8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ तो कितनी बढ़ेगी सैलरी? ₹35,000 बेसिक का जानें पूरा कैलकुलेशन
8वें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन संशोधन को लेकर चर्चाएं तेज हैं. जानिए फिटमेंट फैक्टर और 7 प्रतिशत सालाना इंक्रीमेंट के गणित से ₹35,000 बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों का वेतन कितना बढ़ सकता है.
8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की सिफारिशों को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच उत्सुकता बनी हुई है. हालिया चर्चाओं में यह सवाल प्रमुखता से सामने आ रहा है कि कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी के लिए फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) ज्यादा फायदेमंद होगा या सालाना इंक्रीमेंट (Annual Increment) की दर को बढ़ाना. कर्मचारी संगठनों द्वारा सालाना इंक्रीमेंट को मौजूदा 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत करने की मांग भी उठाई जा रही है. विश्लेषकों का मानना है कि इन दोनों पैमानों का सही संतुलन कर्मचारियों की लंबी अवधि की कमाई में बड़ा अंतर ला सकता है.
फिटमेंट फैक्टर और इंक्रीमेंट का गणित
फिटमेंट फैक्टर एक ऐसा गुणक (Multiplier) होता है, जिसका उपयोग पुराने वेतन आयोग की बेसिक सैलरी को नए वेतन आयोग के तहत संशोधित बेसिक सैलरी में बदलने के लिए किया जाता है. 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था. यह भी पढ़े: 8th Pay Commission News: 8वें वेतन आयोग की बड़ी अपडेट, केंद्रीय कर्मचारियों का DA सितंबर में बढ़कर 63% हो सकता है, जानिए ताजा जानकारी
दूसरी ओर, सालाना इंक्रीमेंट वह दर है जिससे हर साल कर्मचारी के मूल वेतन में बढ़ोतरी होती है. वर्तमान में यह दर 3 प्रतिशत है. कर्मचारी महासंघों का तर्क है कि यदि सालाना इंक्रीमेंट को बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया जाए, तो कर्मचारियों का वेतन 6 से 7 वर्षों में दोगुना हो सकता है.
₹35,000 बेसिक सैलरी वालों पर कितना होगा असर?
वित्तीय विश्लेषकों के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, यदि ₹35,000 की बेसिक सैलरी वाले कर्मचारी पर 2.15 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो उसकी शुरुआती संशोधित बेसिक सैलरी सीधे ₹75,250 हो जाएगी.
इसके बाद, यदि 3 प्रतिशत की दर से सालाना इंक्रीमेंट मिलता रहता है, तो 10 वर्षों में यह बेसिक सैलरी बढ़कर ₹1,01,130 के करीब पहुंच सकती है.
इसके विपरीत, यदि फिटमेंट फैक्टर लागू न किया जाए और केवल सालाना इंक्रीमेंट की दर बढ़ाकर 7 प्रतिशत या 10 प्रतिशत कर दी जाए, तो ₹35,000 की बेसिक सैलरी को ₹90,000 या ₹1,00,000 तक पहुंचने में काफी अधिक समय लगेगा. इसलिए फिटमेंट फैक्टर का शुरुआती उछाल कर्मचारियों के लिए बेहद निर्णायक माना जाता है.
कर्मचारी महासंघों की मांगें
विभिन्न कर्मचारी संगठन जैसे नेशनल काउंसिल - जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) और ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) उच्च फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं. यूनियनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की लागत को देखते हुए केवल मामूली फिटमेंट फैक्टर पर्याप्त नहीं होगा. वे शुरुआती वेतन में ठोस बढ़ोतरी के साथ-साथ सालाना इंक्रीमेंट की दर में भी सुधार की वकालत कर रहे हैं.
अंतिम निर्णय पर टिकीं निगाहें
फिलहाल ये सभी आंकड़े विभिन्न अनुमानों और कर्मचारी संगठनों के ज्ञापनों पर आधारित हैं. 8वें वेतन आयोग द्वारा अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद ही वास्तविक फिटमेंट फैक्टर और वेतन संरचना की तस्वीर साफ हो सकेगी. सरकार द्वारा मंजूरी मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ₹35,000 या अन्य पे-लेवल वाले कर्मचारियों के कुल वेतन में कितना इजाफा होता है