जरुरी जानकारी | हरित कोषों से बीते वित्त वर्ष में 315 करोड़ रुपये की निकासी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भारत में निवेशकों के बीच हरित या ईएसजी (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) कोषों में निवेश को लेकर टिकाऊ धारणा का विकास नहीं हो पाया है। बीते वित्त वर्ष 2021-22 में इन कोषों से 315 करोड़ रुपये की निकासी देखने को मिली।

नयी दिल्ली, 24 अप्रैल भारत में निवेशकों के बीच हरित या ईएसजी (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) कोषों में निवेश को लेकर टिकाऊ धारणा का विकास नहीं हो पाया है। बीते वित्त वर्ष 2021-22 में इन कोषों से 315 करोड़ रुपये की निकासी देखने को मिली।

इससे पहले वित्त वर्ष 2020-21 में इन कोषों में 4,884 करोड़ रुपये का निवेश आया था।

मॉर्निंगस्टार इंडिया द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 से पहले सतत या हरित कोषों में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ था।

विशेषज्ञों का कहना है कि आगे चलकर ईएसजी कोष भारत में संपत्ति प्रबंधकों की कुल निवेश रूपरेखा का अभिन्न अंग होंगे।

मॉर्निंगस्टार इंडिया के निदेशक-प्रबंधक शोध कौस्तुभ बेलापुरकर ने कहा कि हरित कोषों में ज्यादातर निवेश नई कोष पेशकश (एनएफओ) के जरिये आया है। 2020-21 में इन कोषों में उल्लेखनीय प्रवाह देखने को मिला था। इसकी वजह है कि उस साल कई ईएसजी कोष शुरू हुए थे।

रिलेटिविटी इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स के प्रबंध भागीदार नकुल झावेरी ने कहा, ‘‘वृहद और सूक्ष्म दोनों कारणों की वजह से बाजार में अभी उतार-चढ़ाव है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘परि के लिहाज से हरित कोषों की प्रकृति दीर्घावधि की होनी चाहिए। इन कोषों को दीर्घावधि के प्रतिस्पर्धात्मक लाभ को समझना होगा और कोविड बाद की परिस्थिति में अधिक मजबूती दिखानी होगी। इस तरह के कोष हमेशा कम उतार-चढ़ाव वाले होते हैं।’’

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