India Canada Row: पन्नू की हत्या की साजिश रचने वाला कोई भारतीय कर्मचारी नहीं; विदेश मंत्रालय का कनाडा को करारा जवाब

भारत और कनाडा के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच, विदेश मंत्रालय ने कनाडा के आरोपों पर दो टूक जवाब दिया है. कनाडा ने दावा किया था कि भारत का एक अधिकारी, जिसे CC1 के नाम से पहचाना गया था, खालिस्तानी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश में शामिल था.

Justin Trudeau | Facebook

भारत और कनाडा के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच, विदेश मंत्रालय ने कनाडा के आरोपों पर दो टूक जवाब दिया है. कनाडा ने दावा किया था कि भारत का एक अधिकारी, जिसे CC1 के नाम से पहचाना गया था, खालिस्तानी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश में शामिल था. लेकिन भारत ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है और साफ कहा कि जिस CC1 की बात कनाडा कर रहा है, वह भारत सरकार का कोई कर्मचारी नहीं है.

खुल गई कनाडा के झूठ की परतें! ट्रूडो ने माना भारत को नहीं दिए थे निज्जर हत्याकांड के सबूत.

अमेरिका ने भी की पुष्टि

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि न केवल भारत, बल्कि अमेरिका ने भी इसकी पुष्टि की है कि कनाडा द्वारा जिस व्यक्ति को रॉ (Research and Analysis Wing) का पूर्व अधिकारी बताया जा रहा है, वह भारत सरकार का कोई कर्मचारी नहीं है. इससे यह स्पष्ट हो गया है कि कनाडा के आरोपों में कोई ठोस आधार नहीं है.

लॉरेंस बिश्नोई गैंग और कनाडा के आरोप

कनाडा ने यह भी आरोप लगाया था कि लॉरेंस बिश्नोई के लोगों ने भारतीय अधिकारियों के इशारे पर कनाडा में हत्या की वारदातों को अंजाम दिया. इस पर विदेश मंत्रालय ने कनाडा सरकार से सबूत पेश करने की मांग की. मंत्रालय ने यह भी खुलासा किया कि भारत ने अब तक कनाडा को 26 बार अनुरोध भेजा है, लेकिन किसी भी अनुरोध का कनाडा ने जवाब नहीं दिया है.

विदेश मंत्रालय ने आगे बताया कि कई गंभीर अपराधियों, जिनमें गुरजिंदर सिंह, गुरप्रीत सिंह, गुरजीत सिंह, लखबीर सिंह लांडा और अर्शदीप सिंह शामिल हैं, के प्रत्यर्पण के लिए भी भारत ने कनाडा को अनुरोध किया था. लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. इन अपराधियों पर गंभीर आरोप हैं, और भारत ने उन्हें वापस भेजने की मांग की है ताकि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके.

विदेश मंत्रालय ने कनाडा की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए हैं और कहा कि अगर कनाडा के पास कोई सबूत है तो उसे भारत को सौंपना चाहिए. लेकिन कनाडा न केवल इन अनुरोधों पर चुप है, बल्कि अपराधियों के प्रत्यर्पण और प्रोविजनल गिरफ्तारी की मांगों पर भी गंभीर नहीं है.

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