Deepfake Certificate: 'MMS वीडियो' विवाद के बाद पायल गेमिंग को महाराष्ट्र साइबर सेल से मिला डीपफेक सर्टिफिकेट, जानें इस सर्टिफिकेट और मामले से जुड़ी पूरी डिटेल

लोकप्रिय गेमर पायल गेमिंग ने हाल ही में 'MMS' वीडियो विवाद के बाद महाराष्ट्र साइबर सेल से 'डीपफेक सर्टिफिकेट' प्राप्त किया है. जानिए क्या है यह सर्टिफिकेट और कैसे यह ऑनलाइन धोखाधड़ी के खिलाफ एक बड़ा हथियार है

 Deepfake Certificate: भारत की मशहूर गेमिंग क्रिएटर पायल धारे, जिन्हें दुनिया 'पायल गेमिंग' के नाम से जानती है, पिछले कुछ समय से एक कथित 'MMS लीक' विवाद को लेकर चर्चा में थीं. सोशल मीडिया पर उनके नाम से एक आपत्तिजनक वीडियो वायरल किया जा रहा था. इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पायल ने महाराष्ट्र साइबर सेल में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई. जांच के बाद साइबर सेल ने उन्हें एक 'डीपफेक सर्टिफिकेट' सौंपा है, जो पुष्टि करता है कि वायरल वीडियो पूरी तरह फर्जी था.

विवाद की शुरुआत और कानूनी कार्रवाई

यह विवाद दिसंबर 2025 के मध्य में शुरू हुआ, जब टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर एक वीडियो तेजी से वायरल होने लगा. दावा किया गया कि वीडियो में दिख रही महिला पायल गेमिंग है. पायल ने तुरंत इसे खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह वीडियो या तो एआई (AI) द्वारा बनाया गया है या किसी अन्य महिला का है जिसे उनके नाम से जोड़ा जा रहा है. यह भी पढ़े:  Deepfake Video Scam India: विराट कोहली और निर्मला सीतारमण के फेक वीडियो वायरल, बेंगलुरु साइबर पुलिस ने दर्ज किया केस

दरअसल पायल ने महाराष्ट्र साइबर पुलिस के मुख्यालय में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं (3(5), 79, और 356(2)), आईटी एक्ट की धारा 67 और महिलाओं के अश्लील प्रतिनिधित्व (निषेध) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया.

क्या होता है ‘डीपफेक सर्टिफिकेट’?

डीपफेक सर्टिफिकेट एक आधिकारिक फोरेंसिक दस्तावेज है जो साइबर अपराध जांच इकाई (इस मामले में महाराष्ट्र साइबर विभाग) द्वारा जारी किया जाता है. यह सर्टिफिकेट संदिग्ध मीडिया (वीडियो, फोटो या ऑडियो) के वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद दिया जाता है.

यह इस बात का औपचारिक प्रमाण है कि संबंधित सामग्री के साथ छेड़छाड़ की गई है और उसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीकों का उपयोग करके बनाया गया है. यह पीड़ितों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से वह कंटेंट हटवाने और कानूनी रूप से अपनी बेगुनाही साबित करने में मदद करता है.

 जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

महाराष्ट्र साइबर सेल ने उन्नत तकनीकी उपकरणों का उपयोग करके वीडियो का फोरेंसिक विश्लेषण किया. जांच में पाया गया कि वायरल वीडियो एक 'एआई-जनरेटेड डीपफेक' था. 19 दिसंबर को पायल ने इस सर्टिफिकेट की तस्वीर साझा की.

सर्च और विश्लेषण के बाद पुलिस ने जनवरी 2026 में इस मामले के मुख्य आरोपी अभिषेक जाधव (सोशल मीडिया हैंडल @Beegha_) को गिरफ्तार कर लिया है. उस पर फर्जी वीडियो बनाकर पायल की छवि खराब करने का आरोप है.

सोशल मीडिया पर पायल का संदेश

सर्टिफिकेट मिलने के बाद पायल गेमिंग ने लिखा, "महाराष्ट्र साइबर ने आधिकारिक तौर पर यह प्रमाणित कर दिया है कि वायरल वीडियो में मैं नहीं हूं. फोरेंसिक जांच ने पुष्टि की है कि मेरी तस्वीरों को दुर्भावनापूर्ण तरीके से मॉर्फ करके यह वीडियो बनाया गया था ताकि मेरी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया जा सके. अब यह मामला आधिकारिक तौर पर स्पष्ट हो चुका है."

साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सर्टिफिकेट भविष्य में डीपफेक के बढ़ते खतरों से निपटने और इंटरनेट पर फर्जी खबरों को रोकने में मील का पत्थर साबित होंगे.

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