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मैं था, मैं हूं, मैं एक स्वतंत्र फिल्म निर्माता बना रहूंगा: मधुर भंडारकर

साल 2001 में आज की ही तारीख यानी 28 सितंबर को फिल्म 'चांदनी बार' बड़े पर्दे पर हिट हुई थी. फिल्म निर्माता मधुर भंडारकर, जो सिर्फ दो फिल्म पुराने थे, उन्होंने कल्पना नहीं की थी कि यह फिल्म उनके करियर को बदलकर रख देगी. इस फिल्म को चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले थे और आखिरकार, मधुर को हिंदी फिल्म उद्योग में यथार्थवादी कहानी कहने की अपनी विशिष्ट शैली मिली थी.

मैं था, मैं हूं, मैं एक स्वतंत्र फिल्म निर्माता बना रहूंगा: मधुर भंडारकर
मधुर भंडारकर (Photo Credits: Instagram)

मुंबई, 28 सितम्बर : साल 2001 में आज की ही तारीख यानी 28 सितंबर को फिल्म 'चांदनी बार' बड़े पर्दे पर हिट हुई थी. फिल्म निर्माता मधुर भंडारकर, जो सिर्फ दो फिल्म पुराने थे, उन्होंने कल्पना नहीं की थी कि यह फिल्म उनके करियर को बदलकर रख देगी. इस फिल्म को चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले थे और आखिरकार, मधुर को हिंदी फिल्म उद्योग में यथार्थवादी कहानी कहने की अपनी विशिष्ट शैली मिली थी. 'चांदनी बार' की 20वीं वर्षगांठ का जश्न मनाते हुए, मधुर ने आईएएनएस से बातचीत में फिल्म के सफर को याद किया और अब, 13 फिल्में और दो राष्ट्रीय पुरस्कार बाद में अब उनकी योजनी क्या है, उसे भी साझा किया. मधुर ने कहा कि "यह मेरे लिए काफी दिलचस्प यात्रा रही है. मैंने संघर्ष, सफलता, स्थिरता सब देखी है. मुझे दर्शकों और फिल्म बिरादरी से सम्मान मिला है. मुझे एक निश्चित मात्रा में आलोचना मिली है, मेरे बीच रचनात्मक अवरोध हैं जब से मैंने सिनेमा की दुनिया में कदम रखा है, तब से मैंने फिल्में बनाई हैं, लेकिन कहानी सुनाने का उत्साह मुझे हर दिन और बेहतरीन काम करने को प्रेरित करता है."

'चांदनी बार' में तब्बू, अतुल कुलकर्णी, राजपाल यादव, अनन्या खरे और उपेंद्र लिमये जैसी स्टार बोहतरीन स्टार कास्ट थी, और इस फिल्म को लगभग 1.5 करोड़ रुपये के बजट के साथ बनाया गया था. उस समय को याद करते हुए मधुर ने कहा, "फिल्म 'हीरोइन' में कॉस्ट्यूम के लिए मेरा बजट उससे कहीं ज्यादा था. लेकिन देखिए, मैं बिल्कुल भी शिकायत नहीं कर रहा हूं. तब तक, मैंने कोई सफल फिल्म और 'चांदनी बार' नहीं दी थी. वैसे भी यह एक पारंपरिक फिल्म नहीं थी. सेक्स वर्कर्स के जीवन, महिलाओं के दुखद जीवन आदि पर आधारित कई फिल्में बनी हैं, लेकिन मेरी फिल्म बहुत अलग थी. यह कुछ वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित थी."

अपनी कहानी को जारी रखते हुए, मधुर ने आईएएनएस को दिए अपने साक्षात्कार में कहा, "मुझे याद है कि कैसे किसी ने मुझसे कहा था कि फिल्म का शीर्षक ही इतना बी-ग्रेड है कि कोई इसमें पैसा नहीं लगाना चाहेगा. मुझे इसमें आइटम सॉन्ग डालने का सुझाव दिया गया था, पर मुझे यकीन था कि महिला नायक बहुत कुछ कर सकती है, साथ ही मैंने यह भी तय किया था कि मैं एक महिला चरित्र के साथ सापेक्षता और एक निश्चित गरिमा के साथ व्यवहार करूंगा. मधुर ने मुस्कुराते हुए कहा कि "चाहे वह उनकी स्क्रीन उपस्थिति हो या उनके कुशल प्रदर्शन के कारण, तब्बू के कारण हमारी फिल्म को एक अलग आयाम मिला. अब, जब इतने वर्षों के बाद, लोग 'चांदनी बार' को उनके करियर में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में से एक के रूप में देखते हैं, तो मैं एक ही समय में भावुक और गर्व महसूस करता हूं.

