अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ पर ट्रंप बोले, कम्यूनिज्म देश के लिए खतरा
अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन में आयोजित समारोह को संबोधित किया.
अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन में आयोजित समारोह को संबोधित किया. राष्ट्रीय गौरव के संदेश के साथ उन्होंने कई राजनीतिक मुद्दों को भी उठाया, जबकि देशभर में मौसम संबंधी बाधअमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने शनिवार को अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित समारोह में देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव पर जोर दिया, लेकिन बहुत से विशेषज्ञों ने कहा कि उनका भाषण चुनाव प्रचार करता एक राजनीतिक भाषण था. ट्रंप ने इस अवसर को इतिहास के सबसे आनंदपूर्ण और गौरवशाली मील के पत्थरों में से एक बताया. अमेरिका ने 250 साल में स्वतंत्रता हासिल करने से लेकर वैश्विक महाशक्ति बनने तक का सफर तय किया है.
वॉशिंगटन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान खराब मौसम और तूफान की आशंका के कारण नेशनल मॉल से लोगों को करीब दो घंटे के लिए हटाना पड़ा. इसके बाद ट्रंप ने समारोह को संबोधित किया और अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिकों का सम्मान किया. इनमें द्वितीय विश्व युद्ध के कई दिग्गज सैनिक और वियतनाम युद्ध में युद्धक अभियान का नेतृत्व करने वाले शुरुआती ब्लैक स्पेशल फोर्सेस अधिकारियों में से एक भी शामिल थे.
समारोह में अमेरिकी इतिहास के विभिन्न महत्वपूर्ण चरणों का प्रतिनिधित्व करने वाले झंडे प्रदर्शित किए गए. इनमें वह ध्वज भी शामिल था जो अब्राहम लिंकन के पार्थिव शरीर पर ओढ़ाया गया था. इसके साथ ही ध्वज भी जो राइट बंधुओं द्वारा उड़ाए गए विमान पर लगाया गया था.
हालांकि, अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपतियों के संबोधन आमतौर पर राष्ट्रीय एकता पर केंद्रित होते हैं, लेकिन ट्रंप ने अपने भाषण में कई राजनीतिक विषयों को भी शामिल किया. उन्होंने एक बार फिर "सेव अमेरिका एक्ट" के समर्थन में बात की. यह चुनाव संबंधी विधेयक है, जिसका अमेरिकी कांग्रेस में कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने भी विरोध किया है.
ट्रंप ने अमेरिकी संविधान के दूसरे संशोधन के प्रति अपने समर्थन को भी दोहराया. इसके अलावा उन्होंने साम्यवाद की आलोचना की और इसे अपने राजनीतिक संदेश का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया. हाल के महीनों में यह विषय उनके सार्वजनिक अभियानों में लगातार प्रमुखता से उभरता रहा है. उन्होंने कहा, "आप या तो कार्ल मार्क्स के प्रति वफादार हो सकते हैं, या अमेरिका के प्रति. आप या तो कम्युनिस्ट हो सकते हैं, या देशभक्त. आप दोनों एक साथ नहीं हो सकते.”
ट्रंप ने कहा, "हम हमेशा शीर्ष पर रहेंगे. हम अपने देश को कभी गिरने नहीं देंगे. हम हमेशा सर्वश्रेष्ठ रहेंगे."
मौसम की मार के बीच मनाई गई वर्षगांठ
स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ को लेकर पूरे वर्ष उत्साह बना रहा. यह अवसर अमेरिकियों के लिए अपने इतिहास पर विचार करने का मौका भी बना, जिसमें एक उपनिवेश से वैश्विक शक्ति बनने तक की यात्रा शामिल है.
इस बीच अमेरिका के पूर्वी हिस्से में अत्यधिक गर्मी और खराब मौसम ने कई समारोहों को प्रभावित किया. कनेक्टिकट के हार्टफर्ड और पेनसिल्वेनिया के हैरिसबर्ग और विल्क्स-बारे में कार्यक्रम रद्द कर दिए गए. बोस्टन में आतिशबाजी और संगीत समारोह के दौरान लोगों को कुछ समय के लिए सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया, जबकि फिलाडेल्फिया में भी ऐसे ही निर्देश जारी किए गए.
