पुणे, 25 सितंबर (360इन्फो) प्राकृतिक संसाधनों के संकट को समाप्त करने के लिए उल्कापिंड हमें आवश्यक सटीक रासायनिक मॉडल दिखा सकते हैं, लेकिन हमें इनकी तलाश के लिए पृथ्वी से बाहर अंतरिक्ष में जाने की जरूरत नहीं है।
क्षुद्रग्रहों के प्रति दुनिया की रुचि की कोई सीमा नहीं है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके लिए कुछ लोग अंतरिक्ष यात्रा करने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं और कुछ ने उल्कापिंड के अवशेषों को धार्मिक स्थलों पर रखने का सुझाव तक दिया है। इतना ही नहीं, एक नीलामी में क्रिस्टी ने चंद्रमा से उत्पन्न एक उल्कापिंड के लिए रिकॉर्ड तोड़, लगभग 189,000 अमेरिकी डॉलर की कीमत हासिल की थी।
अरबों डॉलर की कीमत के संसाधनों के साथ उल्कापिंड बहुतायत में उपलब्ध हैं और जो लोग इन्हें खोजने का तरीका जानते हैं, उनके लिए धरती पर भी इनकी कमी नहीं है।
हर साल धरती पर लगभग 40,000 टन उल्कापिंड के टुकड़े और धूल गिरती है। ज्यादातर उल्कापिंड महासागरों और जमीन पर गिरते है। अंटार्कटिका, साइबेरिया, सहारा के अलावा कनाडा तथा ऑस्ट्रेलिया के उजाड़ क्षेत्रों में इन्हें आसानी से देखा जा सकता है।
गिरे हुए उल्कापिंडों की कीमत का सही आकलन अभी तक नहीं किया जा सका है, लेकिन कुछ अनुमानों के अनुसार, 2027 तक अंतरिक्ष खनन का वैश्विक बाजार 1.99 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
उल्कापिंडों में खनिज तत्व मिलने के कई मामले सामने आए हैं।
मेक्सिको और अंटार्कटिका में गिरे दो उल्कापिंड में ग्राफीन पाया था। ग्राफीन परमाणुओं की एक परत से बना, कार्बन का एक रूप है जिसमें उच्च सुचालकता और काफी मजबूती होती है। अहम बात यह है कि इसे विकसित करने के लिए यूरोपीय संघ ने एक अरब यूरो (1.07अब अमेरिकी डॉलर) का निवेश किया है तथा चीन ने इसे उच्च राष्ट्रीय प्राथमिकता दी है।
टेट्राटेनाइट, लोहे और निकल की मिश्र धातु है जो केवल उल्कापिंडों में पाई जाती है। इसे चुम्बकों में प्रयुक्त दुर्लभ खनिजों के प्रतिस्थापन के रूप में देखा जा रहा है। इसका इस्तेमाल कार निर्माण, कंप्यूटिंग और कई अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं में उपयोग किये जाने वाले उत्पाद के तौर पर किया जा सकता है।
ऐसा जरूरी नहीं कि हर उल्कापिंड में ग्राफीन या टेट्राटेनाइट जैसे कीमती तत्व मिल जाएं, लेकिन ये तत्व महत्वपूर्ण खनिजों की हमारी मांग पूरी करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इनका खनन करना इतना भी आसान नहीं होता। हमने चंद्रमा में वाणिज्यिक मात्रा में खनन के लिए उपयुक्त किसी क्षेत्र की संभावना भी नहीं देखी है। इसके अलावा, पराग्रही खनन, वहां से हटा कर अयस्क को पृथ्वी पर वापस लाने का व्यापार वर्तमान समय के नमूना वापसी मिशनों की तुलना में बहुत अधिक है।
अयस्कों को निकालने के लिए मनुष्यों को अंतरिक्ष में भेजने के बजाय, पृथ्वी पर आई उल्कापिंड सामग्री में इनकी खोज अधिक किफायती लगती है।
आखिरकार, जब हम क्षमता विकसित करते हैं, तो पृथ्वी से दूर ठिकानों पर उपस्थिति बनाए रखने के लिए मनुष्यों द्वारा नियमित रूप से दूसरे ग्रहों से संसाधनों को निकालने की संभावना तलाश करना स्वाभाविक है।
बहरहाल, यह क्षमता अभी बहुत दूर है। क्षुद्रग्रहों या धूमकेतुओं के लिए नासा के कई मिशन - स्टारडस्ट, ओएसआईआरआईएस-आरईएक्स, जेएएक्सए (दो बार), हायाबुसा 1 और हायाबुसा 2 संचालित हुए और ये सभी मिशन दस दस ग्राम से कम पराग्रही नमूने लेकर लौटे हैं जिनका विश्लेषण जारी है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)












QuickLY