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HC On Alimony: कमाने वाली पत्नी को नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता, हाईकोर्ट बोला- यह कोई अमीर बनने का जरिया नहीं है

दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ किया है कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर जीवनसाथी (पति या पत्नी) तलाक के बाद गुजारा भत्ते का हकदार नहीं है. कोर्ट ने कहा कि गुजारा भत्ता जरूरतमंदों की मदद के लिए है, न कि किसी की कमाई बराबर करने का साधन. यह फैसला एक कमाऊ पत्नी की याचिका को खारिज करते हुए दिया गया, जिसने तलाक के लिए पति से ₹50 लाख मांगे थे.

HC On Alimony: कमाने वाली पत्नी को नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता, हाईकोर्ट बोला- यह कोई अमीर बनने का जरिया नहीं है
(Photo : X)

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि अगर पति या पत्नी में से कोई एक आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है और अच्छी कमाई कर रहा है, तो उसे तलाक के बाद दूसरे पार्टनर से गुजारा भत्ता (Alimony) नहीं मिल सकता.

कोर्ट ने कहा कि गुजारा भत्ता इसलिए दिया जाता है ताकि किसी ज़रूरतमंद की मदद हो सके, न कि किसी को अमीर बनाने या दोनों की कमाई बराबर करने के लिए. यह एक तरह का सामाजिक न्याय है. जो भी व्यक्ति गुजारा भत्ता मांग रहा है, उसे यह साबित करना होगा कि उसे सच में पैसों की ज़रूरत है.

क्या था पूरा मामला?

यह फैसला एक ऐसे कपल के केस में आया, जिनकी शादी सिर्फ 14 महीने ही चली. पति एक वकील हैं और पत्नी भारतीय रेलवे में एक बड़ी (ग्रुप ए) अफसर हैं. दोनों की यह दूसरी शादी थी.

पति ने पत्नी पर मानसिक और शारीरिक क्रूरता का आरोप लगाते हुए तलाक की अर्जी दी थी. पति का कहना था कि पत्नी उनके और उनकी माँ के साथ गाली-गलौज करती थी, अपमानजनक मैसेज भेजती थी और समाज में उन्हें नीचा दिखाती थी.

कोर्ट ने क्या पाया?

फैमिली कोर्ट ने पहले ही पति के हक में तलाक का फैसला सुना दिया था. हाईकोर्ट ने भी उस फैसले को सही माना. कोर्ट ने पाया कि:

  1. पत्नी का व्यवहार क्रूरता थी: पत्नी ने पति को अपमानित करने वाले टेक्स्ट मैसेज भेजे थे. इन मैसेज में उसने पति के जन्म को लेकर भद्दी बातें कहीं और उसकी माँ को भी गालियां दीं. कोर्ट ने माना कि यह गंभीर मानसिक क्रूरता है.
  2. पैसे की मांग: पत्नी ने तलाक के लिए राज़ी होने के बदले पति से 50 लाख रुपये की मांग की थी. कोर्ट ने कहा कि इससे पता चलता है कि पत्नी का इरादा रिश्ता बचाने का नहीं, बल्कि पैसा हासिल करना था.
  3. पत्नी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है: कोर्ट ने देखा कि पत्नी रेलवे में एक बड़ी अफसर है और उसकी कमाई बहुत अच्छी है. वह आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर है और उसे गुजारा भत्ते की कोई ज़रूरत नहीं है.

गुजारा भत्ता क्यों नहीं दिया गया?

हाईकोर्ट ने गुजारा भत्ता देने से इनकार करते हुए कुछ खास बातों पर ज़ोर दिया:

  • शादी बहुत कम समय (सिर्फ 14 महीने) चली.
  • दोनों का कोई बच्चा नहीं है.
  • पत्नी की कमाई बहुत अच्छी और स्थिर है.
  • पत्नी यह साबित नहीं कर पाई कि उसे गुज़ारे के लिए पैसों की ज़रूरत है.

इस फैसले से यह साफ़ हो गया है कि कानून का मकसद किसी ऐसे व्यक्ति की मदद करना है जो तलाक के बाद आर्थिक रूप से कमज़ोर हो जाए, न कि किसी ऐसे व्यक्ति को और पैसा दिलाना जो पहले से ही आत्मनिर्भर हो.

 

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 18, 2025 12:31 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).