मुंबई: बृहन्मुंबई नगर निगम (Brihanmumbai Municipal Corporation) यानी (BMC) चुनाव 2026 के नतीजे घोषित होने के बाद अब मायानगरी की नजरें फोर्ट स्थित बीएमसी मुख्यालय (BMC Headquarters) पर टिकी हैं. 16 जनवरी को आए परिणामों में बीजेपी (BJP) और एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के नेतृत्व वाली शिवसेना (Shivsena) की 'महायुति' ने 118 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया है. अब शहर के 77वें मेयर के चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है. करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद मुंबई को अपना नया 'प्रथम नागरिक' मिलेगा. आखिरी बार यह पद संयुक्त शिवसेना की किशोरी पेडणेकर (Kishori Pednekar) के पास था.
मुंबई का मेयर जनता द्वारा सीधे नहीं चुना जाता, बल्कि यह नवनिर्वाचित पार्षदों (Corporators) के बीच एक व्यवस्थित आंतरिक मतदान प्रक्रिया के माध्यम से चुना जाता है. यह भी पढ़ें: List of Mayors of Mumbai: मुंबई के मेयरों की अब तक की पूरी लिस्ट, जानें 4 साल बाद अब किसे मिलेगी यह कुर्सी
पार्षदों की भूमिका और जनरल बॉडी का गठन
मेयर चुनाव की नींव नगर निगम चुनाव से शुरू होती है. मुंबई को 227 चुनावी वार्डों में बांटा गया है, जिनमें से प्रत्येक का प्रतिनिधित्व एक पार्षद करता है.
- जनरल बॉडी: चुनाव जीतने के बाद, राज्य चुनाव आयोग इन 227 पार्षदों के नामों को राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित करता है. ये पार्षद मिलकर बीएमसी की 'जनरल बॉडी' बनाते हैं.
- चुनावी शक्ति: इसी जनरल बॉडी के पास अपने बीच में से ही मेयर और डिप्टी मेयर को चुनने की विशेष शक्ति होती है.
नामांकन और चुनाव की कानूनी प्रक्रिया
मुंबई नगर निगम अधिनियम, 1888 के तहत मेयर के चुनाव के लिए एक विशिष्ट कानूनी प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है:
- नामांकन पत्र दाखिल करना: कोई भी निर्वाचित पार्षद मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल कर सकता है. आमतौर पर, बहुमत वाला गठबंधन जीत सुनिश्चित करने के लिए एक ही नाम तय करता है.
- विशेष बैठक: नगर आयुक्त के परामर्श से नगर सचिव नवनिर्वाचित सदन की एक विशेष बैठक बुलाते हैं. इसकी अध्यक्षता अक्सर निवर्तमान मेयर या राज्य सरकार द्वारा नियुक्त पीठासीन अधिकारी करते हैं.
- वोटिंग का तरीका: यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में होते हैं, तो मौजूद पार्षदों के बीच हाथ उठाकर (Show of hands) या गुप्त मतदान के माध्यम से चुनाव होता है. साधारण बहुमत हासिल करने वाले उम्मीदवार को विजेता घोषित किया जाता है.
कार्यकाल और रोटेशन नीति
पार्षदों का कार्यकाल पांच साल का होता है, लेकिन मुंबई के मेयर का कार्यकाल केवल 2.5 वर्ष का होता है.
- आरक्षण नीति: मेयर का पद रोटेशन और आरक्षण नीति के अधीन है. राज्य सरकार की लॉटरी प्रणाली के आधार पर यह पद अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), पिछड़े वर्गों या विशेष रूप से महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकता है.
- नेतृत्व परिवर्तन: ढाई साल के कार्यकाल का उद्देश्य गठबंधन सहयोगियों के बीच सत्ता साझा करना या विभिन्न आंतरिक समीकरणों को संतुलित करना होता है. यह भी पढ़ें: BMC Election Results 2026: मुंबई से 'ठाकरे राज' खत्म, बीजेपी-शिंदे गठबंधन का 'मिशन मुंबई' सफल; जानें किसे मिली कितनी सीटें
मेयर: औपचारिक पद बनाम कार्यकारी शक्तियां
मुंबई का मेयर शहर का सर्वोच्च औपचारिक पद है, लेकिन वास्तविक कार्यकारी शक्तियां (Executive Powers) राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एक आईएएस अधिकारी यानी नगर आयुक्त के पास होती हैं.
- मेयर की जिम्मेदारी: मेयर का मुख्य कार्य निगम की बैठकों की अध्यक्षता करना, सदन में व्यवस्था बनाए रखना और उच्च स्तरीय राजनयिक समारोहों में शहर का प्रतिनिधित्व करना है.
- राजनैतिक प्रभाव: भले ही शक्तियां सीमित हों, लेकिन मेयर निर्वाचित प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का काम करता है और शहर की नीतियों पर गहरा राजनीतिक प्रभाव रखता है.











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