 रुपये तक की छूट मिलती है.

वहीं, नई टैक्स व्यवस्था (New Regime) में अगर आपकी टैक्सेबल इनकम 7 लाख रुपये तक है, तो आपको 25,000 रुपये तक की छूट दी जाती है. इस तरह से पात्र व्यक्ति का पूरा टैक्स माफ हो सकता है, और उन्हें कुछ भी टैक्स नहीं देना पड़ता है.

60,000 रुपये की छूट वाला ऐलान किसके लिए है?

बजट 2025 में सरकार ने सेक्शन 87A के तहत मिलने वाली टैक्स छूट को बढ़ाकर 60,000 रुपये कर दिया है, लेकिन यह बढ़ी हुई छूट अभी लागू नहीं हुई है. यह नई छूट वित्त वर्ष 2025-26 (FY 2025-26) की आय पर लागू होगी, यानी जब आप अगले साल 2026 में आकलन वर्ष 2026-27 (Assessment Year 2026-27) के लिए आईटीआर फाइल करेंगे, तभी इसका फायदा आपको मिलेगा.

इस साल यानी 2025 में आप जो आईटीआर फाइल कर रहे हैं, वह वित्त वर्ष 2024-25 की इनकम पर है, इसलिए अभी आपको केवल वही छूट मिलेगी जो बजट 2024 में घोषित की गई थी. यानी पुरानी टैक्स व्यवस्था में 12,500 आईटीआर और नई व्यवस्था में 25,000 आईटीआर तक की ही छूट मिलेगी.

तो इस बार कितनी छूट मिलेगी? (ITR AY 2025-26)

टैक्स व्यवस्था आय वर्ष टैक्सेबल इनकम लिमिट अधिकतम छूट
पुरानी टैक्स व्यवस्था वित्त वर्ष 2024–25 (आकलन वर्ष 2025–26) 5,00,000 रुपये तक 12,500 रुपये
नई टैक्स व्यवस्था वित्त वर्ष 2024–25 (आकलन वर्ष 2025–26) 7,00,000 रुपये तक 25,000 रुपये

नई टैक्स व्यवस्था में मार्जिनल रिलीफ का फायेदा

नई टैक्स व्यवस्था में सरकार ने एक और सुविधा दी है, जिसे मार्जिनल रिलीफ (Marginal Relief) कहा जाता है. इसका फायदा उन लोगों को मिलता है, जिनकी टैक्स योग्य इनकम 7 लाख रुपये से थोड़ा ही अधिक होती है. अगर आपकी इनकम 7 लाख रुपये से कुछ रुपये ही ज्यादा है, और उस पर बन रहा टैक्स उस अतिरिक्त राशि से ज्यादा हो रहा है, तो सरकार आपको उतनी राहत देती है, जिससे आप पर ज्यादा टैक्स का बोझ न पड़े.

उदाहरण के तौर पर, अगर किसी व्यक्ति की टैक्सेबल इनकम 7,02,000 रुपये है, और उस पर बन रहा टैक्स 25,500 रुपये का, जबकि इनकम 7 लाख रुपये से सिर्फ 2,000 रुपये ज्यादा है, तो सरकार मार्जिनल रिलीफ के तहत आपको टैक्स में उतनी छूट देगी कि आपका कुल टैक्स बोझ इस 2,000 रुपये से ज्यादा न हो. इस तरह यह रिलीफ नियम छोटे टैक्सपेयर्स को अतिरिक्त आर्थिक बोझ से बचाने में मदद करता है.

सेक्शन 87A के तहत टैक्सपेयर्स को मिलने वाली छूट को लेकर फैली उलझन को दूर करना ज़रूरी है. इस साल आईटीआर फाइल करते समय आपको अधिकतम 12,500 रुपये (पुरानी टैक्स व्यवस्था) या 25,000 रुपये (नई टैक्स व्यवस्था) तक की ही छूट मिलेगी. जो 60,000 रुपये की छूट है, वह अभी लागू नहीं हुई है, उसका फायदा आपको अगले साल मिलेगा. अगर आपकी इनकम 7 लाख रुपये से थोड़ी ही ज्यादा है, तो आपको मार्जिनल रिलीफ का फायदा मिल सकता है. इसलिए आईटीआर भरते समय सही टैक्स व्यवस्था चुनें और छूट का पूरा लाभ उठाएं.