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₹20,000 सैलरी पर कितना कटेगा पीएफ? ईपीएफओ के नए नियमों के तहत समझें पूरा गणित

₹20,000 की बेसिक सैलरी पर हर महीने कुल ₹2,400 कर्मचारी के वेतन से कटते हैं और इतनी ही राशि नियोक्ता द्वारा ईपीएफ व ईपीएस खातों में जमा कराई जाती है.

₹20,000 सैलरी पर कितना कटेगा पीएफ? ईपीएफओ के नए नियमों के तहत समझें पूरा गणित

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियमों के अनुसार किसी भी वेतनभोगी कर्मचारी की सैलरी से होने वाली पीएफ कटौती उसकी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) पर तय होती है. यदि किसी कर्मचारी की मूल वेतन सीमा ₹20,000 प्रति माह है, तो उसके वेतन से हर महीने अनिवार्य रूप से 12 प्रतिशत यानी ₹2,400 की कटौती की जाती है. इतनी ही राशि कंपनी यानी नियोक्ता की ओर से भी जमा की जाती है, जिसका एक हिस्सा भविष्य निधि और दूसरा हिस्सा पेंशन फंड में जाता है.

कर्मचारी और नियोक्ता का अंशदान गणित

कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) नियम के तहत कुल 24 प्रतिशत का अंशदान जमा होता है. इसमें कर्मचारी का हिस्सा 12 प्रतिशत और नियोक्ता का हिस्सा 12 प्रतिशत निर्धारित है. ₹20,000 की बेसिक सैलरी पर इसका वितरण इस प्रकार रहता है:

कर्मचारी का अंशदान (12%): ₹2,400 (यह राशि कर्मचारी के वेतन से काटकर सीधे ईपीएफ खाते में जमा होती है).

नियोक्ता का कुल अंशदान (12%): ₹2,400.

नियोक्ता द्वारा दिए जाने वाले ₹2,400 को दो भागों में विभाजित किया जाता है:

कर्मचारी पेंशन योजना (EPS): बेसिक सैलरी का 8.33 प्रतिशत यानी ₹1,666 पेंशन खाते में जाता है.

कर्मचारी भविष्य निधि (EPF): शेष 3.67 प्रतिशत यानी ₹734 ईपीएफ खाते में जमा होता है.

इस प्रकार कर्मचारी के ईपीएफ खाते में हर महीने कुल ₹3,134 (कर्मचारी के ₹2,400 + नियोक्ता के ₹734) जमा होते हैं, जबकि ₹1,666 पेंशन फंड (EPS) में जुड़ते हैं. दोनों को मिलाकर कुल मासिक बचत ₹4,800 बनती है.

ग्रॉस सैलरी और बेसिक सैलरी में अंतर

वेतन संरचना में ग्रॉस सैलरी और बेसिक सैलरी अलग-अलग होती हैं. यदि किसी कर्मचारी की कुल ग्रॉस सैलरी (CTC) ₹20,000 है, तो कंपनी के पेरोल ढांचे के अनुसार उसकी बेसिक सैलरी आमतौर पर 40 से 50 प्रतिशत यानी लगभग ₹8,000 से ₹10,000 के बीच हो सकती है. ऐसी स्थिति में पीएफ कटौती पूरी ₹20,000 पर न होकर केवल बेसिक हिस्से पर की जाती है. उदाहरण के लिए, ₹10,000 बेसिक सैलरी होने पर कर्मचारी का पीएफ ₹1,200 कटेगा.

हालांकि, यदि नियुक्ति पत्र (Offer Letter) में पीएफ वेज (PF Wages) या बेसिक पे स्पष्ट रूप से ₹20,000 दर्ज है, तो कर्मचारी की इन-हैंड सैलरी में से पूरे ₹2,400 की कटौती लागू होगी.

टेक-होम सैलरी और ब्याज लाभ

ईपीएफ कटौती से कर्मचारी की मासिक इन-हैंड सैलरी में थोड़ी कमी जरूर आती है, लेकिन यह दीर्घकालिक बचत के लिए एक सुरक्षित माध्यम है. जमा होने वाली कुल राशि पर केंद्र सरकार द्वारा तय वार्षिक ब्याज दर का लाभ मिलता है. इसके अलावा, सेवानिवृत्ति के समय ईपीएफ का पूरा फंड कर-मुक्त रूप में प्राप्त होता है और ईपीएस में जमा राशि भविष्य में नियमित मासिक पेंशन की पात्रता बनाती है.

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 28, 2026 02:42 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).