भारत-अमेरिका ट्रेड डील के करीब, विपक्ष ने कहा 'सरेंडर' किया
भारत और अमेरिका व्यापार समझौते की अंतरिम रूपरेखा पर सहमत हो गए हैं.
भारत और अमेरिका व्यापार समझौते की अंतरिम रूपरेखा पर सहमत हो गए हैं. साथ ही ट्रंप ने रूसी तेल न खरीदने की शर्त पर भारत के लिए टैरिफ घटाया है. मोदी सरकार इसे सराह रही है, वहीं विपक्षी दलों ने इसे 'आत्मसमर्पण' बताया.अमेरिका और भारत व्यापार समझौते के करीब आ गए हैं. दोनों देशों ने 6 फरवरी को एक साझा अंतरिम रूपरेखा जारी की है जिसके तहत शुल्क घटेंगे, ऊर्जा संबंधों को नया रूप दिया जाएगा और आर्थिक सहयोग को गहरा किया जाएगा. इस घोषणा के मुताबिक, दोनों देश ग्लोबल सप्लाई चेन को फिर से व्यवस्थित करना चाहते हैं. नई स्थिति में भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत हो जाएगा. भारत और अमेरिका ने एक साझा बयान में कहा कि समझौते को पूरा करने के लिए आगे की बातचीत की जरूरत है.
रूसी तेल खरीद के कारण लगा टैरिफ हटा
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के जरिए रूसी तेल खरीदने के कारण भारतीय सामानों पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ को भी हटाया है. ट्रंप प्रशासन के मुताबिक, भारत ने रूसी तेल का "प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आयात बंद करने" का वादा किया है.
आदेश में कहा गया है कि अमेरिकी अधिकारी इसकी निगरानी करेंगे और अगर भारत, रूस से तेल की खरीद फिर से शुरू करता है तो टैरिफ को दोबारा लागू करने की सिफारिश करेंगे. अमेरिका, रूस के साथ ऊर्जा संबंधों को सीमित करने के लिए भारत पर लगातार दबाव बनाए हुए है.
किसानों के हित सुरक्षित: भारत
वाइट हाउस ने वेबसाइट पर व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनने की जानकारी दी. वहीं भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने "मजबूत संबंधों के प्रति उनकी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता" के लिए डॉनल्ड ट्रंप को धन्यवाद कहा. मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, "यह रूपरेखा हमारी साझेदारी की बढ़ती गहराई, भरोसे और गतिशीलता को दर्शाती है.” उन्होंने आगे कहा कि यह "हमारे बीच निवेश और तकनीक की साझेदारी को और गहरा करेगी.”
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता "संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों की पूरी तरह से रक्षा" करके किसानों के हितों और ग्रामीण आजीविका को सुरक्षित करने वाला है.
एक प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि जेनेटिकली मॉडिफाइड कृषि उत्पादों के आयात की सीधे तौर पर इजाजत नहीं दी जाएगी क्योंकि समझौते में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था. हालांकि सेब जैसे फलों को टैरिफ कोटे के तहत अनुमति दी जाएगी. पीयूष गोयल ने रूसी तेल पर टिप्पणी करने से मना कर दिया और कहा कि विदेश मंत्रालय इस पर जवाब देगा.
भारत 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा: अमेरिका
शुक्रवार को जारी संयुक्त बयान में यह बात भी कही गई है कि भारत पांच साल के दौरान 500 अरब डॉलर का अमेरिकी सामान खरीदेगा, जिसमें तेल, गैस, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं और टेक्नोलॉजी उत्पाद शामिल हैं. आखिरी कैटेगरी में ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर एआई के लिए किया जाता है.
इसमें कहा गया है कि भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक सामानों और अमेरिकी खाद्य व कृषि उत्पादों की एक बड़ी रेंज पर टैरिफ खत्म या कम करेगा. इसमें पशु आहार के लिए सूखे अनाज और लाल ज्वार, सूखे मेवे, ताजा और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और शराब शामिल हैं.
लेकिन यह डील भारत से अमेरिका को होने वाले अधिकांश आयात पर 18 फीसदी टैरिफ दर लागू करेगी, जिसमें कपड़ा और वस्त्र, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, ऑर्गेनिक रसायन, होम डेकोर, हस्तशिल्प उत्पाद और कुछ मशीनरी शामिल हैं.
इससे पहले पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा था कि वाशिंगटन और नई दिल्ली का लक्ष्य मार्च में एक औपचारिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करना है, जिसके बाद अमेरिकी निर्यात पर भारत की टैरिफ कटौती प्रभावी होगी.
विपक्ष ने क्या कहा
कांग्रेस पार्टी ने कहा कि यह ट्रेड डील अमेरिकी शर्तों पर तय हुई है और इससे किसानों और व्यापारियों को नुकसान हुआ है. उन्होंने इस समझौते को राष्ट्रीय हितों का "पूर्ण आत्मसमर्पण" बताया.
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने शनिवार को कहा, "वह भारत कहां है जो निक्सन, जॉर्ज बुश और ओबामा की आंखों में आंखें डालकर व्यावहारिक रिश्ते बनाता था? आज ऐसा क्यों लगता है कि भारत के आम लोगों के हितों को नरेंद्र मोदी और उनके दो दोस्तों, अंबानी और अडानी के हितों के आगे छोटा कर दिया गया है? यह अमेरिका के साथ कोई समझौता नहीं है, बल्कि हमारे आत्मसम्मान के साथ एक समझौता है."
राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया और कहा कि भारत के ऐतिहासिक 2.9 प्रतिशत टैरिफ को "धमकी" देकर 50 प्रतिशत तक बढ़ाया गया और फिर उसे घटाकर 18% किया गया. वे तर्क देते हैं कि यह कदम जश्न की एक वजह होने के बजाए देश के लिए हुआ एक नुकसान है.
इससे पहले अगस्त 2025 में भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत कैसे सिरे नहीं चढ़ पाई थी, तस्वीरों में देखिए.
(The above story first appeared on LatestLY on Feb 07, 2026 10:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

