महिलाओं के लिए ये हैं 10 बेहतरीन टैक्स सेविंग निवेश विकल्प, जानें कहां होगा सबसे ज्यादा फायदा
Income tax I Section 80C

Tax-Saving Investment Options : पिछले कुछ वर्षों में महिला करदाताओं की संख्या में बड़ी वृद्धि देखी गयी है. हालांकि महिलाओं के लिए कर-बचत निवेश के कई अच्छे विकल्प उपलब्ध हैं, जो न केवल टैक्स बचाने में मदद करते हैं बल्कि वित्तीय सुरक्षा और संपत्ति निर्माण (Wealth Creation) में भी सहायक होते हैं। यहां उनमें से 10 प्रमुख विकल्प बताएं गए हैं-

सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Yojana) :

सुकन्या समृद्धि योजना, एक निवेश विकल्प है, जो माता-पिता को अपनी बेटी की शिक्षा और विवाह के लिए निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करता है, यह आयकर की छूट श्रेणी के अंतर्गत आता है. इसका मतलब है कि निवेशक को किसी भी स्तर पर कर का भुगतान नहीं करना पड़ता है - चाहे निवेश हो, आय हो या निकासी हो. यह आयकर अधिनियम के, 1961 की धारा 10 (11A) के तहत छूट प्रदान करती है. इस योजना में निवेश की गई राशि धारा 80C के तहत कटौती के लिए पात्र है, जिसकी सीमा 1.5 लाख रुपये है.

नेशनल सेविंगस सर्टिफिकेट (National Savings Certificate) :

आयकर अधिनियम की धारा 80C नेशनल सेविंगस सर्टिफिकेट में किए गए निवेश पर कटौती का दावा करने का अवसर प्रदान करती है, कटौती दावे की अधिकतम सीमा 1.5 लाख रुपये है. डाकघरों में उपलब्ध यह योजना वर्तमान में 1,000 रुपये की न्यूनतम जमा राशि के साथ 7.7% का निश्चित रिटर्न प्रदान करती है. इस योजना में ब्याज दरो की समीक्षा समय-समय पर की जाती है.

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (Public Provident Fund) :

500 रुपये की न्यूनतम जमा राशि और 1.5 लाख रुपये के अधिकतम वार्षिक योगदान के साथ, पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ उन लोगों के लिए एक अच्छा निवेश विकल्प है जो आकर्षक रिटर्न दरों पर कर बचाना चाहते हैं. निवेश पर मिलने वाले ब्याज पर कर-मुक्त होने के साथ धारा 80C के तहत कर लाभ का दावा किया जा सकता है. इस निवेश की अवधि 15 वर्ष है, जिसमें कुल पांच वर्षों के ब्लॉक को बढ़ाने का विकल्प भी मिलता है.

बीमा (Insurance) :

बीमा न केवल किसी को अप्रत्याशित घटनाओं से बचाता है, बल्कि कर-बचत का विकल्प भी प्रदान करता है. महिला निवेशक जीवन बीमा पॉलिसियों पर कर लाभ का दावा कर सकती हैं. उन पॉलिसियों में जिनमे स्वयं और परिवार, जैसे की पति/पत्नी और बच्चे शामिल हैं, ऐसे पॉलिसियों में निवेशक कर कटौती का दावा भी कर सकती हैं, हालांकि कटौती का दावा कुल बीमा राशि के 10% से अधिक नहीं किया जा सकता है. अधिनियम की धारा 80U के तहत विशिष्ट बीमारियों वाले व्यक्ति के लिए यह सीमा कुल राशि का 15% है.

इक्विटी-लिंक्ड बचत योजना (Equity-Linked Savings Scheme) :

आयकर अधिनियम की धारा 80C इक्विटी-लिंक्ड बचत योजनाओं के लिए कर लाभ प्रदान करती है. चूंकि निवेश के तहत रिटर्न बाजार से जुड़ा हुआ है, इसलिए यह विकल्प उच्च जोखिम के साथ आता है. ईएलएसएस (ELSS) में तीन साल की लॉक-इन अवधि होती है और यह केवल उन महिलाओं के लिए उपयुक्त है जो उच्च जोखिम लेने की क्षमता रखती हैं.

एम्प्लोयी प्रोविडेंट फंड (Employee Provident Fund) :

ईपीएफ (EPF) में किए गए निवेश पर भी धारा 80C के तहत कर लाभ मिल सकता है. जबकि कर्मचारियों के योगदान पर धारा 80C के तहत कटौती मिलती है, नियोक्ताओं द्वारा किए गए योगदान पर कर नहीं लगता है.

एनपीएस (NPS) :

धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये की कटौती के अतिरिक्त, उपधारा 80सीसीडी (1बी) (80CCD (1B)) के तहत एनपीएस में 50,000 रुपये तक के निवेश पर एनपीएस ग्राहकों को अतिरिक्त कटौती भी ऑफर की जाती है.

टैक्स-बचत फिक्स्ड डिपाजिट (Tax-Saving Fixed Deposits) :

बैंकों या डाकघरों में पांच साल की न्यूनतम लॉक-इन अवधि के साथ फिक्स्ड डिपाजिट पर धारा 80C के तहत कर कटौती की सुविधा मिलती है. कर कटौती की सीमा सालाना 1.5 लाख रुपये है.

होम लोन (Home Loan) :

आपके होम लोन के मूलधन के लिए भुगतान की गई राशि धारा 80C के तहत कर कटौती का लाभ प्रदान करती है. अधिकतम होम लोन कर छूट प्रति वर्ष 1.5 लाख रुपये है. होम लोन पर भुगतान किए गए ब्याज के लिए धारा 24(b) के तहत 2 लाख रुपये तक का कर लाभ उपलब्ध है.

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (Senior Citizen Savings Scheme) :

एससीएसएस (SCSS) वरिष्ठ नागरिक निवेश विकल्पों में से एक है जो कर-कुशल योजनाओं में निवेश करने की चाह रखने वालों के लिए उपयुक्त है. इस बचत योजना के तहत जमा राशि आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80C के तहत 1.50 लाख रुपये तक कर कटौती के लिए पात्र है.

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