नाबालिग से बलात्कार और हत्या: कलकत्ता हाई कोर्ट ने पीड़िता का पोस्टमार्टम कराने का दिया आदेश
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के जयनगर में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित बलात्कार और हत्या के मामले में रविवार को विशेष रूप से बुलाई गई सुनवाई में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि पीड़िता के शव का पोस्टमार्टम राज्य में केंद्र संचालित अस्पताल में न्यायिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कराया जाए.
कोलकाता, 6 अक्टूबर (आईएएनएस). पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के जयनगर में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित बलात्कार और हत्या के मामले में रविवार को विशेष रूप से बुलाई गई सुनवाई में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि पीड़िता के शव का पोस्टमार्टम राज्य में केंद्र संचालित अस्पताल में न्यायिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कराया जाए. न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिव गणनम के निर्देश के बाद आपातकालीन आधार पर मामले की सुनवाई की और निर्देश दिया कि मामले की न्यायिक जांच न्यायिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में नादिया जिले के कल्याणी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में की जाए.
अगर एम्स कल्याणी में शव परीक्षण के लिए अपेक्षित बुनियादी ढांचा नहीं है, तो न्यायमूर्ति घोष ने निर्देश दिया कि शव परीक्षण राजकीय कॉलेज ऑफ मेडिसिन और जेएनएम अस्पताल में किया जाना चाहिए, जो उसी जिले में स्थित है. हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर शव परीक्षण राजकीय कॉलेज में भी किया जाता है, तो इसे एम्स कल्याणी के किसी फोरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ द्वारा किया जाना चाहिए और शव परीक्षण के समय जेएनएम से किसी को भी मौजूद रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
इसके अलावा, संपूर्ण शव परीक्षण प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग का निर्देश देते हुए न्यायमूर्ति घोष ने कहा कि मृतका के माता-पिता को शव परीक्षण कक्ष के बाहर उपस्थित रहने की अनुमति दी जानी चाहिए और यदि वे चाहें तो उन्हें शव परीक्षण की वीडियो रिकॉर्डिंग की एक प्रति उपलब्ध कराई जानी चाहिए.
इस बीच, रविवार को राज्य भाजपा सचिव प्रियंका टिबरेवाल ने एनसीपीसीआर के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो को पत्र लिखकर मामले में आयोग के हस्तक्षेप की मांग की.
उन्होंने पत्र में कहा, "मैं राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) से इस मामले में अत्यंत तत्परता से कार्रवाई करने का आग्रह करती हूं. हमारे बच्चों की सुरक्षा और अधिकार प्राथमिकता बने रहना चाहिए, इस मामले में आपका हस्तक्षेप यह पुष्टि करने में महत्वपूर्ण होगा कि इस तरह के जघन्य कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पीड़िता को न्याय प्रदान किया जाएगा."
अपने पत्र में, टिबरेवाल ने इस बात पर भी जोर दिया है कि इस जघन्य अपराध की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की गारंटी के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की भागीदारी अनिवार्य है.
पत्र में कहा गया है, "इस तरह का हस्तक्षेप न केवल कानूनी प्रक्रिया की पवित्रता को बनाए रखने के लिए बल्कि न्याय प्रशासन में जनता का विश्वास बहाल करने के लिए भी आवश्यक है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि जांच किसी भी स्थानीय पूर्वाग्रह या अनुचित प्रभाव से मुक्त हो."
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 06, 2024 09:49 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

