यूपी के कालीन से लेकर बनारसी सिल्क तक, ट्रंप के टैरिफ ने बढ़ाई व्यापारियों की मुश्किलें; जानें किन-किन उद्योगों पर पड़ा है असर?
अमेरिका की ट्रंप सरकार ने अगस्त-सितंबर 2025 में आयातित (Imported) भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ लगा दिया है. इस फैसले का सीधा असर उत्तर प्रदेश के कई बड़े उद्योगों पर भी दिख रहा है.
Trump Tariff UP Impact: अमेरिका की ट्रंप सरकार ने अगस्त-सितंबर 2025 में आयातित (Imported) भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ (American Tariff) लगा दिया है. इस फैसले का सीधा असर उत्तर प्रदेश के कई बड़े उद्योगों पर भी दिख रहा है. खासकर कालीन, रेशम, पीतल के बर्तन और कपड़ा निर्यात करने वाले जिलों में काम लगभग ठप हो गया है. भदोही और मिर्जापुर के कालीन कारोबार (Carpet Business) को सबसे बड़ा झटका लगा है. यहां से अमेरिका जाने वाले 85% तक ऑर्डर रुक गए हैं. लगभग 16 हजार करोड़ रुपये के कुल निर्यात में से 9,600 करोड़ रुपये के सौदे अटके हुए हैं. यही वजह है कि इस क्षेत्र में काम करने वाले लाखों बुनकरों और कारीगरों की आजीविका खतरे में है.
ये भी पढें: ट्रंप का भारत पर हमला, टैरिफ की छूट के ऑफर पर कहा- अब बहुत देर हो गई
नोएडा, मुरादाबाद, कानपुर में टैरिफ का मार
नोएडा, मुरादाबाद, कानपुर और वाराणसी जैसे निर्यात केंद्र भी टैरिफ की मार से उबर नहीं पा रहे हैं. नोएडा के कपड़ा उद्योग (Textile Industry) को नए ऑर्डर मिलना बंद हो गए हैं. जो उत्पाद पहले 12% छूट पर भी भेजे जाते थे, वे अब अमेरिकी बाजार में बिल्कुल नहीं बिक रहे हैं. हजारों कामगारों की नौकरियां खतरे में हैं. कानपुर और वाराणसी से चमड़े की वस्तुओं और बनारसी साड़ियों (Banarasi Sarees) जैसे ओडीओपी उत्पादों का निर्यात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
आगरा के रेशम उद्योग को भी बड़ा झटका
आगरा के बनारसी रेशम (Banarasi Silk) और हस्तशिल्प उद्योग (Handicraft Industry) को भी बड़ा झटका लगा है. त्योहारी सीजन में, जब यहां से सबसे ज्यादा मांग होती है, ऑर्डर रद्द होने से कारोबारियों का भरोसा डगमगा गया है. इसी तरह, मुरादाबाद (Moradabad) के पीतल के बर्तन और धातु कला के सामान अब अमेरिकी बाजार (American Market) में टिक नहीं पा रहे हैं. यहां भी निर्यातक उत्पादन कम करने को मजबूर हैं.
,सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उठाए सवाल
रिपोर्ट्स के अनुसार, यूपी का लगभग 21% निर्यात अमेरिका पर निर्भर है. इसमें कालीन, कपड़ा, चमड़ा और हस्तशिल्प प्रमुख हैं. इन सभी क्षेत्रों में कुल 38 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है. यही वजह है कि व्यापारिक संगठनों के साथ-साथ राजनीतिक दल भी सरकार से कदम उठाने की अपील कर रहे हैं.
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने तो यहां तक कह दिया कि लाखों नौकरियां खतरे में हैं और राज्य सरकार को तुरंत सुरक्षा कवच बनाना चाहिए.
व्यापारियों का विरोध प्रदर्शन शुरू
हालात ऐसे हैं कि कई जिलों में व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं. निर्यातक जगह-जगह बैनर-पोस्टर लगाकर अपनी समस्याएं जाहिर कर रहे हैं. उनकी मांग है कि केंद्र सरकार टैरिफ का कुछ हिस्सा खुद वहन करे, ब्याज मुक्त ऋण मुहैया कराए और निर्यात सब्सिडी दे ताकि मजदूरों की नौकरियां बच सकें.
कई इकाइयों ने मजबूरी में अपने कर्मचारियों की संख्या 60 से 70 प्रतिशत तक कम कर दी है. व्यापारी अब सरकार से राहत पैकेज और सब्सिडी की मांग कर रहे हैं.