दुनिया के शीर्ष वन्यजीव विशेषज्ञों ने भारत से अपील की है कि वह दुनिया की सबसे दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियों के सभी आयातों को तत्काल निलंबित करे. यह अपील गुजरात में बने विशाल वनतारा जू को लेकर उठे विवाद के बीच आई है.दुनिया भर के प्रमुख वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञों ने भारत सरकार से कहा है कि वह संकटग्रस्त प्रजातियों के सभी आयातों को रोक दे. यह सिफारिश कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन एन्डेंजर्ड स्पीशीज (सीआईटीईएस) की निगरानी समिति की रिपोर्ट में की गई है. इसमें गुजरात के वनतारा जू के खिलाफ गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा किया गया है.
वनतारा, जिसे आधिकारिक तौर पर ग्रीन जुलॉजिकल रेस्क्यू एंड रीहैबिलिटेशन सेंटर कहा जाता है, पश्चिमी गुजरात में है. इसे एशिया के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी द्वारा संचालित किया जाता है. यह केंद्र हाल के वर्षों में दसियों हजार जानवरों को अपने संरक्षण में ले चुका है.
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने पहले इस केंद्र को किसी भी गैरकानूनी गतिविधि से मुक्त बताया था. हालांकि साइट्स की ताजा रिपोर्ट ने संकेत दिया है कि वनतारा में अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर के अत्यंत संकटग्रस्त प्रजातियों के आयात की आशंकाएं हैं.
अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन
रिपोर्ट में कहा गया है कि "कई आयात ऐसे दिखाई देते हैं जो संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची के तहत तय नियमों के अनुरूप नहीं हैं.” समिति ने भारत से तत्काल कदम उठाने और यह सुनिश्चित करने की सिफारिश की है कि वनतारा अनजाने में जंगली जानवरों के अवैध व्यापार का केंद्र ना बन जाए.
रिपोर्ट के अनुसार, वनतारा ने अब तक 2,000 से अधिक संकटग्रस्त प्रजातियों और लगभग 9,000 कम संकटग्रस्त प्रजातियों का आयात किया है.
वन्यजीव संगठन ‘बोर्न फ्री' के नीति प्रमुख मार्क जोन्स ने कहा, "इस रिपोर्ट ने जवाबों से ज्यादा सवाल खड़े किए हैं. आखिर संख्या में इतना अंतर क्यों? इतने सारे जानवर कहां से आए? और यह कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है कि इनका व्यापार लाभ के लिए नहीं किया जा रहा?”
वनतारा का दावा है कि उसके पास 1.5 लाख जानवर हैं, जबकि साइट्स अधिकारियों के सितंबर दौरे में यह संख्या केवल 47,000 दर्ज की गई.
कई प्रजातियों पर सवाल
साइट्स ने अपनी रिपोर्ट में कई आरोपों की जांच की है, जिनमें दुनिया के सबसे दुर्लभ तापानुली ऑरैंगउटान का मामला प्रमुख है. समाचार एजेंसी एएफपी की पहले आई रिपोर्ट के अनुसार, वनतारा ने संयुक्त अरब अमीरात से एक तापानुली ऑरैंगउटान हासिल किया था, जो इंडोनेशिया में पैदा हुआ था.
साइट्स के नियमों के तहत ऐसी प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पूरी तरह रोक है, सिवाय उन मामलों के जहां जानवर "कैप्टिव-ब्रेड” यानी कैद में पाले गए हों. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इंडोनेशिया में तापानुली ऑरैंगउटान का कोई कैप्टिव ब्रीडिंग प्रोग्राम है ही नहीं, क्योंकि इस प्रजाति के केवल 800 सदस्य ही अब दुनिया में बचे हैं.
इसी तरह के संदिग्ध मामलों में सीरिया से चीते, हैती से एक गोरिल्ला और इराक से बोनोबो बंदर शामिल हैं, जिनकी वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं.
भारत की साख पर सवाल
इंडोनेशिया के ऑरैंगउटान इन्फॉर्मेशन सेंटर के संस्थापक पानुट हादिसिसवोयो ने कहा, "यह वास्तव में चौंकाने वाला है. संख्या बहुत बड़ी है. वनतारा कानूनी खामियों का फायदा उठा रहा है और संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए बनाए गए नियमों के मूल उद्देश्य को कमजोर कर रहा है.”
पानुट वर्षों से भारत से कुछ ऑरैंगउटान बंदरों की वापसी की मांग कर रहे हैं, जिनमें वे भी शामिल हैं जो तस्करी के दौरान भारत में पकड़े गए थे और बाद में वनतारा को सौंपे गए.
साइट्स रिपोर्ट ने हालांकि वनतारा की "विश्वस्तरीय सुविधाओं” की सराहना की है, लेकिन भारत सरकार को अपने आयात नियमों की समीक्षा करने, क्षमता बढ़ाने और परमिट प्रणाली को सख्त बनाने की सिफारिश की है.
स्वतंत्र वन्यजीव व्यापार विशेषज्ञ डेनियल स्टाइल्स ने कहा, "यह रिपोर्ट वनतारा की वास्तविक स्थिति का ईमानदार मूल्यांकन है. अब देखना होगा कि क्या वास्तव में कुछ सुधार होता है.”
साइट्स ने भारत से इस दिशा में प्रगति की रिपोर्ट मांगी है और चेतावनी दी है कि यदि चिंताओं का समाधान नहीं हुआ तो भारत पर वन्यजीव व्यापार निलंबन जैसी कार्रवाई की जा सकती है. भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में लंबे समय से काम कर रहे संरक्षण विशेषज्ञ के योगानंद ने कहा, "ये निष्कर्ष बेहद चिंताजनक हैं और भारत की संरक्षण को लेकर विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इस साख को बहाल करने के लिए भारत को ऐसे कदम उठाने होंगे जो औरों के लिए मिसाल हों.”
वनतारा और भारत के पर्यावरण मंत्रालय ने इस रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.













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