Sheikh Hasina Sentenced To Death: बांग्लादेश (Bangladesh) की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने सोमवार को देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (Sheikh Hasina) को मौत की सज़ा (Death Sentence) सुनाई. यह फैसला उस मामले से जुड़ा है जिसमें उन पर पिछले साल छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन को कुचलने का आदेश देने का आरोप था. महीनों चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि हसीना ने सुरक्षा बलों को घातक कार्रवाई की अनुमति दी, जिसके चलते कई लोगों की जान गई.यह फैसला बांग्लादेश में किसी भी पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ आए सबसे बड़े कानूनी निर्णयों में गिना जा रहा है.
यह निर्णय ऐसे समय आया है जब देश में फरवरी की शुरुआत में आम चुनाव होने की उम्मीद है.हसीना की पार्टी 'अवामी लीग' पहले ही चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित की जा चुकी है, और आशंका जताई जा रही है कि इस फैसले के बाद देश में तनाव और बढ़ सकता है.ये भी पढ़े:शेख हसीना का बड़ा आरोप! कहा- यूनुस नहीं चाहते लोकतंत्र मजबूत हो, भारत से दूरी बनाना खतरनाक कदम
फरार रहने के कारण अनुपस्थिति में सुनवाई
ढाका (Dhaka) स्थित इस ट्रिब्यूनल ने बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यह फैसला सुनाया.हसीना पिछले साल अगस्त में भारत चली गई थीं और तबसे देश वापस नहीं लौटीं. उनकी अनुपस्थिति में ही अदालत ने कार्यवाही पूरी की.उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध के लिए उम्रकैद और कई लोगों की हत्या के लिए फांसीकी सज़ा दी गई.फैसला सुनते ही अदालत कक्ष में मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं.
सुप्रीम कोर्ट में अपील संभव
हसीना के बेटे और सलाहकार सजीब वाजेद (Sajeeb Wajed) ने रॉयटर्स से कहा कि वे अपील तभी करेंगे जब देश में लोकतांत्रिक सरकार बने और अवामी लीग को भी राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने दिया जाए.अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि 2024 के जुलाई–अगस्त में हुए छात्र आंदोलन को दबाने के लिए हसीना ने सीधे तौर पर गोलीबारी और कठोर बल प्रयोग का आदेश दिया था.
क्या कहा यूएन की रिपोर्ट ने
यूएन (UN) की रिपोर्ट के अनुसार, 15 जुलाई से 5 अगस्त 2024 के बीच 1,400 तक लोगों की मौत हुई,हजारों घायल हुए,जिनमें ज्यादातर सुरक्षाबलों की गोलीबारी का शिकार बने. यूएन ने इसे 1971 के बांग्लादेश स्वतंत्रता युद्ध के बाद सबसे भीषण हिंसा बताया.
सरकारी वकील की दलीलें और हसीना की प्रतिक्रिया
हसीना की ओर से राज्य द्वारा नियुक्त वकील ने अदालत में कहा कि आरोप निराधार हैं और उनका बरी किया जाना चाहिए.वहीं, फैसला आने से पहले हसीना ने इन आरोपों को 'पहले से तय किए गए' और 'अन्यायपूर्ण' बताया था. उनका कहना था कि उन्हें सुनवाई की पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई,उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा मौका नहीं मिला,और ट्रिब्यूनल 'राजनीतिक विरोधियों' द्वारा संचालित है.
राजनीतिक अस्थिरता जारी
बीते कुछ दिनों में फैसले से पहले देशभर में करीब 30 कच्चे बम धमाके और 26 गाड़ियां जलाए जाने की घटनाएं हुईं.हालांकि किसी की मौत नहीं हुई.ढाका और अन्य शहरों में सोमवार को अर्धसैनिक बल,अतिरिक्त पुलिस और रैपिड ऐक्शन बटालियन को तैनात किया गया.सरकार ने कहा है कि किसी भी गड़बड़ी से निपटने के लिए सभी एजेंसियां तैयार हैं.
हसीना का निर्वासन और चुनावों पर असर
78 वर्षीय शेख हसीना अगस्त 2024 में सत्ता से हटाए जाने के बाद भारत आ गई थीं और तबसे यहीं रह रही हैं.देश की अंतरिम सरकार,जिसका नेतृत्व नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस (Mohammad Yunus) कर रहे हैं.अब भी राजनीतिक स्थिरता लाने की कोशिश कर रही है,हसीना ने चेतावनी दी थी कि अवामी लीग के लाखों समर्थक आगामी चुनावों का बहिष्कार कर सकते हैं.













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