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'ओटीटी और सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट गंभीर विषय', सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस

ओटीटी और सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अश्लील कंटेंट के प्रसारण पर रोक लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और कंपनियों से नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है. कोर्ट ने जिन प्लेटफार्म्स को नोटिस जारी की है, उनमें नेटफ्लिक्स, अमेजन, उल्लू डिजिटल लिमिटेड, ऑल्ट बालाजी, ट्विटर, मेटा प्लेटफार्म और गूगल शामिल हैं.

'ओटीटी और सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट गंभीर विषय', सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट (Photo: Wikimedia Commons)

नई दिल्ली, 28 अप्रैल : ओटीटी और सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अश्लील कंटेंट के प्रसारण पर रोक लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और कंपनियों से नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है. कोर्ट ने जिन प्लेटफार्म्स को नोटिस जारी की है, उनमें नेटफ्लिक्स, अमेजन, उल्लू डिजिटल लिमिटेड, ऑल्ट बालाजी, ट्विटर, मेटा प्लेटफार्म और गूगल शामिल हैं.

पूर्व सूचना आयुक्त उदय माहूरकर समेत अन्य ने दायर याचिका में मांग की कि कोर्ट केंद्र सरकार को नेशनल कंटेंट कंट्रोल ऑथोरिटी का गठन करने का निर्देश दे, जो इन प्लेटफार्म पर अश्लीलता को रोकने के लिए दिशानिर्देश तय करे. यह भी पढ़ें : MP: भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन पर नशे में धुत युवकों को रोकने पर जीआरपी कांस्टेबल के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट (देखें वीडियो)

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि यह एक गंभीर चिंता पैदा करती है. केंद्र को इस बारे में कुछ करना चाहिए. यह मामला कार्यपालिका या विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आता है. ऐसे भी हम पर आरोप हैं कि हम कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में दखल देते हैं. फिर भी हम नोटिस जारी कर रहे हैं.

याचिका में दावा किया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई ऐसे पेज और प्रोफाइल सक्रिय हैं जो बिना किसी नियंत्रण के अश्लील कंटेंट प्रसारित कर रहे हैं. इसके अलावा, कई ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर भी ऐसे कंटेंट हैं, जिसमें चाइल्ड पोर्नोग्राफी के एलिमेंट्स भी पाए जाते हैं. याचिका में कहा गया कि इससे विकृत और अप्राकृतिक यौन प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिलता है, जिससे अपराध दर में भी बढ़ोतरी हो रही है.

याचिका में आगे कहा गया, 'इंटरनेट की पहुंच और सस्ते कीमत के चलते सभी उम्र के यूजर्स तक अश्लील कंटेंट पहुंचाना आसान हो गया है, जो सार्वजनिक सुरक्षा में खतरा पैदा कर सकता है. अगर इस पर पाबंदियां नहीं लगाई गईं तो सामाजिक मूल्यों और लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर इसका गंभीर असर पड़ेगा. ऐसे में जरूरी है कि सरकार अपना संवैधानिक कर्तव्य निभाए और सामाजिक नैतिकता की रक्षा करे. वह यह सुनिश्चित करें कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स विकृत मानसिकता को जन्म देने वाली जगह न बन पाए.'

(The above story first appeared on LatestLY on Apr 28, 2025 02:21 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).