हमेशा सीमित बजट में फिल्में बनाने वाले फिल्म निमार्ता होने के नाते मधुर ने कहा कि 'चांदनी बार' की शूटिंग के दौरान कुछ मामलों में यह एक बाधा बन गया था. अन्होंने कहा कि मैं बजट द्वारा रखी गई सीमाओं के बारे में ज्यादा नहीं सोच रहा था, क्योंकि मैं जिस तरह से चाहता था, वैसे एक फिल्म बना रहा हूं, यही खुद रोमांचक था. आप जानते हैं, बजट इतना कम था कि हमारे सेट पर मॉनिटर नहीं था, इसलिए हमें शॉट्स को दोबारा जांचने का मौका नहीं मिलता था, इसलिए लगभग फिल्म में कोई भी सीन रीटेक नहीं था. "मुझे याद है कि सीमित बजट में भीड़ के ²श्यों को शूट करना बहुत कठिन था. भीड़ इकट्ठा करने के लिए, हमें बहुत सारे स्थानीय और जूनियर कलाकारों को बुलाना पड़ता था, और हमें उन्हें भुगतान करना पड़ता था." यह भी पढ़ें : टाइगर श्रॉफ, तारा सुतारिया की ‘ Heropanti 2’ 2022 की ईद पर होगी रिलीज

उन्होंने कहा कि कुछ तकनीकी चुनौतियां भी थीं. लेकिन मैं फिर कहूंगा, मैं शिकायत नहीं कर रहा हूं. मैं ये बात सभी उभरते फिल्म निमार्ताओं से भी कहूंगा, कि इसे एक आशीर्वाद के रूप में मानें जब आपको बिना किसी रचनात्मक समझौते के कहानी कहने का मौका मिले. खासकर जब वे उद्योग के लिए बिल्कुल नए हों. बजट के बारे में चिंता न करें, समस्या का रचनात्मक समाधान खोजें. 2001 के बाद से, मधुर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा है, उन्होंने दर्शकों को 'सत्ता', 'पेज 3', 'कॉपोर्रेट', 'ट्रैफिक सिग्नल', 'फैशन', 'जेल' और 'हीरोइन' जैसी बॉलीवुड की कुछ बेहतरीन फिल्में दी हैं. उन्होंने कोंकणा सेन शर्मा, कुणाल खेमू, करीना कपूर, प्रियंका चोपड़ा, कंगना रनौत, अजय देवगन और नील नितिन मुकेश जैसे बॉलीवुड के कुछ सबसे प्रसिद्ध अभिनेताओं के साथ काम किया है, वहीं उनकी फिल्म 'पेज 3', 'ट्रैफिक सिग्नल' और 'फैशन' ने अन्य पुरस्कारों के साथ-साथ राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते हैं.

उनहोंने कहा कि " हाँ, एक समय था जब मैं फिल्में नहीं बना रहा था क्योंकि एक रचनात्मक ब्लॉक था. मैं एक रचनात्मक इंसान हूं, मशीन नहीं. 15 फिल्मों के साथ बीस साल मेरे लिए ठीक है. मैं बॉलीवुड में किसी लॉबी या समूह का हिस्सा बने बिना फिल्में बना रहा हूं. मैं एक स्वतंत्र फिल्म निमार्ता था, मैं हूं और मैं वही रहूंगा." मधुर ने कहा कि उन्होंने अपनी नवीनतम फिल्म 'इंडिया लॉकडाउन' की शूटिंग पूरी कर ली है, जो जल्द ही रिलीज होगी. उन्होंने कहा कि "अब, जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो मुझे अपनी यात्रा को देखकर संतुष्टि का एहसास होता है क्योंकि जब मैंने शुरूआत की थी, तो मुझे नहीं पता था कि मेरे काम को पहचान मिलेगी या नहीं. अब जब मुझे वह पहचान मिल गई है, तो मैं उन कहानियों को बताने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा हूं जो मेरे लिए और अंतत: मेरे दर्शकों के लिए मायने रखती हैं, क्योंकि मेरे लिए, मेरी फिल्म समाज का आईना है."

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 28, 2021 04:11 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).