लाडकी बहन योजना: ऑनलाइन e-KYC बंद, छूटी हुई और अपात्र महिलाओं के लिए ऑफलाइन दस्तावेज जमा करने का विकल्प खुला

मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहन योजना के तहत ऑनलाइन ई-केवायसी (e-KYC) की प्रक्रिया पूरी तरह बंद कर दी गई है. हालांकि, तकनीकी कारणों या दस्तावेजों की कमी से छूटी हुई पात्र महिलाओं को सरकार ने एक आखिरी मौका दिया है. ऐसी महिलाएं अब जिला कार्यालय में जाकर भौतिक सत्यापन करा सकती हैं.

(File Photo)

Ladki Bahin Yojana Update: महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहन योजना' को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक अपडेट सामने आया है. राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना के तहत नए पंजीकरण और ऑनलाइन ई-केवायसी (e-KYC) की प्रक्रिया को अब पूरी तरह से बंद कर दिया गया है. इस फैसले के बाद उन महिलाओं की चिंताएं बढ़ गई थीं, जो पात्र होने के बावजूद किसी कारणवश इस सूची में शामिल नहीं हो पाई थीं. हालांकि, महिला एवं बाल विकास विभाग ने ऐसी महिलाओं को राहत देते हुए एक अंतिम अवसर देने की घोषणा की है.

केवल इन महिलाओं को मिलेगा दोबारा मौका

विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह अंतिम अवसर केवल उन वास्तविक और पात्र महिलाओं के लिए है, जो केवल तकनीकी खराबी, सर्वर डाउन होने या मामूली दस्तावेजी कमियों के कारण अंतिम सूची से बाहर हो गई थीं. जानबूझकर गलत जानकारी देने वाले या पूरी तरह से अपात्र आवेदकों को इस व्यवस्था में शामिल नहीं किया जाएगा. सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी जरूरतमंद और योग्य महिला इस वित्तीय सहायता से वंचित न रहे.  यह भी पढ़े:  Ladki Bahin Yojana: लाडकी बहन योजना पर महाराष्ट्र सरकार की कार्रवाई, सत्यापन अभियान में 69 लाख महिलाएं अपात्र घोषित, नहीं मिलेगा अगली किस्त का लाभ

जिला कार्यालय में करना होगा ऑफलाइन संपर्क

ऑनलाइन पोर्टल और ई-केवायसी बंद होने के कारण अब पूरी प्रक्रिया को ऑफलाइन मोड पर स्थानांतरित कर दिया गया है. प्रभावित और छूटी हुई महिलाएं अब निम्नलिखित प्रक्रिया के तहत अपना दावा पेश कर सकती हैं:

योजना की पारदर्शिता पर सरकार का जोर

महिला एवं बाल विकास विभाग इस समय योजना के डेटाबेस के शुद्धिकरण पर काम कर रहा है. ऑनलाइन प्रक्रिया बंद करने का मुख्य उद्देश्य अपात्र लाभार्थियों की छंटनी करना और बजटीय आवंटन का सही प्रबंधन करना है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिला कार्यालयों में प्राप्त होने वाले आवेदनों की पूरी तरह से जांच होने के बाद ही उन्हें अंतिम मंजूरी दी जाएगी, ताकि योजना में पूरी पारदर्शिता बनी रहे.

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