न्यूयॉर्क और पिट्सबर्ग में आतिशबाजी कार्यक्रम आयोजित किए गए, हालांकि मौसम को देखते हुए उनके समय में बदलाव किया गया. वॉशिंगटन में स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण रही. ग्रेट अमेरिकन स्टेट फेयर में शाम को लोगों से क्षेत्र खाली करने की अपील की गई. इसके बाद बड़ी संख्या में लोग संग्रहालयों, मेट्रो स्टेशनों और संघीय इमारतों में पहुंचे. कई लोगों ने एयर कंडीशनिंग वाले भवनों में शरण लेकर गर्मी से राहत पाने की कोशिश की.
देशभर में उत्साह
समारोह शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में लोग नेशनल मॉल क्षेत्र में जुट चुके थे. न्यूयॉर्क की टीना हेल अपने तीन पोते-पोतियों के साथ कार्यक्रम में पहुंची थीं. इस दौरान सैन्य विमानों की उड़ान भी आकर्षण का केंद्र रही. पेनसिल्वेनिया के डेविड कोश्को और उनकी पत्नी जेनिफर कोश्को भी समारोह देखने वॉशिंगटन पहुंचे थे. डेविड कोश्को मरीन कोर रिजर्व के पूर्व सदस्य हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ का हिस्सा बनना अपने आप में एक विशेष अनुभव है.
फिलाडेल्फिया में, जहां स्वतंत्रता घोषणापत्र को अपनाया गया था, दोपहर से ही उत्सव का माहौल दिखाई दिया. इंडिपेंडेंस हॉल के आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हुए. उसी दिन फिलाडेल्फिया स्टेडियम में फ्रांस और पराग्वे के बीच विश्व कप फुटबॉल का नॉकआउट मुकाबला भी खेला गया, जिसकी शुरुआत स्वतंत्रता दिवस से जुड़े आयोजनों के साथ हुई.
न्यूयॉर्क में 43 बड़े नौकायन जहाजों का काफिला स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी और हडसन नदी के आसपास निकला. इसके बाद हवाई प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें स्टेल्थ बॉम्बर, नौसेना की ब्लू एंजेल्स टीम और फ्रांसीसी वायुसेना की पैट्रूई द फ्रांस एरोबेटिक टीम ने हिस्सा लिया. वर्जीनिया स्थित जॉर्ज वॉशिंगटन के माउंट वर्नन परिसर में कई लोगों ने अमेरिकी नागरिकता ग्रहण करने की शपथ ली. राष्ट्रीय गान के दौरान उन्होंने आंखें बंद कर अपने दिल पर हाथ रखा.
एरिजोना के फीनिक्स शहर में भी लोग स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जमा हुए. वहां मौजूद जयलन डोर्च ने कहा कि अमेरिका के युवाओं की स्वतंत्र सोच उन्हें भविष्य के प्रति आशान्वित बनाती है. उन्होंने कहा कि देश को उन मेहनतकश लोगों को हमेशा याद रखना चाहिए जो रोजमर्रा के काम से अमेरिका को आगे बढ़ाते हैं.
दुनियाभर से बधाई
भारत समेत दुनिया के कई नेताओं ने इस मौके पर अमेरिका को बधाई दी है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा, "भारत और अमेरिका के बीच केवल एक रणनीतिक साझेदारी ही नहीं है. लोकतंत्र, कानून के शासन और अपने लोगों की असीम संभावनाओं में हमारी साझा आस्था हमारी दोस्ती को वैश्विक कल्याण की एक सशक्त शक्ति बनाती है. मैं कामना करता हूं कि अगले 250 वर्ष अमेरिका के लिए और अधिक समृद्धि, शांति तथा प्रगति लेकर आएं, और भारत-अमेरिका साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएं.”
1776 से पहले अमेरिका के बड़े हिस्से पर ब्रिटेन का शासन था. 4 जुलाई 1776 को फिलाडेल्फिया में 'कॉन्टिनेंटल कांग्रेस' यानी अमेरिकी प्रतिनिधियों की सभा ने आधिकारिक तौर पर स्वतंत्रता के घोषणापत्र को मंजूरी दी. इस ऐतिहासिक दस्तावेज को मुख्य रूप से थॉमस जेफरसन ने तैयार किया था. इसके जरिए अमेरिका ने खुद को ब्रिटिश साम्राज्य से पूरी तरह आजाद और एक संप्रभु राष्ट्र घोषित कर दिया. इसीलिए हर साल 4 जुलाई को अमेरिका का राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 05, 2026 01:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

