जर्मनी की धुर दक्षिणपंथी एएफडी पार्टी ने एलीस वाइडेल और टीनो क्रुपाला को दोबारा नेता चुना है. सम्मेलन के बाहर 31 हजार से अधिक लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया, जबकि पार्टी ने आगामी राज्य चुनावों में बड़ी जीत का दावा किया.जर्मनी की धुर दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) ने अपने राष्ट्रीय सम्मेलन में पार्टी नेतृत्व को दोबारा चुना है. पार्टी प्रतिनिधियों ने शनिवार को एलीस वाइडेल और टीनो क्रुपाला को फिर से नेता निर्वाचित किया. वहीं, सम्मेलन स्थल के बाहर हजारों प्रदर्शनकारियों ने विरोध प्रदर्शन किया और कुछ स्थानों पर पुलिस के साथ झड़पें भी हुईं.
एएफडी ने सम्मेलन के दौरान एकजुटता का प्रदर्शन करने की कोशिश की. वाइडेल और क्रुपाला पिछले चार साल से पार्टी के साझे नेता हैं और इस बार उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं था. मतदान में वाइडेल को 81 प्रतिशत और क्रुपाला को 70 प्रतिशत मत मिले. जर्मनी में राजनीतिक दल आमतौर पर हर दो साल में अपने नेताओं का चुनाव करते हैं.
सम्मेलन के विरोध में जुड़े हजारों लोग
पूर्वी जर्मनी के शहर एरफुर्ट में आयोजित सम्मेलन के बाहर हुए प्रदर्शनों ने एक बार फिर यह दिखाया कि एएफडी जर्मन राजनीति में कितना विवादित विषय बनी हुई है. पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़ी विपक्षी शक्ति और पूर्वी जर्मनी में सबसे मजबूत राजनीतिक दल के रूप में उभरी है, लेकिन इसके विरोध की आवाजें भी लगातार बनी हुई हैं. प्रदर्शनों के बावजूद सम्मेलन निर्धारित समय पर शुरू हुआ. पार्टी अधिकारियों ने कहा कि राजनीतिक दलों को सम्मेलन आयोजित करने का कानूनी और लोकतांत्रिक अधिकार प्राप्त है.
सम्मेलन को संबोधित करते हुए टीनो क्रुपाला ने प्रदर्शनकारियों की आलोचना की. उन्होंने कहा कि सड़कों को अवरुद्ध करना या सम्मेलन रोकने की कोशिश करना लोकतांत्रिक आचरण नहीं है और ऐसे लोग उनके राजनीतिक विरोधियों का अंतिम सहारा हैं. इस बार का सम्मेलन एक और वजह से भी विवादों में रहा. इसका आयोजन उस नाजी पार्टी बैठक की 100वीं वर्षगांठ के आसपास हुआ, जिसने हिटलर की नाजी आंदोलन पर पकड़ मजबूत की थी. इतिहासकारों और राजनीतिक विरोधियों का कहना है कि इस समय का प्रतीकात्मक महत्व है. हालांकि एएफडी ने इस आरोप को खारिज कर दिया.
फरवरी 2025 में हुए जर्मनी के राष्ट्रीय चुनाव में एएफडी को 20.8 प्रतिशत वोट मिले थे, जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद किसी दक्षिणपंथी दल का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना गया. इसके बाद से विभिन्न सर्वेक्षणों में पार्टी के समर्थन में और वृद्धि दर्ज की गई है. बढ़ते जनसमर्थन के बावजूद पार्टी पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी समय-समय पर उठती रही है. हालांकि जर्मनी की सर्वोच्च न्यायिक व्यवस्था ने राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगाने के लिए बहुत ऊंचे मानदंड तय किए हैं.
मुख्यधारा की जर्मन पार्टियां अब भी एएफडी के साथ सहयोग से इनकार करती हैं. इस नीति को अक्सर दक्षिणपंथी दलों के खिलाफ "फायरवॉल" कहा जाता है. हालांकि एलीस वाइडेल हाल ही में कह चुकी हैं कि "2026 एएफडी के लिए निर्णायक वर्ष है."
पुलिस के अनुसार शनिवार के विरोध प्रदर्शनों में करीब 31,000 लोगों ने भाग लिया. अधिकांश प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे. प्रदर्शनकारियों ने "एएफडी नाजियों को रोको" और "विविधता के लिए, नाजियों के खिलाफ" जैसे नारे लिखे पोस्टर लेकर मार्च किया. फासीवाद विरोधी संगठन "वीडरजेत्सन" की प्रवक्ता लेना राउपाख ने कहा कि उनका संगठन सम्मेलन को रोकना चाहता था. उनके अनुसार एएफडी ऐसी नीतियों का समर्थन करती है जिन्हें वे फासीवादी मानते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी बड़े पैमाने पर निर्वासन की बात करती है और आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान नहीं करती.
सैक्सनी अन्हाल्ट के चुनावों पर नजर
एएफडी इन आरोपों को सिरे से खारिज करती है. पार्टी का कहना है कि उसे राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है. जर्मनी की घरेलू खुफिया एजेंसी ने पिछले वर्ष एएफडी को "दक्षिणपंथी चरमपंथी" समूह के रूप में वर्गीकृत किया था, लेकिन कानूनी चुनौती के बाद इस वर्गीकरण का इस्तेमाल फिलहाल स्थगित कर दिया गया है. फरवरी में कोलोन की एक अदालत ने कहा था कि मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक एजेंसी इस वर्गीकरण का प्रयोग नहीं कर सकती.
एएफडी अब अपनी नजर 6 सितंबर को होने वाले सैक्सनी-अन्हाल्ट राज्य के चुनाव पर लगाए हुए है. पार्टी को उम्मीद है कि उसे वहां 40 प्रतिशत या उससे अधिक वोट मिल सकते हैं. ऐसा होने पर पार्टी पूर्ण बहुमत के करीब पहुंच सकती है या अन्य दलों के विधायकों को अपने पक्ष में लाकर पहली बार किसी राज्य में सरकार बनाने की स्थिति में आ सकती है.
टीनो क्रुपाला ने कहा, "हम जीतेंगे. हो सकता है कि जल्द ही हम अकेले सरकार चला सकें." उनके अनुसार यह उन लोगों के लिए जवाब होगा जो पार्टी का सम्मेलन होने से रोकना चाहते थे. रूस पर प्रतिबंध हटाने और यूक्रेन को हथियार भेजने का विरोध करने वाली एएफडी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की कई नीतियों के प्रति समर्थन भी जताया है. हालांकि पार्टी ने ट्रंप प्रशासन और इस्राएल की ओर से ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध की आलोचना की है.
पार्टी के क्षेत्रीय नेता ब्योर्न होके ने अपने भाषण में कई बार कहा कि एएफडी "जर्मनी को फिर महान बनाना" चाहती है. इसे ट्रंप के "मेक अमेरिका ग्रेट अगेन" अभियान से जोड़कर देखा गया. सम्मेलन में कम से कम एक प्रतिभागी "मेक जर्मनी ग्रेट अगेन" लिखी टोपी पहने हुए भी दिखाई दिया.













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