केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन और प्रमोशन से जुड़ी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव हो सकता है. 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) के 2025 से लागू होने की उम्मीद है, जिसकी सिफारिशों के आधार पर कर्मचारियों का वेतन और अप्रेजल तय किया जाएगा.
तय वेतन और प्रमोशन?
सरकारी नौकरियों को अब तक स्थिरता और सुरक्षित करियर के तौर पर देखा जाता रहा है. आम धारणा यह रही है, कि एक बार सरकारी नौकरी मिलने के बाद वेतन बढ़ोतरी और प्रमोशन अपने आप होते रहते हैं, लेकिन 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) ने इस सोच को गलत करार देते हुए इसे खत्म करने की सिफारिश की थी.
सालाना वेतनवृद्धि की अब कोई गारंटी नहीं
7वें वेतन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि ‘सरकारी कर्मचारियों के बीच यह आम धारणा बन चुकी है कि प्रमोशन और वेतन वृद्धि अपने आप होती रहती है.’ कर्मचारी यह मानते हैं, कि मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) मिलना तय है, चाहे उनका प्रदर्शन कैसा भी हो. लेकिन आयोग ने इस सोच को गलत बताया और साफ कहा कि अगर कोई कर्मचारी तय किए गए प्रदर्शन मानकों को पूरा नहीं करता, तो उसकी सालाना वेतन वृद्धि (Increment) रोकी जा सकती है. इससे कर्मचारियों को यह संदेश मिलेगा कि वेतन वृद्धि अब केवल बेहतर काम के आधार पर ही मिलेगी, न कि स्वाभाविक रूप से मिलेगी.
किन कर्मचारियों पर लागू होगा ये नियम?
आयोग ने यह सिफारिश की थी कि जिन कर्मचारियों को उनकी सेवा के पहले 20 वर्षों के दौरान न तो एमएसीपी के लिए योग्य माना जाए और न ही उन्हें कोई नियमित प्रमोशन मिले, ऐसे कर्मचारियों की सालाना वेतन वृद्धि (Annual Increment) रोक दी जानी चाहिए. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है, कि केवल वह कर्मचारी ही वेतन वृद्धि और प्रमोशन पाएं जो अपने प्रदर्शन के मानकों को पूरा करते हैं.
ये दंड नहीं, 'एफिशिएंसी बार' होगा
7वें वेतन आयोग ने कहा कि यह वेतन वृद्धि रोकना कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Penalty) नहीं होगा, बल्कि इसे ‘दक्षता बार’ (Efficiency Bar) माना जाएगा. इसका उद्देश्य कर्मचारियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करना है.
सेवा छोड़ने का विकल्प भी होगा
आयोग ने यह भी सुझाव दिया था कि ऐसे कर्मचारी, जो लगातार प्रदर्शन मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (Voluntary Retirement) जैसी शर्तों पर नौकरी छोड़ने का विकल्प दिया जा सकता है.
सरकारी नौकरी की परंपरागत छवि अब बदल रही है. 8वें वेतन आयोग से जहां एक ओर कर्मचारियों को बेहतर वेतन की उम्मीद है, वहीं 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के चलते सख्ती भी बढ़ सकती है. इसलिए अब सिर्फ सरकारी नौकरी मिलना ही काफी नहीं होगा, उचित वेतनवृद्धि और प्रमोशन के लिए निरंतर अच्छा प्रदर्शन करना अनिवार्य हो सकता है.













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