शिवसेना के धैर्यशील माने ने कहा कि इस विधेयक से वैसी महिलाएं संसद तक पहुंच सकेंगी जो कभी यहां पहुंच नहीं सकती थीं।
जद(यू) की कविता सिंह ने कहा कि उम्मीद की जाती है कि विधेयक में जो बातें की गई हैं वे सिर्फ कागजों में न रहें, बल्कि धरातल पर भी उतरें।
भाजपा सांसद सीपी जोशी ने कहा कि इस विधेयक के कानून बनने के बाद यह महिलाओं को सशक्त बनाएगा।
एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने विधेयक का विरोध किया और कहा कि ओबीसी तथा मुस्लिम समुदायों के लिए प्रावधान क्यों नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार चाहती है कि सवर्ण महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़े, ओबीसी ओर मुस्लिम महिलाओं का प्रतिनिधित्व नहीं बढ़े।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान ने कहा कि राजनीतिक दलों ने इस कानून को बेहतर बनाने की आड़ में विधेयक को लटकाया और यही कारण है कि 27 वर्षों से कानून धरातल पर नहीं उतर पाया।
उन्होंने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि एससी, एसटी और ओबीसी का इसमें प्रतिनिधित्व होना चाहिए। प्रधानमंत्री पर मुझे विश्वास है।’’
आरएलपी के हनुमान बेनीवाल ने कहा कि वह विधेयक का समर्थन करते हैं, लेकिन क्या सरकार पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विधेयक लाई है।
निर्दलीय नवनीत राणा ने कहा कि विपक्ष के अनेक नेताओं ने राज्यों में आरक्षण की बात की है और महाराष्ट्र के कुछ विपक्षी सदस्यों ने भी इस बारे में उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा सवाल है कि महाराष्ट्र में अब तक कोई महिला मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री क्यों नहीं बनी।’’
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक उनका सपना था, यदि ऐसा है तो इतने सालों में इसे पूरा क्यों नहीं किया गया।
निर्दलीय सदस्य सुमनलता अंबरीश ने कहा कि भारत एकमात्र देश है, जहां महिला को शक्ति कहा जाता है और यह सनातन धर्म की पहचान है।
आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि यह संविधान संशोधन विधेयक है तो इसे हिंदी में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ नाम देने की बात समझ से परे है।
उन्होंने दावा किया कि 1989 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार स्थानीय निकाय में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का विधेयक सबसे पहले लाई थी तो राज्यसभा में उसे गिराने में भाजपा भी शामिल थी।
उनके इस दावे को खारिज करते हुए भाजपा के निशिकांत दुबे ने कहा कि प्रेमचंद्रन जिस समय की बात कर रहे हैं, उस समय लोकसभा में भाजपा के दो और राज्यसभा में तीन सदस्य थे।
दुबे ने कहा, ‘‘अगर अटल जी और आडवाणी जी ने तब विधेयक के खिलाफ मतदान किया होगा तो मैं आज ही इस्तीफा दे दूंगा।’’
प्रेमचंद्रन ने कहा कि इस कानून के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की क्या जरूरत थी, क्योंकि यह तो जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होगा।
शिवसेना (यूबीटी) के अरविंद सावंत ने कहा कि महिला पहलवानों ने जंतर-मंतर पर इतने समय तक धरना दिया तो सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, किसी को गुस्सा नहीं आया।
उन्होंने कहा, ‘‘एक तरफ आरक्षण दे रहे हैं, दूसरी तरफ महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं।’’
सावंत ने आरोप लगाया कि चुनाव को ध्यान में रखकर और केंद्र सरकार की सारी असफलताओं को छिपाने के लिए यह विधेयक लाया गया है।
भाजपा की अपराजिता सारंगी ने कहा कि इससे पहले कई सरकारों ने महिला आरक्षण विधेयक लाने के प्रयास किये, लेकिन सफल नहीं हुए। उन्होंने कहा कि इसके लिए साहस की जरूरत होती है और क्रियान्वयन मोदी सरकार का सबसे मजबूत पक्ष है।
बसपा के गिरीश चंद्र ने आशंका जताई कि यह सरकार पिछली सरकारों की तरह जनता के ध्रुवीकरण का प्रयास नहीं कर रही हो।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी पार्टी की मांग है कि एससी, एसटी और ओबीसी के लिए पहले से जारी आरक्षण के साथ महिलाओं के आरक्षण में इन वर्गों को अलग से आरक्षण मिलना चाहिए।’’
चर्चा में तेलुगूदेशम पार्टी के केसीनेनी श्रीनिवास, एनपीपी की अगाथा संगमा और भाजपा की संध्या राय ने भी भाग लिया।
भाजपा की शारदाबेन अनिलभाई पटेल ने लोकसभा और विधानसभाओं में काबिल एवं पढ़ी-लिखी महिलाओं को राजनीति में लाने की सभी दलों से अपील की।
एनडीपीपी के तोखेहो येपथोमी ने कहा कि कानून मंत्री को प्रस्तावित कानून पर अमल की समय सीमा स्पष्ट करनी चाहिए।
नगा पीपुल्स फ्रंट के लोरहो एस फोज ने विधेयक का समर्थन किया।
एयूडीएफ के बदरुद्दीन अजमल ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार का यह कदम राहुल गांधी की भारत यात्रा के परिणामस्वरूप उठाया गया है। उन्होंने गांधी को साधुवाद देते हुए सरकार पर तंज कसा, ‘‘राहुल जी आप ऐसे यात्रा करते रहिए, ताकि सत्ता पक्ष को हर हफ्ते (संसद का) सत्र बुलाना पड़े।’’
आम आदमी पार्टी के सुशील कुमार रिंकू ने नये भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आमंत्रित नहीं किये जाने को लेकर सवाल खड़े किये।
वीसीके टी तिरुमावलवन और टीएमसी की शताब्दी रॉय के अलावा कांग्रेस के राहुल गांधी ने भी इस विधेयक पर अपने विचार प्रकट किये।
हक वैभव सुरेश
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