अगर आपको अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए और आप अपने शेयर (Stock) बेचकर निवेश तोड़ना नहीं चाहते, तो लोन अगेंस्ट शेयर’ (Loan Against Shares) एक समझदारी भरा विकल्प हो सकता है. इस सुविधा के तहत आप अपनी होल्डिंग (डीमैट अकाउंट में मौजूद शेयर) को गिरवी रखकर बैंक या एनबीएफसी (NBFC) से तुरंत लोन ले सकते हैं. आइए जानते हैं, कि शेयर पर लोन कैसे मिलता है, क्या है प्रक्रिया, और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
क्या है लोन अगेंस्ट शेयर?
यह एक प्रकार का सिक्योर्ड लोन (Secured Loan) होता है, जिसमें आप अपनी शेयर होल्डिंग (Share Holding) को गिरवी रखकर एक निश्चित रकम का लोन प्राप्त करते हैं. आपकी होल्डिंग आपके डिमैट खाते में रहती है, लेकिन उस पर लोनदाता का कंट्रोल होता है. जैसे ही आप लोन चुकाते हैं, होल्डिंग फिर से आपकी फुल कंट्रोल में आ जाती है.
कौन दे रहा है यह लोन?
भारत में कई बैंक और एनबीएफसी ‘लोन अगेंस्ट शेयर’ की सुविधा प्रदान कर रहे हैं. इसके अलावा अब यह प्रक्रिया डिजिटल रूप से भी काफी आसान हो गई है. ज़ेरोधा (Zerodha), ग्रो (Groww), अपस्टॉक्स (Upstox) जैसे कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी अपने पार्टनर एनबीएफसी के जरिए यह सेवा दे रहे हैं. इन प्लेटफॉर्म्स पर आप कुछ ही क्लिक में अपनी शेयर होल्डिंग को गिरवी रखकर तुरंत लोन की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं.
इससे न तो आपको शेयर बेचने की जरूरत पड़ती है, और न ही निवेश टूटता है, बल्कि आपको बाजार में अपनी स्थिति बनाए रखते हुए इमरजेंसी फंड की सुविधा मिल जाती है.
कितना लोन मिल सकता है?
आपको आपके शेयर की मौजूदा मार्केट वैल्यू (Market Value) के आधार पर लगभग 50% से 70% तक लोन मिल सकता है. इसका मतलब है, कि अगर आपके पास 10 लाख रुपये की वैल्यू के शेयर हैं, तो आप 5 लाख रुपये से 7 लाख रुपये तक का लोन प्राप्त कर सकते हैं. यह लोन राशि इस बात पर निर्भर करती है, कि आपने किस कंपनी के शेयर रखे हैं, वह कितने लिक्विड (यानी बाजार में कितनी आसानी से बेचे जा सकते हैं) हैं, और उनकी वर्तमान बाजार स्थिति क्या है.
आमतौर पर ब्लू-चिप (Blue-Chip) और बड़े मार्केट कैप (Large Market Cap) वाली कंपनियों के शेयर पर ज्यादा लोन मिलने की संभावना रहती है, क्योंकि वह ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं.
कौन से दस्तावेज़ जरूरी है?
शेयर पर लोन लेने के लिए आपको कुछ जरूरी दस्तावेज़ जमा करने होते हैं. इनमें सबसे पहले आता है, पैन कार्ड और आधार कार्ड, जो आपकी पहचान और पते का प्रमाण होते हैं. इसके साथ ही आपको बैंक स्टेटमेंट देना होता है, जिससे आपकी वित्तीय स्थिति का अंदाजा लगाया जा सके. इसके अलावा डीमेट अकाउंट की डिटेल्स भी जरूरी होती हैं, क्योंकि इन्हीं शेयरों को गिरवी रखकर लोन दिया जाता है. अंत में, आपको लोन फॉर्म भरना होता है, और केवाईसी (KYC) प्रक्रिया पूरी करनी होती है, ताकि बैंक या एनबीएफसी आपकी पात्रता की जांच कर सके. इन सभी दस्तावेज़ों के आधार पर ही लोन की मंजूरी दी जाती है.
लोन लेने की प्रक्रिया क्या है?
- बैंक या ब्रोकर पोर्टल पर लॉगिन करें, जहां आपका डीमैट खाता मौजूद है.
- अब ‘Loan Against Shares’ का विकल्प चुनें.
- अपनी शेयर होल्डिंग से वह शेयर सिलेक्ट करें, जिन्हें आप गिरवी रखना चाहते हैं/
- लोन की जरूरत अनुसार राशि दर्ज करें और जरूरी दस्तावेज (जैसे पैन, आधार, बैंक स्टेटमेंट आदि) अपलोड करें.
- अब बैंक या एनबीएफसी आपके शेयर की वैल्यू को असेस करेगा, और उसी आधार पर लोन लिमिट तय करेगा.
- अंत में लोन अप्रूवल मिलते ही राशि सीधे आपके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है.
जोखिम और शर्तें
शेयर पर लोन लेने की प्रक्रिया आसान जरूर है, लेकिन इसके कुछ जोखिम और शर्तें भी हैं, जिन्हें जानना जरूरी है. अगर आपके गिरवी रखे गए शेयर की कीमत बाजार में गिरती है, तो बैंक या एनबीएफसी मार्जिन कॉल (Margin Call) कर सकता है. इसका मतलब यह है, कि आपको अतिरिक्त शेयर गिरवी रखने होंगे या फिर नकद राशि जमा करनी होगी ताकि लोन का कवर बना रहे. इस तरह के लोन पर ब्याज दर आमतौर पर 9% से 13% के बीच होती है, जो कि लोनदाता और आपके प्रोफाइल पर निर्भर करती है.
अगर आपने तय समय पर लोन नहीं चुकाया या मार्जिन कॉल का जवाब नहीं दिया, तो बैंक को कानूनी अधिकार होता है, कि वह आपके शेयर बाजार में बेचकर अपना बकाया वसूल कर सके. इसलिए, समय पर भुगतान और शेयर के उतार-चढ़ाव पर नजर रखना बहुत जरूरी होता है.












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