जरुरी जानकारी | विदेशों में नरमी के रुख से बिनौला, मूंगफली को छोड़ अधिकांश तेल-तिलहनों के भाव टूटे
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी बाजारों में कमजोर रुख और आयातित तेलों के भाव टूटने से दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को बिनौला और मूंगफली तेल को छोड़कर बाकी सभी तेल- तिलहनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गयी।
नयी दिल्ली, आठ सितंबर विदेशी बाजारों में कमजोर रुख और आयातित तेलों के भाव टूटने से दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को बिनौला और मूंगफली तेल को छोड़कर बाकी सभी तेल- तिलहनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गयी।
बाजार सूत्रों ने कहा कि शिकॉगो एक्सचेंज में कल रात 2.5 प्रतिशत की गिरावट थी और फिलहाल यह एक प्रतिशत नीचे है। जबकि मलेशिया एक्सचेंज में पांच प्रतिशत की गिरावट है। आयातित खाद्य तेलों के भाव टूटने से लगभग सभी स्थानीय तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट आई।
सूत्रों ने कहा कि वैश्विक बाजार घट रहा है तो सरकार को खाद्य तेल-तिलहन के खुदरा मूल्य पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
सूत्रों ने कहा कि पंजाब और हरियाणा की मंडियों में बिनौला फसल आना शुरू होने से बिनौला तेल कीमतें पूर्वस्तर पर बनी रहीं। अब जल्द ही मंडियों में मूंगफली और सोयाबीन की फसलें भी आ जायेगी।
सूत्रों के मुताबिक, इस बार राजस्थान और गुजरात में मूंगफली की फसल अच्छी है और नयी फसल आने के बाद 20-30 दिन में मूंगफली के भाव भी टूटने के आसार हैं।
बाजार सूत्रों ने कहा कि तेल-तिलहन बाजार टूटने से तेल उद्योग, तेल आयातक और सोयाबीन के कारोबारियों की हालत पस्त है और उपभोक्ताओं को भी कोई लाभ नहीं हो रहा है। पिछले साल के मुकाबले सोयाबीन दाने के भाव लगभग आधे रह गये हैं।
सूत्रों ने कहा कि सरसों तेल-तिलहन कीमतों में भारी गिरावट के बावजूद तेल कंपनियों के एमआरपी ऊंचे बने हुए हैं। अगर हालात यही रहे तो आगे जाकर खाद्य तेलों के मामले में आत्मनिर्भर होने के बजाय देश की आयात पर निर्भरता बढ़ती जायेगी।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार को तिलहन उत्पादन बढ़ाने के बारे में भी सोचना चाहिये।
सूत्रों ने कहा कि तीन-चार महीने पहले 2,100 डॉलर प्रति टन कांडला पामोलिन का भाव गिरकर 950 डॉलर प्रति टन रह गया है। इसके बावजूद मॉल और खुदरा कारोबारियों द्वारा मनमानी कीमत लेने से उपभोक्ताओं को गिरावट का 10-15 प्रतिशत भी लाभ नहीं मिल पा रहा।
सूत्रों ने कहा कि बिनौला की छिटपुट मांग के बीच नयी फसल की आवक शुरू होने से बिनौला तेल के भाव जस के तस बने रहे। गिरावट के आम रुख के बीच मांग कमजोर होने से सरसों, सोयाबीन तेल-तिलहन, पामोलीन, सीपीओ के भाव भी गिरावट के साथ बंद हुए।
सूत्रों ने कहा कि वैश्विक बाजारों में खाद्य तेलों के दाम लगातार नीचे आने के बाद सरकार को तेल उद्योग और संबंधित अंशधारकों की बैठक बुलाकर उन्हें कीमतों को नीचे लाने की हिदायत देनी चाहिये।
उन्होंने कहा कि कच्चा पामतेल, सोयाबीन और सरसों दाने का वायदा कारोबार चालू नहीं करना चाहिये। इसका बंद रहना ही किसानों के हित में है।
बृहस्पतिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 6,675-6,725 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली -6895-7060 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 15,800 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली सॉल्वेंट रिफाइंड तेल 2,660 - 2,850 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 13,280 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 2,120-2,210 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,150-2,265 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 17,000-18,500 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 12,100 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 12,100 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 10,600 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,350 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 12,000 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,200 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,000 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,225-5,325 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज 5,175- 5,275 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का) 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 08, 2022 06:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

