UPI Transaction Charges Row: यूपीआई पर मर्चेंट चार्ज के विधेयक से भड़की कांग्रेस; मोदी सरकार पर लगाया 'जनता की जेब काटने' का आरोप
संसद में पेश पेमेंट्स एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में संशोधन विधेयक के बाद यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने का रास्ता साफ हो गया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के हवाले से विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए जनता पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने का आरोप लगाया है.
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नई दिल्ली: संसद में केंद्र सरकार द्वारा पेमेंट्स एंड सेटलमेंट सिस्टम्स (Payment and Settlement Systems) (PSS) एक्ट में संशोधन से जुड़ा विधेयक पेश किए जाने के बाद देश में यूपीआई (UPI) लेनदेन पर मर्चेंट चार्ज लागू होने की संभावना को लेकर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है.
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार 'जीरो-फीस' मॉडल से चल रहे डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को खत्म कर आम जनता और कारोबारियों पर नया वित्तीय बोझ डालने की योजना बना रही है. यह भी पढ़ें: UPI Charges Myth vs Reality: क्या ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर लगेगा शुल्क? PSS एक्ट संशोधन का सच जानें
कांग्रेस का हमला: 'जनता की जेब काटने की तैयारी'
विधेयक के संसद में पेश होते ही कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की आलोचना की.
कांग्रेस ने अपनी पोस्ट में लिखा:
"जल्द ही आपसे ₹2,000 से अधिक के यूपीआई भुगतान पर शुल्क वसूला जा सकता है। जनता पहले से ही महंगाई से परेशान है, लेकिन सरकार एक के बाद एक नई योजना लाकर आम लोगों की जेब काटने का काम कर रही है.'जनता भले परेशान हो, लेकिन वसूली जारी रहनी चाहिए' यही सरकार का मंत्र बन चुका है."
क्या है मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) और प्रस्तावित बदलाव?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए संशोधनों के तहत बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का वैधानिक अधिकार मिल जाएगा.
MDR वह शुल्क होता है जो व्यापारी या दुकानदार डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले बैंक और पेमेंट एग्रीगेटर को देते हैं. वर्तमान में क्रेडिट कार्ड पर लगभग 1.5% और डेबिट कार्ड पर 0.9% तक एमडीआर लगता है, जबकि यूपीआई पूरी तरह से मुफ्त रहा है.
कांग्रेस का कहना है कि मोदी ने आपकी जेब पर डाका डालने की योजना बनाई है
मोदी ने आपकी जेब काटने का प्लान बना लिया है।
जल्द ही आपसे 2,000 रुपए से ज्यादा के UPI पेमेंट पर वसूली की जा सकती है।
लोग पहले ही महंगाई से परेशान हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी को उससे फर्क नहीं पड़ता। वो नए-नए प्लान लाकर आपकी पाई-पाई निचोड़ लेना चाहते हैं।
मोदी का फंडा साफ है: जनता… pic.twitter.com/4nSxYJJpoT
— Congress (@INCIndia) August 5, 2026
किन लेनदेन पर पड़ सकता है असर?
सरकारी और बाजार सूत्रों के अनुसार, यदि भविष्य में एमडीआर लागू भी किया जाता है, तो इसके लिए दो प्रमुख विकल्पों पर विचार किया जा रहा है:
- लेनदेन सीमा: ₹1.5 करोड़ (15 मिलियन रुपये) से अधिक वार्षिक टर्नओवर वाले बड़े व्यापारियों पर ₹2,000 से अधिक के लेनदेन के लिए 3% से 0.5% तक एमडीआर लगाया जा सकता है.
- छोटे व्यवसायों को छूट: आम जनता के व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) ट्रांसफर और छोटे दुकानदारों के लेनदेन को पूरी तरह मुफ्त रखा जाएगा.
वित्तीय फर्म 'जेफरीज़' (Jefferies) की एक रिपोर्ट के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के लेनदेन कुल यूपीआई वॉल्यूम का केवल 4% हैं, लेकिन कुल मौद्रिक मूल्य में इनकी हिस्सेदारी लगभग 67% है.
यूपीआई नेटवर्क का वर्तमान दायरा
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में यूपीआई प्लेटफॉर्म के जरिए 23.6 बिलियन (2,360 करोड़) लेनदेन दर्ज किए गए, जिनका कुल मूल्य 29.9 लाख करोड़ रुपये रहा. वर्तमान में इस बाजार में वॉलमार्ट समर्थित फोनपे (PhonePe) और गूगल पे (Google Pay) की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है.
पेमेंट उद्योग के दिग्गजों का कहना है कि जीरो-एमडीआर नीति के कारण फिनटेक कंपनियों के लिए सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा पर निवेश करना कठिन हो रहा था, जिसके चलते यह वैधानिक संशोधन लाया जा रहा है.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 05, 2026 05:21 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

