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8th Pay Commission: क्या 18,000 से बढ़कर 46,000 रुपये हो जाएगी न्यूनतम बेसिक सैलरी? जानें फिटमेंट फैक्टर और सरकार की नई टाइमलाइन

वित्त मंत्रालय ने 8वें वेतन आयोग के लिए 18 महीने की समयसीमा तय की है. यदि आयोग पिछले फिटमेंट फैक्टर को आधार बनाता है, तो केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी में भारी उछाल देखने को मिल सकता है.

8th Pay Commission: क्या 18,000 से बढ़कर 46,000 रुपये हो जाएगी न्यूनतम बेसिक सैलरी? जानें फिटमेंट फैक्टर और सरकार की नई टाइमलाइन
8वां वेतन आयोग (Photo Credits: Pexels)

मुंबई: केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों (Employees and Pensioners) के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है. वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) (8th CPC) को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए औपचारिक रूप से 18 महीने की समयसीमा निर्धारित की है. 3 नवंबर, 2025 को गठित इस आयोग का मुख्य कार्य वर्तमान वेतन ढांचे, भत्तों और पेंशन की समीक्षा करना है. हालांकि आयोग की अंतिम रिपोर्ट 2027 के मध्य तक आने की उम्मीद है, लेकिन अधिकारियों के अनुसार, वेतन वृद्धि की सिफारिशें 1 जनवरी, 2026 से पूर्वव्यापी प्रभाव (Retrospectively) से लागू होने की संभावना है. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission Latest News: 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ा अपडेट, सरकार ने वेतन बढ़ोतरी के लिए 18 महीने का तय किया समय, स्टेकहोल्डरों से मांगा फीडबैक

संसद में समयसीमा की पुष्टि

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में एक लिखित उत्तर के माध्यम से इस विकास की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि पैनल वर्तमान 'पे मैट्रिक्स' की व्यापक समीक्षा करेगा. चौधरी ने स्पष्ट किया कि आयोग अपने गठन के 18 महीने के भीतर वेतन, भत्तों और पेंशन जैसे विभिन्न मुद्दों पर अपनी सिफारिशें देगा. इस टाइमलाइन के अनुसार, भले ही प्रशासनिक कार्य वित्त वर्ष 2026-27 तक चलेगा, लेकिन कर्मचारियों के वेतन और एरियर (Arrears) की गणना 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी मानी जाएगी.

फिटमेंट फैक्टर की अहम भूमिका

8वें वेतन आयोग के कामकाज का मुख्य केंद्र 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) का निर्धारण करना है. यह वह गुणक (Multiplier) है जिसका उपयोग पुरानी वेतन संरचना से नई स्केल पर जाने के लिए किया जाता है. 7वें वेतन आयोग में 2.57 के समान गुणक का उपयोग किया गया था, जिसने 'ग्रेड पे' प्रणाली को समाप्त कर एक सुव्यवस्थित 'पे मैट्रिक्स' की शुरुआत की थी. विशेषज्ञ ए.के. भट्टाचार्य के अनुसार, फिटमेंट फैक्टर सबसे महत्वपूर्ण चर है क्योंकि इसमें मुद्रास्फीति, महंगाई भत्ता और आर्थिक विकास दर को शामिल किया जाता है. यह भी पढ़ें: 8वें वेतन आयोग का इंतजार, क्या 2026 में लागू होगी नई व्यवस्था? जानें कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए ताजा अपडेट

सैलरी में संभावित वृद्धि का अनुमान

यदि 8वां वेतन आयोग पिछले 2.57 के गुणक को बरकरार रखता है या उसमें वृद्धि करता है, तो लेवल 1 के कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी, जो वर्तमान में 18,000 रुपये है, बढ़कर लगभग 46,000 रुपये प्रति माह हो सकती है. इसी अनुपात में उच्च स्तर के पदों पर भी वेतन वृद्धि लागू होगी, जहां वर्तमान अधिकतम वेतन 2.5 लाख रुपये है.

हालांकि, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आयोग को कर्मचारियों की अपेक्षाओं और सरकार की राजकोषीय स्थिति (Fiscal Health) के बीच संतुलन बनाना होगा. चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि बढ़ते आर्थिक परिवेश में वास्तविक मजदूरी की मांग पूरी हो और वह टिकाऊ भी बनी रहे.

ऐतिहासिक संदर्भ और कर्मचारियों की उम्मीदें

वेतन आयोगों का इतिहास हर 10 साल में वेतन सुधार का रहा है:

  • 6ठा वेतन आयोग (2008): न्यूनतम वेतन 6,600 रुपये तय किया गया था.
  • 7वां वेतन आयोग (2016): न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 18,000 रुपये किया गया और 3 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि का नियम पेश किया गया.

8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों को उम्मीद है कि वह महंगाई भत्ते (DA) के रुझान, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और सेवानिवृत्त लोगों के लिए पेंशन संरचना की भी गहन समीक्षा करेगा. 2016 के बाद से जीवनयापन की लागत में आए बड़े बदलाव को देखते हुए, कर्मचारी ऐसी सिफारिशों की प्रतीक्षा कर रहे हैं जो आधुनिक आर्थिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करें. फिलहाल, अंतिम आंकड़े केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी और आयोग के मुद्रास्फीति डेटा ऑडिट पर निर्भर करेंगे.

(The above story first appeared on LatestLY on Apr 01, 2026 05:09 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).