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कितना मजबूत है नया डाटा सुरक्षा बिल

केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को डाटा सुरक्षा बिल के मसौदे को मंजूरी दे दी.

कितना मजबूत है नया डाटा सुरक्षा बिल
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को डाटा सुरक्षा बिल के मसौदे को मंजूरी दे दी. इसे संसद के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा. इसमें डाटा की चोरी के लिए जुर्माने का प्रावधान, बच्चों के डाटा के लिए माता-पिता की सहमति भी शामिल हैं.डिजिटल व्यक्तिगत सूचना संरक्षण (डीपीडीपी) विधेयक, 2022 के मसौदे को मानसून सत्र में पेश किया जाएगा. मीडिया में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि विधेयक का लक्ष्य "इंटरनेट कंपनियों, मोबाइल ऐप और निजी कंपनियों जैसी इकाइयों को 'निजता के अधिकार' के तहत नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी के कलेक्शन, स्टोरेज और प्रोसेसिंग के बारे में और ज्यादा जिम्मेदार और जवाबदेह बनाना है."

सरकार ने संसद में पेश करने के लिए अंतिम मसौदे में डीपीडीपी विधेयक के प्रमुख प्रावधानों को बरकरार रखा है. इसमें डाटा की चोरी के लिए जुर्माने का प्रावधान, बच्चों के डाटा के लिए माता-पिता की सहमति आदि शामिल हैं.

सरकारी आईटी सेवायें निजी कंपनियों के हवाले

कड़े नियम

सरकार ने डीपीडीपी विधेयक को अगस्त, 2022 में वापस ले लिया था. इसे सबसे पहले 2019 के अंत में पेश किया गया था. इसके नए संस्करण के मसौदे को सरकार ने नवंबर 2022 में पेश कर आम लोगों से राय मांगी थी. एक वरिष्ठ अ​धिकारी ने पत्रकारों को बताया कि विभिन्न हितधारकों और कानून विशेषज्ञों से 21,000 से ज्यादा सुझाव प्राप्त हुए.

विधेयक में प्रावधान है कि नियम तोड़ने वाली कंपनियों पर 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. इस कानून के लागू होने के बाद लोगों को अपने डाटा कलेक्शन, स्टोरेज और प्रोसेसिंग के बारे में जानकारी मांगने का अधिकार मिल जाएगा.

क्या कहता है बिल

इस विधेयक को लोगों के निजी डाटा को सुरक्षित रखने के मकसद से लाया जा रहा है. कानून बन जाने के बाद लोगों को निजी डाटा को साझा करने, प्रबंधन करने या हटाने का अधिकार होगा.

इस बिल में यह भी कहा गया है कि डाटा को सिर्फ तभी तक स्टोर किया जाना चाहिए जब तक उसका मकसद पूरा ना हो जाए. डाटा के प्रयोग को लेकर कंपनियों के लिए और कड़े नियम-कानून तैयार किए जाएंगे. साथ ही मसौदे में कहा गया है कि जो कंपनियां डाटा में सेंध रोकने में नाकाम रहेंगी उन पर सख्त कदम उठाए जाएंगे.

अगर डाटा को लेकर कोई विवाद पैदा होता है तो उस पर डाटा सुरक्षा बोर्ड फैसला सुनाएगा. यही नहीं लोगों को अदालत में जाकर मुआवजे का दावा करने का अधिकार भी होगा.

और ज्यादा सुरक्षित होगा डाटा

कानून को मंजूरी मिलने के बाद भारत में सभी ऑनलाइन और ऑफलाइन डाटा इसके कानूनी डोमेन के अंतर्गत आएंगे.

एक सूत्र ने मीडिया को बताया कि इस बिल के तहत व्यक्तिगत डाटा को केवल तभी प्रोसेस किया जा सकता है जब किसी व्यक्ति ने इसके लिए सहमति दी हो. मीडिया में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि कुछ अपवाद हैं जब सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था के आधार पर डाटा की जरूरत हो सकती है.

बिल के तहत डाटा इकट्ठा करने वाली संस्थाओं को इसे सुरक्षित करना होगा और बाद में इस्तेमाल के बाद डाटा को डिलीट भी करना होगा. डाटा सुरक्षा बिल पर तब काम शुरू हुआ था जब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि राइट टू प्राइवेसी एक मौलिक अधिकार है.

भारत में होगा ऐसा पहला कानून

आज दुनियाभर में डाटा सुरक्षा को लेकर काफी चिंताएं हैं. कई देशों में निजी डाटा सुरक्षा को लेकर सख्त कानून मौजूद हैं. लेकिन भारत में ऐसा कोई कानून नहीं था जो कि निजी डाटा को सुरक्षा देता हो. लेकिन कुछ अधिकार कार्यकर्ता बिल को लेकर सवाल भी खड़े कर रहे हैं उनका कहना है कि यह बिल सूचना के अधिकार कानून को नुकसान पहुंचाएगा. इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन के संस्थापक निदेशक अपार गुप्ता का कहना है कि कई ट्रांसपेरेंसी कार्यकर्ताओं और संसद के सदस्यों ने इस ओर ध्यान दिलाया था. अपार के मुताबिक यह कार्यकारी शक्ति के प्रयोग और निर्णय लेने में गोपनीयता बढ़ाने का एक और प्रावधान है.

इंटरनेट इन इंडिया रिपोर्ट 2022 के मुताबिक भारत में इस समय 75.9 करोड़ सक्रिय इंटरनेट यूजर हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक अधिकांश भारतीय आबादी (करीब 52 फीसदी) साल 2022 में कम से कम महीने में एक बार इंटरनेट का इस्तेमाल कर रही थी.

2025 में भारतीय इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर 90 करोड़ से अधिक हो जाने का अनुमान है. लगातार बढ़ती हुई डिजिटल आबादी किसी न किसी किसी रूप में डिजिटल सेवाओं से जुड़ी है.

इंटरनेट पर उनका डाटा किसी न किसी रूप में मौजूद है. यह सुनिश्चित करने वाला कोई नहीं है कि वह डाटा किस हद तक सुरक्षित है. अब इस कानून के बन जाने के बाद निजी डाटा सुरक्षित होना मुमिकन हो पाएगा.

2017 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा था कि भारतीय संविधान देश के हर नागरिक को निजता के मौलिक अधिकार की गारंटी देता है. नागरिकों की स्वतंत्रता, स्वायत्तता और निजी गरिमा का ख्याल रखते हुए कानून ऐसा होना चाहिए जो व्यक्तियों के अधिकारों की हिफाजत करे और ऐसे कार्यस्थल और सामाजिक स्पेस भी निर्मित करे जो निजता का सम्मान करते हों.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 06, 2023 02:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).