नई दिल्ली: अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ (US Tariff) की डेडलाइन (27 अगस्त) नजदीक है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने साफ कर दिया है कि भारत किसी भी दबाव के आगे झुकेगा नहीं. अहमदाबाद में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "दबाव कितना भी हो, हम उसे सहने की ताकत लगातार बढ़ाते रहेंगे. आज आत्मनिर्भर भारत अभियान को गुजरात से नई ऊर्जा मिल रही है, और इसके पीछे दो दशकों की मेहनत है."
ट्रंप के 50% टैरिफ पर भारत की तैयारी, मंगलवार को PMO की बड़ी बैठक.
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया आजकल आर्थिक स्वार्थ की नीतियों पर चल रही है, लेकिन भारत अपने नागरिकों के हितों को सर्वोपरि रखेगा. उन्होंने छोटे दुकानदारों, किसानों, पशुपालकों और छोटे उद्यमियों को भरोसा दिलाया. "गांधीजी की धरती से मैं वादा करता हूं कि मोदी के लिए आपके हित सबसे महत्वपूर्ण हैं. मेरी सरकार कभी आपको नुकसान नहीं होने देगी."
किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के लिए आश्वासन
इसी महीने स्वतंत्रता दिवस भाषण में भी मोदी ने "स्वदेशी उत्पादों" के इस्तेमाल पर जोर दिया था. उनका कहना है कि भारत किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के खिलाफ किसी भी नुकसानदायक नीति को स्वीकार नहीं करेगा. पीएम ने कहा, "मोदी दीवार बनकर खड़ा है, किसानों और मछुआरों के हितों में कोई समझौता नहीं होगा."
अमेरिका का 50% टैरिफ: क्यों बढ़ा तनाव?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अगस्त में भारत से आने वाले माल पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाकर कुल शुल्क 50% कर दिया. यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि भारत ने रूस से तेल की खरीद जारी रखी थी. इस कदम के बाद भारत-अमेरिका के बीच होने वाली व्यापार वार्ता अचानक स्थगित कर दी गई, जिससे द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर अनिश्चितता छा गई है.
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा, "भारत हमारा दोस्त है, लेकिन उनके टैरिफ बहुत ज्यादा हैं और गैर-शुल्कीय बाधाएं सबसे कठिन हैं. यही वजह है कि हमारे बीच व्यापार सीमित रहा है."
भारत की रणनीति
हालांकि अमेरिका के दबाव के बीच भारत पीछे हटने को तैयार नहीं है. नई दिल्ली एक साथ कई देशों यूके, ईयू, EFTA और ASEAN – के साथ व्यापार वार्ता आगे बढ़ा रहा है. साथ ही भारत अमेरिका के साथ ऊर्जा सहयोग और कांग्रेस (Capitol Hill) में संवाद को मजबूत कर रहा है ताकि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी मौजूदा टकराव पर भारी पड़े.













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