गुजरात UCC बिल के खिलाफ अहमदाबाद में AIMIM का प्रदर्शन; जामा मस्जिद के बाहर नारेबाजी, पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया
गुजरात सरकार द्वारा आगामी सप्ताह विधानसभा में पेश किए जाने वाले 'समान नागरिक संहिता' (UCC) बिल के विरोध में AIMIM ने अहमदाबाद में प्रदर्शन किया. पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन कर रहे कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है.
अहमदाबाद: गुजरात विधानसभा (Gujarat Legislative Assembly) में अगले सप्ताह पेश होने वाले 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code) यानी यूसीसी (UCC) विधेयक को लेकर राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. शनिवार को ईद-उल-फितर (Eid-ul-Fitr) के मौके पर अहमदाबाद (Ahmedabad) की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के बाहर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen) यानी एआईएमआईएम (AIMIM) के कार्यकर्ताओं ने इस प्रस्तावित कानून के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने 'UCC हटाओ, देश बचाओ' और 'UCC वापस लो' के नारे लगाते हुए बैनर प्रदर्शित किए. यह भी पढ़ें: Eid-ul-Fitr 2026: दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश पर उत्तम नगर में सुरक्षा सख्त, जामा मस्जिद समेत कई इलाकों में पुलिस का कड़ा पहरा
बिना अनुमति प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई
यह प्रदर्शन बिना किसी पूर्व पुलिस अनुमति के आयोजित किया गया था. जैसे ही विरोध शुरू हुआ, पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप किया. प्रदर्शन के दौरान करीब 12-13 व्यक्तियों को पुलिस ने हिरासत में लिया. अधिकारियों का कहना है कि शहर में ईद के त्योहार के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी थी, ताकि किसी भी तरह के तनाव को बढ़ने से रोका जा सके.
शरीयत और लिव-इन रिलेशनशिप पर आपत्ति
प्रदर्शनकारियों का मुख्य विरोध बिल के उन प्रावधानों को लेकर है जो उनके अनुसार इस्लामिक शरीयत कानून के खिलाफ हैं. प्रदर्शन में शामिल एक कार्यकर्ता ने कहा, 'हमारी शरीयत लिव-इन रिलेशनशिप जैसे प्रावधानों की अनुमति नहीं देती है. सरकार को इस कानून को तुरंत वापस लेना चाहिए.' AIMIM कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह बिल धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों में हस्तक्षेप करता है.
क्या है गुजरात समान नागरिक संहिता (UCC) बिल 2026?
गुजरात सरकार आगामी 24 मार्च को बजट सत्र के समापन से एक दिन पहले इस विधेयक को सदन के पटल पर चर्चा और पारित करने के लिए रखने वाली है.
- ड्राफ्ट कमेटी: सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति ने अपना मसौदा मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को सौंप दिया है.
- प्रमुख प्रावधान: इस बिल का उद्देश्य धर्म, जाति या पंथ से परे सभी निवासियों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए एक समान कानूनी ढांचा प्रदान करना है.
- लिव-इन रिलेशनशिप: बिल में लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण, पार्टनर के भरण-पोषण का अधिकार और बच्चों के पालन-पोषण की समान जिम्मेदारी जैसे प्रावधान शामिल हैं.
सरकार का पक्ष: 'समान अधिकार सुनिश्चित करना'
कैबिनेट बैठक के बाद सरकार के प्रवक्ता और मंत्री जीतू वघानी ने स्पष्ट किया कि यह कानून नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने कहा कि सदन में चर्चा के दौरान सभी को अपने विचार व्यक्त करने का अवसर दिया जाएगा. गौरतलब है कि गुजरात का यह मॉडल काफी हद तक उत्तराखंड में हाल ही में लागू किए गए UCC अधिनियम पर आधारित है,
पुलिस ने मस्जिद और शहर के अन्य संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है ताकि ईद के उत्सव के दौरान शांति बनी रहे.