कोलंबो, आठ जुलाई पिछले साल अभूतपूर्व आर्थिक संकट के दौरान श्रीलंका को बचाने और ‘खून-खराबा’ रोकने के लिए ‘भरोसेमंद दोस्त’ भारत के प्रति आभार व्यक्त करते हुए श्रीलंकाई संसद के अध्यक्ष महिंदा यापा अभयवर्धने ने कहा है नयी दिल्ली ने कोलंबो को जिस तरह की मदद प्रदान की उस तरह की मदद किसी अन्य देश द्वारा नहीं की गई।
पिछले साल श्रीलंका को भीषण आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा था। इस दौरान भारत ने ‘पड़ोसी प्रथम’ की अपनी नीति के तहत विभिन्न माध्यमों से कोलंबो को लगभग चार अरब डॉलर की मदद प्रदान की थी।
इंडियन ट्रैवल कांग्रेस के प्रतिनिधियों के लिए शुक्रवार को यहां आयोजित भव्य रात्रिभोज समारोह में अपने संबोधन में अभयवर्धने ने कहा कि भारत ने वित्तीय संकट के दौरान ‘‘हमें बचा लिया’’, अन्यथा ‘‘हम सभी को एक और रक्तपात का सामना करना पड़ता।’’
उन्होंने नकदी संकट का सामना कर रहे श्रीलंका को दी गई मदद के लिए भारत को धन्यवाद दिया और दोनों देशों तथा उनकी संस्कृतियों के बीच सभ्यतागत संबंधों तथा समानताओं को याद किया।
अभयवर्धने ने कहा, ‘‘श्रीलंका और भारत सांस्कृतिक, राष्ट्रीय और नीतिगत रूप से बहुत करीब से जुड़े हुए देश हैं तथा सबसे ऊपर, भारत श्रीलंका का एक बहुत करीबी सहयोगी और भरोसेमंद दोस्त रहा है। जब भी हम मुसीबत में पड़े भारत ने हमेशा मदद की।’’
उन्होंने कहा, ‘‘और, इस बार भी, आज, मैंने सुना है कि भारत हमारे ऋणों के पुनर्गठन को 12 वर्ष के लिए बढ़ाने को तैयार है। कभी ऐसी उम्मीद नहीं थी और न ही इतिहास में भी किसी देश ने इस तरह की सहायता दी है।''
अभयवर्धने ने कहा, ‘‘मैं बताना चाहता हूं कि पिछले साल हम पर जो मुसीबत आई थी, उसके दौरान आपने (भारत ने) हमें बचाया, भारत ने हमें बचाया, अन्यथा हम सभी के लिए एक और रक्तपात होता। तो, इस तरह भारत हमारी मदद के लिए आगे आया।’’
उन्होंने श्रीलंका में भारतीय उच्चायुक्त गोपाल बागले, श्रीलंका के पर्यटन और भूमि मंत्री हरिन फर्नांडो और श्रीलंका सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में यह टिप्पणी की।
श्रीलंकाई संसद के अध्यक्ष ने बागले का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘यहां आपके(भारत के) राजदूत हमारे बहुत करीबी दोस्त हैं। हम उनसे प्यार करते हैं और उनका सम्मान करते हैं।’’
बाद में, अभयवर्धने ने समारोह से इतर ‘पीटीआई-’ के साथ बातचीत में कहा कि संकट के समय में ''भारत हमेशा श्रीलंका की सहायता के लिए आगे आया है।' उन्होंने पिछले साल नयी दिल्ली द्वारा दी गई वित्तीय सहायता पर जोर दिया जब द्वीपीय राष्ट्र आर्थिक उथल-पुथल में फंसा था।
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