CG Police Expense Scam: छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग इन दिनों एक नए विवाद में घिर गया है. राज्य में पिछले ढाई सालों में पुलिस ने जिस पैमाने पर किराए की गाड़ियां चलाई हैं, वो चौंकाने वाला है. न्यूज वेबसाइट thesootr.com की रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ पांच जिलों में 56 हजार से ज्यादा गाड़ियां किराए पर ली गईं और इसके एवज में 135 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए. इस लिस्ट में रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, बिलासपुर और कवर्धा शामिल हैं. सबसे ज्यादा खर्च राजधानी रायपुर में हुआ, जहां 75 करोड़ 82 लाख रुपए किराए पर दे दिए गए.
ये वही जिले हैं जहां गाड़ियों के किराए को लेकर कोई तय मापदंड नहीं रखा गया. साहब को जब जरूरत पड़ी, उन्होंने गाड़ी उठा ली, और भुगतान सरकारी खजाने से कर दिया गया.
क्या छत्तीसगढ़ पुलिस के पास सरकारी गाड़ियां नहीं हैं?
क्या गाड़ियां वाकई इस्तेमाल हो रही थीं?
दुर्ग में 10,224, राजनांदगांव में 9,089, बिलासपुर में 8,054 और कवर्धा में 5,522 गाड़ियां दो साल में किराए पर ली गईं. लेकिन बात सिर्फ संख्या की नहीं है, बड़ा सवाल ये है कि क्या ये गाड़ियां वाकई इस्तेमाल हो रही थीं या सिर्फ फाइलों में दौड़ रही थीं?
चर्चा इस बात की भी है कि इनमें से कई गाड़ियां ऐसी हैं जो जमीन पर कभी नहीं उतरीं. सिर्फ कागजों में उनका किराया जारी होता रहा. कुछ गाड़ियां खुद अधिकारियों के परिवारवालों या उनके करीबी टैक्सी चालकों की हैं, जिन्हें किराए पर दिखाकर अच्छा खासा मुनाफा कमाया गया.
सत्ता बदलने के बाद भी जारी रहा सिलसिला
पीएचक्यू के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि कई बार गाड़ियों का बिल फर्जी तरीके से तैयार किया जाता है. ऐसी गाड़ियां भी बिल में शामिल कर दी जाती हैं जो मौके पर मौजूद ही नहीं होतीं. कुल मिलाकर यह किराया सिस्टम, कमाई का जरिया बन गया है.
खास बात ये है कि ये सारा सिलसिला सिर्फ पिछली सरकार तक ही सीमित नहीं है. सत्ता बदलने के बाद भी यह चलन जारी है.
जांच में होगा बड़ा खुलासा!
अब सवाल ये उठता है कि जब सरकार खुद करोड़ों की गाड़ियां खरीद रही है, तो किराए पर इतनी भारी संख्या में वाहन क्यों लिए जा रहे हैं? 150 करोड़ के सरकारी वाहन होने के बावजूद 250 करोड़ किराए पर उड़ाना समझ से परे है.
जाहिर है, किराए की गाड़ियों का ये खेल एक बड़ी जांच की मांग करता है. अगर जांच सही दिशा में हुई, तो कई नामों और चेहरों का पर्दाफाश हो सकता है.












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