Cyber Alert! दूसरा जामताड़ा बनाता जा रहा नोएडा, फर्जी कॉल सेंटर के जरिए हो रही ठगी
आए दिन कोई न कोई फर्जी कॉल सेंटर यहां पर पकड़ा जाता है जो देश ही नहीं बल्कि विदेश में लोगों के साथ लगातार ठगी को अंजाम दे रहा है और ज्यादा पैसे कमाने के लालच में यह साइबर ठग देश की सुरक्षा को भी कई बार खतरे में डाल देते हैं.
नोएडा, 26 मार्च: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) का सबसे हाईटेक शहर और दिल्ली (Delhi) एनसीआर का मुख्य भाग नोएडा (Noida) अब फर्जी कॉल सेंटर का सबसे बड़ा गढ़ बनता जा रहा है. आए दिन कोई न कोई फर्जी कॉल सेंटर यहां पर पकड़ा जाता है जो देश ही नहीं बल्कि विदेश में लोगों के साथ लगातार ठगी को अंजाम दे रहा है और ज्यादा पैसे कमाने के लालच में यह साइबर ठग देश की सुरक्षा को भी कई बार खतरे में डाल देते हैं. यह भी पढ़ें: UP- नेपाल सीमा पर बाघों का आतंक, पांच दिनों में 3 महिलाओं की मौत
यहां पर पकड़े जा रहे फर्जी कॉल सेंटर के मास्टरमाइंड बहुत कम सैलरी पर लड़के लड़कियों को ट्रेनिंग देकर अपने यहां काम पर रखते हैं और फिर उनसे ठगी का काम करवा कर मोटा मुनाफा कमाते हैं. अक्सर जब इन फर्जी कॉल सेंटर्स का भंडाफोड़ होता है तो वहां पर पुलिस को नई उम्र के लड़के लड़कियों को कॉल करते हुए पाए जाते हैं जबकि कई मामलों में मास्टरमाइंड फरार हो जाता है.
नोएडा में पुलिस हर हफ्ते ही कोई न कोई फर्जी कॉल सेंटर का पदार्फाश करती है. इसमें देश से लेकर विदेश में भी ठगी की जा रही है. इससे नोएडा का नाम तो खराब हो ही रहा है और साथ में साइबर जालसाज देश की सुरक्षा को भी कई बार में खतरे में डाल रहे हैं. नौकरी से लेकर इंश्योरेंस और साइबर सुरक्षा के नाम पर कॉल सेंटर और फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज खोलकर नोएडा से जालसाजी की जा रही है.
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में पिछले पांच सालों में छोटे-बड़े 250 से अधिक फर्जी कॉल सेंटर या टेलीफोन एक्सचेंज का खुलासा हुआ है। इनमें नौकरी, बीमा, साइबर मदद से लेकर हर तरीके के नाम पर ठगी के मामले सामने आए हैं. कई मामलों में विदेशी आकाओं के नाम सामने आए हैं लेकिन अब तक पुलिस विदेशी आका को छोड़िए, अधिकतर सरगना तक को गिरफ्तार नहीं कर पाई. इन मामलों में केवल स्थानीय स्तर पर ही काम करने वाले या देखरेख करने वाले एजेंट ही गिरफ्तार हुए हैं.
फर्जी कॉल सेंटर के जरिए ठगी करने वाले लोग सबसे ज्यादा उन लोगों को अपना निशाना बनाते हैं जो बेरोजगार होते हैं. बेरोजगार लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर बहुत आसानी से यह लोग अपना शिकार बना लेते हैं. इसके साथ-साथ लोगों को सस्ते दरों पर लोन दिलाने के नाम पर, उनकी बीमा पॉलिसी को रिन्यू कराने के नाम के साथ साथ कई और प्रलोभन देकर उन्हें ठगा जाता है. इसके लिए कई कैटेगरी बनाई गई है जिनमें नौकरी दिलाने के नाम पर, सस्ते दर पर लोन के नाम पर झांसा, बीमा कराने और लैप्स बीमा के नाम पर रकम दिलाने का झांसा, कंप्यूटर में पॉपअप वायरस को ठीक कराने के नाम पर ठगी, सड़क हादसे में नाम आने के नाम पर ठगी, चाइल्ड पोर्नोग्राफी के नाम पर विदेशी नागरिकों से जालसाजी, फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज खोलकर विदेश से कम दर पर बातचीत, लकी ड्रॉ में कार मिलने, गिफ्ट के नाम पर ठगी, कौन बनेगा करोड़पति के लकी ड्रॉ के नाम पर उगाही आदि के नाम पर लोगो से ठगी की जाती है.
