ITR Filing Deadline FY 2025–26: इनकम टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख करीब: समय पर ITR फाइल न करने पर लगेगा जुर्माना, जानिए सभी नियम और डेडलाइन
निर्धारित समय सीमा के भीतर रिटर्न दाखिल न करने पर करदाताओं को स्वतः वित्तीय जुर्माने, दंडात्मक ब्याज और कई अन्य कर लाभों से वंचित होना पड़ सकता है.
ITR Filing Deadline FY 2025–26: केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने वित्तीय वर्ष 2025–26 (आकलन वर्ष 2026–27) के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथियों का निर्धारण कर दिया है. देश के लाखों वेतनभोगी कर्मचारियों, व्यक्तिगत करदाताओं और व्यावसायिक संस्थाओं के लिए इन वैधानिक तिथियों का पालन करना अनिवार्य है.
निर्धारित समय सीमा के भीतर रिटर्न दाखिल न करने पर करदाताओं को स्वतः वित्तीय जुर्माने, दंडात्मक ब्याज और कई अन्य कर लाभों से वंचित होना पड़ सकता है.
करदाता श्रेणी के अनुसार वैधानिक तिथियां (Due Dates)
आयकर विभाग ने करदाताओं की श्रेणियों और उनके खातों के ऑडिट की आवश्यकता के आधार पर अलग-अलग समय सीमाएं तय की हैं:
-
वेतनभोगी व्यक्ति और गैर-ऑडिट करदाता: बिना ऑडिट वाले व्यक्तिगत करदाताओं और नौकरीपेशा लोगों के लिए साधारण रिटर्न (ITR-1 और ITR-2) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है.
-
गैर-ऑडिट व्यावसायिक एवं पेशेवर करदाता: व्यावसायिक या पेशेवर आय वाले ऐसे व्यक्ति (ITR-3 और ITR-4), जिन्हें ऑडिट की आवश्यकता नहीं है, उनके लिए अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है.
-
ऑडिट वाले व्यवसाय और पेशेवर: जिन करदाताओं या व्यवसायों के खातों का टैक्स ऑडिट अनिवार्य है, उनके लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 है.
-
ट्रांसफर प्राइजिंग मामले: अंतरराष्ट्रीय या निर्दिष्ट घरेलू लेनदेन करने वाले संस्थानों के लिए अंतिम सीमा 30 नवंबर 2026 है.
डेडलाइन चूकने पर वित्तीय पेनल्टी और ब्याज
समय पर आयकर रिटर्न दाखिल न करने की स्थिति में करदाताओं पर दो मुख्य वित्तीय प्रभार लागू होते हैं:
1. विलंब शुल्क (धारा 234F)
आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत ई-फाइलिंग पोर्टल द्वारा स्वतः लेट फी जोड़ी जाती है:
-
5,000 रुपये: उन करदाताओं के लिए जिनकी कुल कर योग्य आय 5 लाख रुपये से अधिक है.
-
1,000 रुपये: उन करदाताओं के लिए जिनकी कुल कर योग्य आय 5 लाख रुपये या उससे कम है.
-
शून्य: जिन व्यक्तियों की कुल आय मूल छूट सीमा से कम है, उन पर लेट फी लागू नहीं होती.
2. बकाया कर पर दंडात्मक ब्याज (धारा 234A)
यदि करदाता पर मूल देय तिथि के बाद स्व-मूल्यांकन कर (Self-Assessment Tax) की देनदारी बकाया रहती है, तो धारा 234A के तहत देय तिथि के अगले दिन से लेकर रिटर्न जमा होने के दिन तक बकाया राशि पर 1% प्रति माह (या महीने के हिस्से) की दर से ब्याज वसूला जाता है.
देरी से रिटर्न दाखिल करने के अन्य नुकसान
अंतिम तिथि छूटने का प्रभाव केवल आर्थिक जुर्माने तक ही सीमित नहीं है:
-
घाटे को आगे ले जाने (Carry Forward Losses) का नुकसान: समय सीमा के बाद रिटर्न दाखिल करने वाले करदाता भविष्य की आय के खिलाफ अपने पूंजीगत घाटे (Capital Losses) या व्यावसायिक घाटे को सेट-ऑफ और कैरी फॉरवर्ड करने का अधिकार खो देते हैं.
-
रिफंड में देरी: देरी से जमा किए गए रिटर्न के सत्यापन और प्रोसेसिंग में समय लगता है, जिससे रिफंड जारी होने में देरी होती है.
-
टैक्स रिजीम चुनने में बाधा: विलंबित रिटर्न दाखिल करने वाले करदाता स्वचालित रूप से नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) में चले जाते हैं और उस वर्ष के लिए पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) चुनने का विकल्प खो देते हैं.
डेडलाइन बीत जाने के बाद फाइलिंग के विकल्प
यदि मूल तिथि छूट जाती है, तो भी करदाताओं के पास अपना रिटर्न नियमित करने के कानूनी विकल्प उपलब्ध रहते हैं:
-
विलंबित रिटर्न (Belated Return): धारा 139(4) के तहत करदाता धारा 234F के विलंब शुल्क और धारा 234A के ब्याज का भुगतान करके 31 दिसंबर 2026 तक अपना विलंबित रिटर्न दाखिल कर सकते हैं.
-
संशोधित रिटर्न (Revised Return): जिन्होंने अपना मूल रिटर्न समय पर जमा किया था, वे किसी त्रुटि या चूक को सुधारने के लिए धारा 139(5) के तहत 31 दिसंबर 2026 तक संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकते हैं.
-
अद्यतन रिटर्न (ITR-U): धारा 139(8A) के तहत, जो करदाता मूल और विलंबित दोनों तिथियों को चूक जाते हैं, वे 25% से 70% तक के अतिरिक्त कर जुर्माने का भुगतान करके संबंधित आकलन वर्ष के अंत से 48 महीनों के भीतर अद्यतन रिटर्न दाखिल कर सकते हैं.