वित्त वर्ष 2026-27 में रक्षा मंत्रालय मांगेगा 20 फीसदी ज्यादा बजट, जानें क्यों बढ़ रही है जरूरत?
भारत की रक्षा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं, और बदलते भू-राजनीतिक माहौल को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने संकेत दिया है कि वह वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 20% बजट बढ़ोतरी की मांग करेगा.
भारत की रक्षा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं, और बदलते भू-राजनीतिक माहौल को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने संकेत दिया है कि वह वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 20% बजट बढ़ोतरी की मांग करेगा. यह कदम सेना की आधुनिक जरूरतों को पूरा करने और तेजी से बदलती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने एक कार्यक्रम में कहा कि भारत एक मुश्किल पड़ोस में स्थित है, जहां सुरक्षा खतरे लगातार बढ़ रहे हैं. सामान्य तौर पर रक्षा बजट में 10% बढ़ोतरी मिलती है, लेकिन इस बार सरकार 20% तक की वृद्धि चाहती है, ताकि क्षमता विकास की योजनाएं पूरी रफ्तार से आगे बढ़ सकें. उन्होंने साफ कहा कि अगले कुछ वर्षों तक यह बढ़ोतरी जरूरी रहेगी.
आपातकालीन खरीद में देरी पर सख्त रुख
रक्षा सचिव ने उद्योग जगत को चेतावनी दी कि अगर डिलीवरी समय पर नहीं हुई, खासकर आपात खरीद में, तो सरकार कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर सकती है. आपातकालीन खरीद में एक साल के भीतर सभी डिलीवरी पूरी करना अनिवार्य होता है, और सरकार इस नियम को लेकर पहले से ज्यादा सख्त हो गई है.
रक्षा बजट में पहले से बढ़ोतरी पर जरूरतें और बड़ी
2025-26 के लिए सरकार ने 6.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक रक्षा बजट रखा है, जिसमें से 1.8 लाख रुपये करोड़ सेना के आधुनिकीकरण पर खर्च होने हैं. यह पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 9% अधिक है, लेकिन मंत्रालय का कहना है कि बढ़ते खतरे और बढ़ती जरूरतें इससे कहीं ज्यादा संसाधनों की मांग करती हैं.
राजेश कुमार सिंह का कहना है कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में इतना सक्षम हो चुका है कि वह अतिरिक्त फंड का प्रभावी इस्तेमाल कर सकता है.
ऑपरेशन सिंदूर और बदलता सुरक्षा परिदृश्य
बजट बढ़ोतरी की मांग ऐसे समय पर आ रही है जब ऑपरेशन सिंदूर और अन्य सुरक्षा गतिविधियों के बाद भारत अपनी सामरिक तैयारी को और मजबूत करने में जुटा है. सिंह ने यह भी कहा कि भारत दुनिया की 17% आबादी की सुरक्षा करता है, लेकिन वैश्विक रक्षा खर्च का केवल 3% हिस्सा ही भारत का है—यह एक सोचने वाली बात है.
‘मेक इन इंडिया’ पर जोर
भारत अब विदेशी कंपनियों से सीधे रक्षा खरीद के बजाय को-प्रोडक्शन पर जोर दे रहा है. सरकार चाहती है कि रक्षा बजट का अधिकतर हिस्सा देश के भीतर खर्च हो. राजेश कुमार सिंह ने साफ कहा कि विदेशी कंपनियों को भारत में साझेदारी करनी होगी, क्योंकि “ग्लोबल खरीद अब अपवाद होगी, नियम नहीं.”
रूस और अमेरिका दोनों के साथ रणनीतिक संतुलन
उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस के साथ भारत का रक्षा सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है और आगे भी जारी रहेगा. साथ ही, अमेरिका से भी बीते 10 वर्षों में भारत ने 30 अरब डॉलर की सैन्य खरीदारी की है. भारत अपनी पुरानी साझेदारियों को बनाए रखते हुए रणनीतिक स्वायत्तता की नीति पर चलता रहेगा.
जल्द आएगी नई ‘पॉजिटिव इंडिजेनाइजेशन लिस्ट’
देशनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए रक्षा मंत्रालय जल्द ही अपनी अगली पॉजिटिव इंडिजेनाइजेशन लिस्ट जारी करेगा. अब तक 509 बड़े रक्षा उपकरणों पर आयात प्रतिबंध लगाया जा चुका है, जिनमें से लगभग 50% का सफलतापूर्वक देश में निर्माण शुरू हो चुका है.