देश के जाने-माने साइबर एक्सपर्ट अमित दुबे ने आईएएनएस से खास बातचीत करते हुए बताया कि जितने भी बॉर्डर वाले इलाके हैं वह साइबर क्राइम करने वालों के लिए सबसे उपयुक्त और आसान अड्डा होते हैं. चाहे वह जामताड़ा हो, मेवात, नूह, अलवर, मथुरा या फिर नोएडा. इसका फायदा साइबर अपराधियों को यह मिलता है कि वह रहते कहीं और हैं काम कहीं और करते हैं और अपराध की लोकेशन कहीं और होती है. पकड़े जाने के डर से भी वह तुरंत दूसरे राज्य में दाखिल हो जाते हैं ताकि पुलिस का डर बहुत ज्यादा न रहे. इनकी आइडेंटिटी हमेशा नकली होती है और अगर इन्हें पकड़ना हो तो इनकी लोकेशन के हिसाब से ही पकड़ा जा सकता है. इसीलिए वह ऐसे इलाकों को इस्तेमाल करते हैं जहां से उन्हें अपनी लोकेशन बदलने में काफी आसानी हो. यह भी पढ़ें: UP- नेपाल सीमा पर बाघों का आतंक, पांच दिनों में 3 महिलाओं की मौत
उन्होंने बताया कि नॉएडा एक आसान जगह है. जहां पर आसानी से सब सुविधाएं उपलब्ध हो जाती हैं और यहां पर बहुत कम दिनों के नोटिस पर ही आसानी से आप कॉल सेंटर को सेट अप कर सकते हैं. जितने भी फर्जी कॉल सेंटर पकड़े जा रहे हैं उनमें ज्यादा से ज्यादा विदेशियों के साथ ही ठगी करते हैं ताकि वह रहें यहां पर और ठगी दूसरे देश में हो जिससे उनका पकड़ा जाना मुश्किल हो जाए. विदेशों में बैठे लोगों को यह लोग आसानी से अपना टारगेट बना लेते हैं. इनकम टैक्स का नोटिस, पासपोर्ट वेरीफिकेशन समेत कई मामलों में ये लोगो को फंसा लेते हैं. विदेशी नागरिकों से ये यह पांच से 10 हजार डॉलर तक ठग लेते हैं.जो इंडियन करेंसी में 3 से 8 लाख तक के आसपास पहुंच जाता है जो इनके लिए एक अच्छी रकम होती है.
साइबर एक्सपर्ट अमित दुबे के मुताबिक जीरो ट्रस्ट मॉडल को अपनाना ही बचाव का सबसे बड़ा साधन है. उन्होंने बताया कि जब भी आपको कोई फोन आए कि मैं पुलिस, साइबर सेल, इनकम टैक्स या किसी और डिपार्टमेंट से बात कर रहा हूं तो तुरंत विश्वास ना करें पहले उसकी जांच पड़ताल करें और फिर उससे बात करें. और सबसे बड़ी बात है कि अगर पैसों की डिमांड आए तो आप समझ जाएं कि यह आपके साथ कोई ना कोई फ्रॉड होने वाला है क्योंकि कोई भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी आपसे फोन पर पैसे की डिमांड नहीं कर सकता.
(The above story first appeared on LatestLY on Mar 26, 2023 12:47 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

