Indian Railways: भारतीय रेलवे और सेना की बड़ी पहल, पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को रिटायरमेंट के बाद रेलवे में मिलेंगे करियर के नए अवसर
भारतीय रेलवे और सेना ने 'फ्रेमवर्क ऑफ कोऑपरेशन' के जरिए पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए रोजगार के नए अवसर सुरक्षित किए हैं. इसके तहत रेलवे की भर्तियों में विशेष आरक्षण और सहायता प्रणाली लागू की गई है.
मुंबई, 28 फरवरी 2026. सेवानिवृत्त रक्षा कर्मियों को मुख्यधारा के रोजगार से जोड़ने की दिशा में भारतीय रेलवे और भारतीय सेना ने एक महत्वपूर्ण 'फ्रेमवर्क ऑफ कोऑपरेशन' (Framework of Cooperation) लॉन्च किया है. इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य पूर्व सैनिकों और अपना कार्यकाल पूरा करने वाले 'अग्निवीरों' के लिए रेलवे में रोजगार के व्यवस्थित अवसर और एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम तैयार करना है. यह योजना न केवल सैनिकों को एक सुरक्षित भविष्य प्रदान करेगी, बल्कि रेलवे के बुनियादी ढांचे को एक अनुशासित कार्यबल भी उपलब्ध कराएगी.
आरक्षण नीति और पदों का विवरण
नई नीति के तहत रेलवे ने पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए पदों की श्रेणियों के आधार पर आरक्षण के स्पष्ट मानक निर्धारित किए हैं. यह भी पढ़े: Siachen Avalanche: सियाचिन में भीषण हिमस्खलन, दो अग्निवीर समेत सेना के तीन जवान शहीद
पूर्व सैनिकों (Ex-Servicemen) के लिए:
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लेवल-1 के पदों में 20 प्रतिशत आरक्षण.
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लेवल-2 और उससे ऊपर के पदों में 10 प्रतिशत आरक्षण.
पूर्व अग्निवीरों (Ex-Agniveers) के लिए:
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लेवल-1 के पदों में 10 प्रतिशत आरक्षण.
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लेवल-2 और उससे ऊपर के पदों में 5 प्रतिशत आरक्षण.
आंकड़ों के अनुसार, केवल वर्ष 2024 और 2025 में ही इस नियम के तहत पूर्व सैनिकों के लिए कुल 14,788 पद आरक्षित किए गए थे, जो इस पहल के बड़े पैमाने को दर्शाता है.
अनुबंध के आधार पर 'पॉइंट्समैन' की भर्ती
नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक रेलवे ने अंतरिम उपाय के रूप में पूर्व सैनिकों को अनुबंध (Contract) के आधार पर 'पॉइंट्समैन' के रूप में नियुक्त करना शुरू किया है. वर्तमान में विभिन्न जिला और जोनल डिवीजनों में लेवल-1 के 5,000 से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है. अब तक नौ डिवीजनों ने पॉइंट्समैन की भर्ती को सरल बनाने के लिए भारतीय सेना के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं.
कौशल साझाकरण और रणनीतिक समन्वय
यह फ्रेमवर्क केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेना और रेलवे के बीच कौशल साझा करने को भी बढ़ावा देता है. सेना के जवान अक्सर कम उम्र में सेवानिवृत्त हो जाते हैं, जिससे उनके पास लंबा कार्य अनुभव और बेहतरीन प्रबंधन क्षमता होती है. रेलवे का मानना है कि इन जवानों का परिचालन अनुभव और अनुशासन रेलवे नेटवर्क के आधुनिकीकरण में सहायक होगा.
भविष्य की राह
अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीर 21 वर्ष की आयु तक भर्ती होते हैं और चार साल की सेवा के बाद लगभग 25 वर्ष की आयु में नागरिक जीवन में लौटते हैं. वहीं अन्य रैंक के सैनिक 30 या 40 की उम्र के बीच रिटायर होते हैं. रेलवे और सेना का यह सहयोग इन प्रशिक्षित कर्मियों को नागरिक भूमिकाओं में सुचारू रूप से स्थानांतरित करने में मदद करेगा. इससे न केवल वेटरन्स को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, बल्कि देश के परिवहन नेटवर्क को भी मजबूती मिलेगी.