Is Modi Government Planning To Remove the Words ‘Socialist’ and ‘Secular’ From Constitution Preamble?: पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक ये सवाल घूम रहा था कि क्या केंद्र की मोदी सरकार संविधान की प्रस्तावना से 'सोशलिस्ट' (समाजवादी) और 'सेक्युलर' (धर्मनिरपेक्ष) जैसे शब्द हटाने की योजना बना रही है? लेकिन अब इस पर खुद केंद्र सरकार ने चुप्पी तोड़ी है और स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है. राज्यसभा में सांसद रामजी लाल सुमन के सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है. न ही इन शब्दों को हटाने को लेकर कोई प्रक्रिया शुरू की गई है.
उन्होंने कहा कि संविधान में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श और सर्वसम्मति जरूरी होती है, और फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है.
क्यों उठे ऐसे सवाल?
यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि कुछ समय पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबोले ने कहा था कि ‘सोशलिस्ट’ और ‘सेक्युलर’ शब्द संविधान में जबरन जोड़े गए थे और इस पर फिर से विचार होना चाहिए. इस बयान के बाद सियासी बहस तेज हो गई थी और विपक्ष ने इसे लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे.
कानून मंत्री ने क्या बताया?
लेकिन अब कानून मंत्री मेघवाल ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार की आधिकारिक नीति इससे अलग है. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2024 में दिए एक फैसले में 1976 के 42वें संविधान संशोधन को पूरी तरह वैध बताया है, जिसमें इन दोनों शब्दों को प्रस्तावना में जोड़ा गया था. कोर्ट ने यह भी कहा कि संसद को प्रस्तावना में बदलाव का अधिकार है, लेकिन "सेक्युलरिज्म" जैसे सिद्धांत संविधान की बुनियादी संरचना का हिस्सा हैं.
सोशलिज्म-सेक्युलरिज्म का मतलब?
मेघवाल ने कहा कि भारत में 'सोशलिज्म' का मतलब सिर्फ समाजवाद नहीं, बल्कि कल्याणकारी राज्य है, जो गरीबों और वंचितों के हित में काम करता है. वहीं 'सेक्युलरिज्म' का मतलब है – धर्मनिरपेक्षता, यानी हर धर्म के प्रति समान दृष्टिकोण. ये दोनों मूल्य भारत के लोकतांत्रिक ढांचे की नींव हैं.
मोदी सरकार का कोई एजेंडा नहीं
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ सामाजिक संगठनों या व्यक्तियों की निजी राय से बहस जरूर बन सकती है, लेकिन सरकार की आधिकारिक स्थिति वही है जो संसद और कानून के तहत तय है. इस बयान से ये साफ हो गया है कि फिलहाल संविधान की प्रस्तावना से 'सोशलिस्ट' और 'सेक्युलर' शब्द हटाने की कोई योजना मोदी सरकार के एजेंडे में नहीं है.













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