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मंगलवार को हो सकता है भारत-ईयू समझौते का ऐलान

जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने शुक्रवार को कहा कि यूरोपीय संघ और भारत के बीच व्यापार समझौता जल्द हो सकता है.

मंगलवार को हो सकता है भारत-ईयू समझौते का ऐलान
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने शुक्रवार को कहा कि यूरोपीय संघ और भारत के बीच व्यापार समझौता जल्द हो सकता है. यूरोपीय संघ के साथ समझौते की बातचीत भी अंतिम चरण में है.जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने शुक्रवार को कहा कि यूरोपीय संघ और भारत के बीच व्यापार समझौते की बातचीत का अहम हिस्सा पहले ही तय हो चुका है. उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेय लाएन इसी हफ्ते भारत की यात्रा करने वाली हैं, जहां इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने हैं.

रोम में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ जर्मनी-इटली अंतरसरकारी शिखर बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मैर्त्स ने कहा, "हम एक महत्वाकांक्षी यूरोपीय व्यापार नीति चाहते हैं.” उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ और दक्षिण अमेरिकी समूह मर्कोसुर देशों के बीच समझौता "एक महत्वपूर्ण सफलता” रहा है, और अब इसके बाद अन्य समझौते आगे बढेंगे, "सबसे पहले और सबसे प्रमुख रूप से भारत के साथ.”

उर्सुला फॉन डेय लाएन 2026 के गणतंत्र दिवस पर भारत में मुख्य अतिथि हैं. इसी दौरान भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रहे मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत के नतीजे की घोषणा होने की संभावना है.

इसी हफ्ते भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने यूरोपीय संघ के राजदूतों से मुलाकात की थी. इसके बाद एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा था कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच मजबूत रिश्ते विश्व अर्थव्यवस्था के जोखिम को कम कर सकते हैं.

क्या है समझौते में?

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इस समझौते के बाद यूरोप की कारों और वाइन पर शुल्क में कमी का रास्ता खुलेगा, जबकि भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र और रसायनों के लिए बाजार के विस्तार की संभावना बनेगी. यह घोषणा मंगलवार को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष अंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेय लाएन के साथ मुलाकात के बाद हो सकती है. कोस्टा और फॉन डेय लाएन 25 से 28 जनवरी के बीच भारत दौरे पर रहेंगे और इसी दौरान भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे.

यूरोपीय संघ के एक अधिकारी ने कहा कि यूरोपीय संघ का लक्ष्य शिखर सम्मेलन के दौरान "मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत को निष्कर्ष तक पहुंचाना” है. अधिकारी के मुताबिक, इसके बाद दोनों पक्ष हस्ताक्षर की दिशा में अपनी-अपनी घरेलू प्रक्रियाओं से गुजरेंगे.

दोनों पक्ष एक सुरक्षा और रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने की भी उम्मीद कर रहे हैं. यूरोप का एशिया में यह तीसरा ऐसा समझौता होगा. इससे पहले यूरोप दक्षिण कोरिया और जापान के साथ इसी तरह के समझौते कर चुका है. यूरोपीय अधिकारी ने यह भी कहा कि एक मोबिलिटी समझौता भी अपेक्षित है, जो उच्च कुशल कामगारों और छात्रों के बारे में होगा.

कितना वक्त लगेगा?

समझौते पर दस्तखत के बाद यूरोपीय संसद को इसकी पुष्टि करनी होगी, इस प्रक्रिया कम से कम एक साल लगते हैं. भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, इससे भारतीय निर्यात, खासकर वस्त्र और आभूषणों को बढावा मिल सकता है. बातचीत 2022 में दोबारा शुरू की गई थी. इससे पहले नौ साल का ठहराव रहा था. पिछले साल अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफों के बाद अंतरराष्ट्रीय व्यापार में तनाव बढ़ने के बीच इस बातचीत को नई गति मिली.

अगस्त में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारतीय आयात पर शुल्क को दोगुना कर दिया था, जो कुछ मामलों में 50 फीसदी तक पहुंच गया. यह दुनिया में सबसे ऊंचे स्तरों में शामिल था. दावोस में वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम के दौरान बीते मंगलवार को उर्सुला फॉन डेय लाएन ने कहा था कि यूरोपीय संघ इस समझौते को निष्कर्ष के करीब ले आया है, लेकिन उन्होंने यह भी माना था कि अभी और काम बाकी है.

यह संभावित समझौता ऐसे समय में आ रहा है जब यूरोपीय संघ और भारत दोनों ने हाल के महीनों में कई द्विपक्षीय व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाया है. यूरोपीय संघ ने हाल ही में दक्षिण अमेरिकी देशों के समूह मर्कोसुर के साथ समझौता किया है और अन्य व्यापार समझौतों पर भी काम किया है. वहीं भारत ने भी ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ओमान जैसे साझेदारों के साथ समझौते किए हैं.

इस तरह के समझौतों की तेजी यह संकेत देती है कि कई देश अमेरिका से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच अपने जोखिम को संतुलित करना चाहते हैं. 2024-25 वित्त वर्ष में भारत और यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय व्यापार 136.5 अरब डॉलर रहा. इससे 27 देशों वाला यह समूह भारत के सबसे बड़े व्यापार साझेदारों में शामिल हो गया.

क्या हैं रुकावटें?

हालांकि बातचीत के बावजूद कुछ संवेदनशील मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं. यूरोपीय संघ के एक स्रोत ने कहा कि वार्ताकार कई संवेदनशील मुद्दों पर अंतर पाटने की कोशिश कर रहे हैं, जिनमें भारत की यह झिझक भी शामिल है कि वह कार आयात पर शुल्क में तेज कटौती करे. कम आयात शुल्क से फोल्क्सवागन और रेनो जैसी कंपनियों को भारत में विस्तार में मदद मिल सकती है, क्योंकि इससे आयातित मॉडल अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर आ सकेंगे. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है, और वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करता रहा है, लेकिन ऊंचे शुल्क ने वृद्धि को कठिन बनाया है.

भारत के लिए एक अहम चिंता गैर-शुल्क बाधाएं भी हैं. इनमें कुछ वस्तुओं के आयात पर हाल में शुरू किए गए कार्बन शुल्क शामिल हैं, जैसे स्टील, एल्युमिनियम और सीमेंट. दिल्ली स्थित थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने रॉयटर्स से कहा कि यूरोपीय संघ में शुल्क-मुक्त पहुंच से भारतीय वस्त्र और आभूषण निर्यातकों को अमेरिका में होने वाले नुकसान की भरपाई में मदद मिल सकती है. उन्होंने कहा, "भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता वस्त्र, परिधान और चमड़े पर शुल्क घटाएगा, जिससे भारतीय निर्यातक बांग्लादेश और वियतनाम के साथ अधिक बराबरी से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे.”

यूरोपीय संघ हर साल करीब 125 अरब डॉलर के वस्त्र आयात करता है. इसमें भारत की हिस्सेदारी 5 से 6 फीसदी है, जबकि चीन की हिस्सेदारी लगभग 30 फीसदी बताई गई है.

एक वित्तीय संस्था जेफरीज के मुताबिक, भारत के ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र, औषधि और रसायन क्षेत्र संभावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के प्रमुख लाभार्थियों के रूप में उभर सकते हैं. रॉयटर्स ने यह भी कहा कि कुछ संवेदनशील कृषि उत्पादों को बातचीत से बाहर रखा गया है, जैसा कि पहले एक भारतीय व्यापार मंत्रालय अधिकारी ने बताया था.

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 24, 2026 05:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).