ट्रंप के 50% टैरिफ पर भारत की तैयारी, मंगलवार को PMO की बड़ी बैठक
PM Modi and Donald Trump | X

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है. अमेरिका ने भारतीय सामान पर 50% टैरिफ (Tariff) लगाने का ऐलान किया है, जो बुधवार से लागू होगा. इस बढ़े हुए टैक्स का सीधा असर भारत के निर्यातकों पर पड़ेगा. इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने 26 अगस्त को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाने का फैसला किया है. इस अहम बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के प्रिंसिपल सेक्रेटरी करेंगे. बैठक का मकसद यह समझना है कि अमेरिका के फैसले से भारतीय निर्यातकों को कैसे बचाया जाए और किन-किन कदमों से उनके नुकसान को कम किया जा सकता है.

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अब तक 25% टैक्स ही निर्यातकों के लिए बोझ था, लेकिन अब यह दोगुना होकर 50% हो गया है. निर्यातकों का कहना है कि पहले ही उनकी लागत बढ़ गई है और मुनाफा घट गया है. कई सेक्टर जैसे टेक्सटाइल, लेदर, इंजीनियरिंग गुड्स और स्पेशलिटी केमिकल्स पर इसका खास असर पड़ेगा.

सरकार के विकल्प क्या हैं?

वाणिज्य मंत्रालय ने पिछले कुछ दिनों में निर्यातकों और Export Promotion Councils से बातचीत की है. चर्चा में कुछ अहम विकल्प सामने आए हैं:

  1. सेक्टर-विशेष मदद: पूरे उद्योग जगत को राहत देने के बजाय चुनिंदा सेक्टरों को सपोर्ट करना.
  2. क्रेडिट स्कीम: निर्यातकों ने Emergency Credit Line Guarantee Scheme (ECLGS) मांगी थी, जिससे बिना गिरवी रखे उन्हें कार्यशील पूंजी मिल सके. सरकार इस पर विचार कर रही है कि छोटे उद्योगों को अलग-अलग सेक्टर-आधारित क्रेडिट लाइन दी जाए.
  3. क्लस्टर-आधारित फंड: छोटे-छोटे निर्यातक समूहों (Clusters) के लिए खास फंड बनाना ताकि उनकी नकदी की समस्या हल हो.

छोटे और मध्यम उद्योगों पर फोकस

अधिकारियों का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता निर्यात-आधारित यूनिट्स और SME (Small and Medium Enterprises) की रक्षा करना है, क्योंकि यही सेक्टर बाहरी झटकों के लिए सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं.

मंगलवार की बैठक में सरकार अंतिम रणनीति तय कर सकती है. यह तय होगा कि किन-किन सेक्टरों को राहत पैकेज मिलेगा और निर्यातकों को किस तरह तुरंत सहायता दी जाएगी.