Ghaziabad Fake Embassy Scam: गाजियाबाद में आठ साल से एक नकली दूतावास चला रहे हर्षवर्धन जैन की गिरफ्तारी के बाद जो खुलासे हो रहे हैं, वे किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं हैं. यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच में पता चला है कि यह मामला सिर्फ एक नकली दूतावास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार करीब 300 करोड़ रुपये के एक बड़े घोटाले से जुड़े हो सकते हैं.
पिछले हफ्ते जब जैन को उसके आलीशान दो मंजिला घर से गिरफ्तार किया गया, तो कहानी खुलनी शुरू हुई. वह इस घर को एक देश का दूतावास बताता था. यूपी STF की जांच के मुताबिक, जैन नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी करता था और हवाला के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग में भी शामिल था. जब पुलिस ने उसके ठिकाने पर छापा मारा, तो वहां से नकली डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट वाली चार कारें, जाली दस्तावेज़ और महंगी घड़ियों का कलेक्शन बरामद हुआ.
एक नकली दूतावास की आड़ में खेल
गाजियाबाद में इस आलीशान इमारत के बाहर एक नेमप्लेट लगी थी, जिस पर लिखा था, "ग्रैंड डची ऑफ वेस्टआर्कटिका" और "एच.ई. एचवी जैन, मानद कौंसुल". बिल्डिंग पर भारत और वेस्टआर्कटिका के झंडे भी लगे थे. आपको बता दें कि वेस्टआर्कटिका अंटार्कटिका का एक हिस्सा है, जिसे किसी व्यक्ति ने अपना देश घोषित कर दिया है, पर दुनिया का कोई भी देश इसे मान्यता नहीं देता.
जांचकर्ताओं के अनुसार, जैन इस नकली दूतावास की आड़ में बड़े-बड़े लोगों से संपर्क बनाता था और फिर लोगों को विदेश में नौकरी का झांसा देकर फंसाता था. यह नकली दूतावास 2017 से चल रहा था. लोगों की आँखों में धूल झोंकने के लिए वह 'दूतावास' के बाहर भंडारे जैसे सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित कराता था.
विवादित 'गुरु' चंद्रास्वामी से कनेक्शन
छापेमारी के दौरान पुलिस को जैन की तस्वीरें विवादित 'गुरु' चंद्रास्वामी और सऊदी अरब के हथियार डीलर अदनान खशोगी के साथ मिलीं. चंद्रास्वामी 80 और 90 के दशक में एक प्रभावशाली तांत्रिक था, जिसे तीन प्रधानमंत्रियों का आध्यात्मिक सलाहकार माना जाता था. बाद में उस पर वित्तीय गड़बड़ियों और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की फंडिंग जैसे गंभीर आरोप लगे.
300 करोड़ का बड़ा घोटाला
UP STF को पता चला है कि चंद्रास्वामी ने ही जैन को खशोगी और एक दूसरे धोखेबाज़ अहसान अली सैयद से मिलवाया था. आरोप है कि सैयद ने जैन के साथ मिलकर 25 फर्जी (शेल) कंपनियां बनाईं, जिनका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाता था.
सैयद स्विट्जरलैंड में एक कंपनी चलाता था, जो दूसरी कंपनियों को लोन दिलाने का वादा करती थी और बदले में मोटी दलाली लेती थी. आरोप है कि इस कंपनी ने करीब 25 मिलियन पाउंड (लगभग 300 करोड़ रुपये) की दलाली इकट्ठा की और फिर वहां से भाग गई. पुलिस अब इस पूरे घोटाले में जैन की भूमिका की जांच कर रही है.
'वेस्टआर्कटिका' ने भी पल्ला झाड़ा
जैन की गिरफ्तारी के बाद, जिस 'देश' का वह खुद को प्रतिनिधि बताता था, उस वेस्टआर्कटिका ने भी उससे दूरी बना ली है. वेस्टआर्कटिका ने एक बयान जारी कर कहा, "मिस्टर जैन ने 2016 में हमें एक डोनेशन दिया था, जिसके बाद उन्हें भारत के लिए हमारा 'मानद कौंसुल' बनाया गया था. उन्हें कभी भी 'राजदूत' का पद नहीं दिया गया."
बयान में यह भी साफ किया गया कि जैन को डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट या पासपोर्ट बनाने का कोई अधिकार नहीं था. वेस्टआर्कटिका खुद ऐसी कोई चीज जारी नहीं करता. अपने घर को 'दूतावास' बताकर जैन ने हमारे नियमों का उल्लंघन किया है. संगठन ने जैन को अनिश्चित काल के लिए सस्पेंड कर दिया है और कहा है कि वे भारतीय अधिकारियों के साथ पूरी तरह सहयोग करेंगे.
आखिर ये 'वेस्टआर्कटिका' है क्या?
वेस्टआर्कटिका एक माइक्रोनेशन है, यानी एक ऐसा क्षेत्र जिसे किसी व्यक्ति या समूह ने देश घोषित कर दिया है, पर उसे कोई कानूनी मान्यता नहीं है. इसे 2001 में अमेरिकी नौसेना के एक अधिकारी ट्रैविस मैकहेनरी ने बनाया था. यह अंटार्कटिका में स्थित है और इसका क्षेत्रफल करीब 6,20,000 वर्ग मील है.
मज़ेदार बात यह है कि इसके कागज़ी नागरिक 2,300 से ज़्यादा हैं, लेकिन उनमें से कोई भी असल में वहां नहीं रहता है. यह मुख्य रूप से एक गैर-लाभकारी संस्था (non-profit) के रूप में काम करती है जो जलवायु परिवर्तन के बारे में जागरूकता फैलाती है. इसका अपना झंडा, अपनी करेंसी और ऐसी उपाधियां हैं, जिन्हें कोई भी सरकार मान्यता नहीं देती है.













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