संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय अदालत ने निकारागुआ द्वारा जर्मनी के खिलाफ दायर केस में फैसला सुनाया है कि वह इस्राएल को जर्मनी से मिल रही सैन्य मदद पर रोक नहीं लगाएगा.
ईरानी नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के हालिया आदेश के बाद ‘नैतिकता पुलिस’ ने अपनी गश्त बढ़ा दी है.
बिहार के चुनाव में जातिगत समीकरण तो केंद्र में होते ही हैं, लेकिन इस बार बेरोजगारी, महंगाई और चुनाव जीतने के बाद जनता के बीच नहीं आने जैसे मुद्दे भी दिख रहे हैं.
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के पोते प्रज्वल रेवन्ना पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे हैं.
चीन में कोविड-19 वायरस के बारे में सबसे पहले बताने वाले एक वैज्ञानिक को अपनी प्रयोगशाला में नहीं घुसने दिया गया.
पश्चिम बंगाल में चुनाव चाहे विधानसभा का हो या फिर लोकसभा का, अल्पसंख्यक वोटर हमेशा निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं.
1 मई 2024 को यूरोपीय संघ (ईयू) में अब तक हुए सबसे बड़े विस्तार की 20वीं सालगिरह है.
अफगानिस्तान पर्यटन का बड़ा केंद्र बनने की कोशिश कर रहा है.
कर्नाटक में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा है कि उन्होंने बालाकोट हमले की जानकारी सबसे पहले पाकिस्तान को दी थी.
भारत में लोग अपना खर्च घटाने और प्रदूषण में कमी लाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को अपना रहे हैं.
अब तक माना जाता रहा है कि खेती शुरू करने से पहले आदिमानव मुख्यतया मांसाहारी थे.
अमेरिका ने कहा है कि कनाडा और अमेरिका में लोगों की हत्याओं की साजिश में भारत की जासूसी एजेंसियों की भूमिका एक गंभीर विषय है.
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के पोते और जेडीएस सांसद प्रज्वल रेवन्ना पर कई महिलाओं द्वारा यौन शोषण के आरोप लगाने के बाद वह जर्मनी फरार हो गए हैं.
भारत का दौरा टालने के बाद टेस्ला के सीईओ इलॉन मस्क रविवार को अचानक चीन पहुंच गए.
इस साल पेरिस में होने वाले ओलंपिक खेलों में एक ही नया खेल जोड़ा जा रहा है.
गर्मी बढ़ने के साथ ही उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ने लगी हैं.
इस हफ्ते सहारा की धूल ने हजारों मील का सफर तय करके एथेंस को लाल-नारंगी ओढ़नी से ढंक दिया.
जर्मनी चीन पर निर्भरता कम करना चाहता है लेकिन डिजिटल तकनीक के मामले में चीन की मजबूत स्थिति देखते हुए यह मुश्किल लगता है.
बीते करीब एक साल से जातीय हिंसा से जूझ रहे पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले नए सिरे से जो हिंसा शुरू हुई थी वह चुनाव के बाद भी जारी है.
जर्मनी में काम करने वाले आप्रवासी डॉक्टरों की संख्या बढ़ रही है लेकिन उनके रास्ते में कई चुनौतियां हैं.