मिडल ईस्ट तनाव के चलते भारत में LPG की किल्लत? क्या मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और चेन्नई में होटल-रेस्टोरेंट पर पड़ेगा असर; जानें मोदी सरकार का जवाब
मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में बढ़ते तनाव के कारण भारत के महानगरों में कमर्शियल एलपीजी की भारी किल्लत हो गई है. मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और चेन्नई के होटल और रेस्टोरेंट इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हैं, जिसके कारण आने वाले दिनों में खाने की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है
LPG Shortage: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर अब भारत की रसोई और विशेष रूप से होटल उद्योग पर दिखने लगा है. ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे प्रमुख महानगरों में कमर्शियल एलपीजी (19 किलोग्राम वाले सिलेंडर) की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है. ईंधन की खेप में देरी और सप्लाई चेन में आए व्यवधान के चलते देश के बड़े शहरों में गैस संकट गहरा गया है.
मिडल ईस्ट युद्ध और आपूर्ति में रुकावट
इस संकट की मुख्य जड़ फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में जहाजों की आवाजाही का धीमा होना है. ईरान-इजरायल युद्ध के कारण समुद्री सुरक्षा जोखिम और बीमा प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे टैंकरों की आवाजाही पर असर पड़ा है. यह भी पढ़े: LPG Booking Rule Changed: एलपीजी बुकिंग नियम में बड़ा बदलाव, मिडल ईस्ट में तनाव के चलते अब सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक करा पाएंगे, पहले था 21 दिन
भारत अपनी एलपीजी जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, विशेष रूप से मिडल ईस्ट से आने वाले ब्यूटेन और प्रोपेन पर. शिपमेंट में हो रही देरी के कारण डिस्ट्रीब्यूटर्स के पास स्टॉक खत्म हो रहा है, जिससे कमर्शियल सिलेंडरों की डिलीवरी में 3 से 5 दिनों की देरी हो रही है.
होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर बढ़ता दबाव
कमर्शियल गैस की कमी का सबसे बुरा असर छोटे भोजनालयों और रेस्टोरेंट्स पर पड़ रहा है, जो पूरी तरह से एलपीजी पर निर्भर हैं.
- बेंगलुरु और चेन्नई: यहां रेस्टोरेंट मालिकों ने बताया है कि उन्हें सिलेंडर की रिफिल के लिए कई दिनों का इंतजार करना पड़ रहा है.
- मुंबई और कोलकाता: कई छोटे होटलों ने अपने मेनू में कटौती कर दी है या संचालन जारी रखने के लिए वैकल्पिक ईंधनों का सहारा लेना शुरू कर दिया है.
'फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशंस ऑफ इंडिया' (FHRAI) ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो परिचालन लागत बढ़ने के कारण रेस्टोरेंट्स को खाने के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं.
सरकार का रुख और आपूर्ति बहाल करने के प्रयास
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि भारत के पास पर्याप्त एलपीजी भंडार है और आपूर्ति की बारीकी से निगरानी की जा रही है.
सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को निर्देश दिए हैं कि वे उन शहरों में कमर्शियल सिलेंडरों के वितरण को प्राथमिकता दें जहां किल्लत सबसे ज्यादा है. इसके साथ ही, दक्षिण-पूर्वी एशिया और अफ्रीकी देशों से अतिरिक्त शिपमेंट मंगाने के विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है.
क्या घरेलू (Domestic) गैस पर भी होगा असर?
राहत की बात यह है कि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि घरेलू एलपीजी (14.2 किग्रा सिलेंडर) की आपूर्ति पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ा है. सरकार ने व्यवसायों और जनता से अपील की है कि वे घबराकर खरीदारी (Panic Buying) न करें.
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट मुख्य रूप से लॉजिस्टिक यानी परिवहन संबंधी है, न कि उत्पादन की कमी. हालांकि, आपूर्ति कितनी जल्दी सामान्य होगी, यह पूरी तरह से मिडल ईस्ट के हालातों और समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर निर्भर करेगा.