देश की खबरें | दिल्ली में यमुना का डूब क्षेत्र आदेशों के बावजूद अतिक्रमण से मुक्त नहीं हुआ: एनजीटी

नयी दिल्ली, 10 फरवरी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कहा है कि कई आदेशों के बावजूद यहां यमुना नदी के डूब क्षेत्र को अतिक्रमण से मुक्त नहीं किया गया है।

अधिकरण ने यह बात अतिक्रमण हटाने के उसके 2019 के आदेश को क्रियान्वित करने की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कही।

हरित अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने 6 फरवरी के आदेश में कहा, ‘‘अधिकरण के (2019) आदेश के बाद पांच साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक आदेश का पालन नहीं किया गया है।’’

पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद भी शामिल हैं। पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने अप्रैल 2024 में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय करके नदी के डूब क्षेत्र से अतिक्रमण हटाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।

अधिकरण ने कहा कि उसी महीने एक अन्य खंडपीठ ने एक अंतरिम आदेश पारित किया, जिसमें डीडीए उपाध्यक्ष को नदी के किनारों से सभी अतिक्रमण और अवैध निर्माण हटाने का निर्देश दिया गया।

उसने कहा कि पिछले साल जनवरी में उच्चतम न्यायालय ने अतिक्रमण हटाने की आवश्यकता के बारे में अधिकरण द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं से सहमति जताई थी और इस बात पर सहमति जताई थी कि जनता और पर्यावरण के व्यापक हित में, डूब क्षेत्र को बनाए रखना होगा।

अधिकरण ने कहा, ‘‘एनजीटी, दिल्ली उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय की खंडपीठ के इन आदेशों के बावजूद, दिल्ली में यमुना नदी के बाढ़ के मैदान को अतिक्रमण से मुक्त नहीं किया गया है।’’

अधिकरण ने डीडीए के वकील की दलीलों पर गौर किया, जिन्होंने कहा कि अदालतों और हरित अधिकरण के निर्देशों का पालन करने के लिए "गंभीर प्रयास" किए जाएंगे।

इसने वकील को आदेशों का पालन करने के एजेंसी के प्रयास का खुलासा करने वाला हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया।

मामले की अगली सुनवायी 4 अप्रैल के लिए निर्धारित की गई है।

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