देश की खबरें | राष्ट्रपति चुनाव में हम मुर्मू का समर्थन क्यों करें, यशवंत सिन्हा हमारे उम्मीदवार : तृणमूल सांसद
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें और उनकी पार्टी के अन्य सांसदों को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बंगाल इकाई के नेतृत्व से एक पत्र मिला है, जिसमें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के लिए समर्थन मांगा गया है।
कोलकाता, आठ जुलाई तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें और उनकी पार्टी के अन्य सांसदों को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बंगाल इकाई के नेतृत्व से एक पत्र मिला है, जिसमें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के लिए समर्थन मांगा गया है।
रॉय ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी के सांसद और विधायक संयुक्त गैर-भाजपा उम्मीदवार यशवंत सिन्हा के पक्ष में मतदान करेंगे।
राष्ट्रपति चुनाव के लिए समर्थन जुटाने के वास्ते राज्यों का दौरा कर रही मुर्मू का शनिवार को पश्चिम बंगाल के भाजपा सांसदों और विधायकों से मिलने के लिए कोलकाता जाने का कार्यक्रम है।
रॉय ने कहा, “हमें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के हस्ताक्षर वाला एक पत्र मिला है, जिसमें तृणमूल सांसदों से राष्ट्रपति चुनाव में राजग प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू को वोट देने की अपील की गई है। उन्होंने दावा किया है कि मुर्मू की जीत तय है और लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मानदंडों को मजबूत करने के लिए हम सभी को उन्हें वोट देना चाहिए।”
हालांकि, तृणमूल सांसद ने मुर्मू का समर्थन करने की किसी भी संभावना से इनकार किया।
उन्होंने सवाल किया, “जब विपक्षी दलों ने मिलकर यशवंत सिन्हा को मैदान में उतारा है तो हम राजग उम्मीदवार का समर्थन क्यों करें? हम सिन्हा के पक्ष में मतदान करेंगे।”
पिछले महीने मजूमदार और अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर उनसे 18 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में मुर्मू का समर्थन करने का आग्रह किया था।
बंगाल भाजपा ने जून में घोषणा की थी कि वह सभी तृणमूल सांसदों और विधायकों को पत्र लिखकर राजग उम्मीदवार के लिए समर्थन मांगेगी।
पिछले हफ्ते ममता ने कहा था कि अगर भाजपा ने ओडिशा की आदिवासी नेता मुर्मू को चुनाव मैदान में उतारने से पहले विपक्षी दलों के साथ चर्चा की होती तो वह आम सहमति की उम्मीदवार बन सकती थीं।
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