Delhi Woman Quit Govt Job And Choose Mental Peace: दिल्ली की एक 29 साल की महिला, वाणी ने हाल ही में अपने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में प्रोबेशनरी ऑफिसर की नौकरी छोड़ दी. उनका यह फ़ैसला कई लोगों के लिए चौंकाने वाला था. बैंक की नौकरी उन्हें अच्छी सैलरी और वित्तीय स्थिरता दे रही थी, लेकिन वाणी ने महसूस किया कि यह उनकी मानसिक सेहत पर बुरा असर डाल रही थी.
वाणी ने सोशल मीडिया पर अपनी इस यात्रा के बारे में खुलकर बताया. उन्होंने लिखा, "कुछ हीरो टोपी नहीं पहनते, वे बस नौकरी छोड़ देते हैं." उनका कहना था कि उन्होंने बिना किसी 'प्लान बी' के यह कदम उठाया, क्योंकि उनके लिए वित्तीय सुरक्षा से ज़्यादा उनकी मानसिक शांति ज़रूरी थी.
यह फ़ैसला दिखाता है कि आज की युवा पीढ़ी सिर्फ़ पैसे या पद के पीछे नहीं भाग रही, बल्कि वे अपने जीवन की गुणवत्ता को भी महत्व दे रहे हैं. काम का दबाव, तनाव और लगातार असुरक्षा की भावना अब कई लोगों के लिए असहनीय हो चुकी है.
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एक साहसी कदम और कुछ सवाल
वाणी का यह क़दम एक बहस को जन्म देता है: क्या हम सच में उस काम को ही चुन रहे हैं जो हमें खुशी देता है, या सिर्फ़ उसी को जो हमें सुरक्षित महसूस कराता है? वाणी ने खुद माना कि नौकरी छोड़ने का फ़ैसला लेना एक विशेषाधिकार है, जो हर किसी के पास नहीं होता. यह बात सच है कि हमारे समाज में बहुत से लोग इतने सौभाग्यशाली नहीं होते कि वे अपने मनपसंद रास्ते पर चल सकें.
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वाणी ने अपनी नई यात्रा के लिए लोगों से समर्थन मांगा है और कहा है कि उनका एक ठोस 'प्लान बी' है. यह दिखाता है कि एक तरफ़ जहां उन्होंने अपने मन की सुनी, वहीं वे अपनी भविष्य की ज़िम्मेदारी भी समझती हैं.
इस कहानी से यह साफ़ होता है कि मानसिक स्वास्थ्य अब सिर्फ़ एक निजी मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारे करियर के फ़ैसलों को भी प्रभावित कर रहा है. शायद अब समय आ गया है कि हम सभी अपने काम और जीवन के बीच संतुलन बनाने के बारे में सोचें, और अपने मन की सुनें.













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