8th Pay Commission Update: 8वें वेतन आयोग को लेकर रेलवे पेंशनर्स की मांग, हर साल 5% वेतन वृद्धि, न्यूनतम वेतन बढ़ाने और बेहतर फिटमेंट फैक्टर पर जोर
रेलवे सीनियर सिटीजंस वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने 8वें वेतन आयोग को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है. इसमें केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, पेंशन ढांचे, फिटमेंट फैक्टर और वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) में बड़े सुधारों की मांग की गई है.
8th Pay Commission Update: रेलवे सीनियर सिटीजंस वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) के समक्ष एक विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया है. इस ज्ञापन में केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के मौजूदा वेतन और पेंशन ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव करने की सिफारिश की गई है. संगठन का तर्क है कि अगले वेतन आयोग को कर्मचारियों के लिए निष्पक्षता, दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा और महंगाई से सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए.
पेंशनभोगी संस्था ने अपने बयान में कहा है कि 8वें वेतन आयोग द्वारा अनुशंसित वेतन संरचना सेवारत कर्मचारियों के साथ-साथ पेंशनभोगियों के लिए भी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली होनी चाहिए. चूंकि पेंशन का निर्धारण सीधे तौर पर अंतिम आहरित वेतन (Last Drawn Pay) या पे-मैट्रिक्स के काल्पनिक वेतन से होता है, इसलिए दोनों के बीच एक संतुलित दृष्टिकोण होना अनिवार्य है. यह भी पढ़े: 8th Pay Commission Fitment Factor: 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ा अपडेट, फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी से कर्मचारियों की कितनी बढ़ेगी सैलरी? जानें पूरी जानकारी
मूल वेतन (Basic Pay) को मजबूत करने पर जोर
RSCWS ने इस बात पर विशेष बल दिया है कि मूल वेतन (Basic Pay) ही वेतन संरचना का मुख्य आधार बने रहना चाहिए. इसका सीधा कारण यह है कि ग्रेच्युटी, पेंशन और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले अन्य लाभ पूरी तरह मूल वेतन पर ही निर्भर करते हैं.
ज्ञापन के अनुसार, संशोधित मूल वेतन में बढ़ती जीवन यापन लागत, महंगाई और सार्वजनिक सेवा के महत्व की सही झलक मिलनी चाहिए. इसके साथ ही निचले और उच्च स्तर के वेतनमानों के बीच अत्यधिक असमानता को कम करते हुए सभी श्रेणियों में समान वृद्धि सुनिश्चित करने की मांग की गई है.
न्यूनतम वेतन (Minimum Pay) का वैज्ञानिक निर्धारण
संगठन ने सुझाव दिया है कि न्यूनतम वेतन की गणना भारतीय श्रम सम्मेलन (ILC) द्वारा विकसित मानदंडों और 7वें वेतन आयोग द्वारा अपनाए गए सिद्धांतों के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से की जानी चाहिए.
संस्था का कहना है कि न्यूनतम वेतन तय करते समय 1 जनवरी 2026 के मूल्य सूचकांक (Price Index) को आधार बनाया जाना चाहिए. इस गणना में आधुनिक समय के खर्चों जैसे आवास, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी को भी वास्तविक रूप से शामिल किया जाना चाहिए ताकि सरकारी सेवा सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के वेतन स्तर के समकक्ष बनी रहे.
वार्षिक वेतन वृद्धि को 3% से बढ़ाकर 5% करने की मांग
कर्मचारियों की वित्तीय प्रगति को बेहतर बनाने के लिए संस्था ने एक प्रमुख मांग यह रखी है कि वार्षिक वेतन वृद्धि की दर को मौजूदा 3% से बढ़ाकर 5% किया जाए.
ज्ञापन में तर्क दिया गया है कि निरंतर बनी रहने वाली महंगाई और लंबे करियर को देखते हुए वर्तमान 3% की इंक्रीमेंट दर अब नाकाफी साबित हो रही है. कर्मचारियों के मनोबल और वित्तीय प्रगति को बनाए रखने के लिए सेवा के विशिष्ट वर्षों के बाद अतिरिक्त समय-बद्ध इंक्रीमेंट देने का भी सुझाव दिया गया है.
पे-मैट्रिक्स और फिटमेंट फैक्टर में सुधार
RSCWS ने 7वें वेतन आयोग द्वारा पेश की गई पे-मैट्रिक्स व्यवस्था की पारदर्शिता की सराहना की, लेकिन साथ ही दो नजदीकी स्तरों (Adjacent Levels) के बीच कम अंतर होने पर चिंता जताई है. संस्था ने 8वें वेतन आयोग से आग्रह किया है कि विशेष रूप से मध्यम और उच्च ग्रेड में वेतन स्तरों के बीच के फासले की समीक्षा की जाए ताकि पदोन्नति (Promotion) मिलने पर कर्मचारियों को सार्थक वित्तीय लाभ मिल सके.
इसके अलावा, एक बेहतर फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) की मांग की गई है जो केवल महंगाई भत्ते (DA) के असर को बेअसर करने तक सीमित न हो, बल्कि वास्तविक आय वृद्धि प्रदान करे. संगठन का कहना है कि वेतन में होने वाला कोई भी सुधार स्वचालित रूप से पेंशनभोगियों के लिए भी लागू होना चाहिए ताकि पुराने और नए सेवानिवृत्त लोगों के बीच कोई असमानता पैदा न हो.
मौजूदा प्रणाली की 8 प्रमुख संरचनात्मक चुनौतियां
रेलवे पेंशनर्स सोसाइटी ने 8वें वेतन आयोग का ध्यान मौजूदा प्रणाली की आठ मुख्य विसंगतियों की ओर खींचा है, जिन पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है.
निष्कर्ष: RSCWS के अनुसार, इन चुनौतियों से निपटने के लिए 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा जो मूल वेतन को मजबूत करे, सार्थक वेतन प्रगति सुनिश्चित करे और पेंशनभोगियों के वित्तीय हितों की रक्षा करे. एक सुगठित वेतन प्रणाली से ही कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों दोनों के लिए निष्पक्षता और दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 11, 2026 09:49 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

