जरुरी जानकारी | डब्ल्यूटीओ में भारत में सूचना संचार प्रौद्योगिकी उत्पादोंपर शुल्क की कराएगा जांच

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के विवाद निपटान निकाय ने चीनी ताइपे और जापान के आईसीटी (सूचना संचार प्रौद्योगिकी) शुल्क मामले में भारत के खिलाफ आयोग गठित करने के आग्रह को स्वीकार कर लिया है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।

नयी दिल्ली, 29 जुलाई विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के विवाद निपटान निकाय ने चीनी ताइपे और जापान के आईसीटी (सूचना संचार प्रौद्योगिकी) शुल्क मामले में भारत के खिलाफ आयोग गठित करने के आग्रह को स्वीकार कर लिया है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।

आयोग इस बात का निर्धारण करेगा कि भारत का कुछ आईसीटी उत्पादों पर सीमा शुल्क लगाना डब्ल्यूटीओ नियमों का उल्लंघन करता है या नहीं।

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सूत्र ने कहा, ‘‘डब्ल्यूटीओ का विवाद निपटान निकाय ने बुधवार को हुई बैठक में चीनी ताइपे और जापान के आग्रह को स्वीकार करते हुए आयोग गठित करने पर सहमति जतायी। दोनों देशों का यह दूसरा अनुरोध था।’’

दोनों चीनी ताइपे और जापान ने अलग-अलग आवेदन देकर विवाद निपटान के लिये आयोग गठित करने का आग्रह किया था।

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इससे पहले, भारत ने दोनों देशों के डब्ल्यूटीओ में विवाद निपटान समिति के गठन के अनुरोध को अवरूद्ध कर दिया था।

विश्व व्यापार संगठन के व्यापार विवाद नियमों के अनुसार, अगर ये देश दूसरी बार अनुरोध लेकर आते हैं, समिति का गठन किया जाता है।

इससे पहले, दोनों देशों ने मई में डब्ल्यूटीओ में सेल्यूलर नेटवर्क के लिये टेलीफोन, टेलीफोन के कल-पुर्जों समेत कुछ इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर आयात शुल्क लगाये जाने को लेकर मामला दर्ज कराया था।

उनका आरोप है कि इन उत्पादों पर आयात शुल्क से डब्ल्यूटीओ नियमों का उल्लंघन हो रहा है। भारत ने इन उत्पादों पर शून्य प्रतिशत बाध्य शुल्क (बाउंड टैरिफ) लगाने की प्रतिबद्धता जतायी है। हालांकि भारत ने अन आरोपों को पुरजोर विरोध किया है।

शून्य प्रतिशत बाध्य शुल्क से आशय मूल्य के अनुसार निश्चित प्रतिशत के हिसाब के साथ दूसरे देश के सामान पर शुल्क लगाने की प्रतिबद्धता से है। इसके ऊपर सदस्य देश आयात शुल्क नहीं लगा सकते।

भारत का कहना है कि ये आईसीटी उत्पाद डब्ल्यूटीओ के सूचना प्रौद्योगिकी उत्पाद (आईटीए-2) समझौते का हिस्सा है और नयी दिल्ली उस समझौते का हिस्सा नहीं है। भारत आईटीए-1 का हिस्सा है जिस पर 1997 में दस्तखत किये गये थे। भारत का कहना है कि वह आईटीए-1 के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

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