विदेश की खबरें | लोग टेलीगेट क्यों करते हैं? गाड़ी चलाने की इस आदत के पीछे की क्या है वजह
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

मेलबर्न, तीन जनवरी (द कन्वरसेशन) अगर आप बच्चों को लंच पर लेकर जा रहे हैं और देरी हो रही है तो फास्ट लेन की तरफ कार मोड़ते हैं लेकिन आगे धीमी गति से चल रही कार के पीछे फंस जाते हैं।

आप तेज कार चलाकर उसकी गाड़ी के करीब जाने की कोशिश करते हैं, फिर और करीब तथा और करीब जाते हैं..इतना करीब कि अगर वह अचानक कार रोक दे तो टक्कर को रोक पाना मुश्किल हो सकता है।

जब यह तरकीब भी काम नहीं करती तो आप होर्न बजाते हैं। आखिरकार, हताश होकर आप वह लेन छोड़ देते हैं और उस कार को पीछे छोड़कर तेजी से आगे निकल जाते हैं।

आजकल ऐसी छोटी-छोटी झुंझलाहट पैदा करने वाली बातें आपको सड़क पर आक्रामक बना देती हैं। आप रोजाना तो ऐसे गाड़ी नहीं चलाते। तो आज क्या अलग है?

छुट्टियों में कार चलाने का तरीका आपके आम दिनों से अलग होता है। इसमें लंबी दूरी का सफर तय करना होता है या आम दिनों के मुकाबले कार में अधिक लोग बैठे होते हैं।

छुट्टियों के दौरान सड़क हादसों का खतरा बढ़ जाता है। अगर आप जल्दबाजी में हैं तो आपका समय अधिक कीमती हो जाता है क्योंकि आपके पास समय की कमी होती है। अगर कोई उस वक्त रुकावट पैदा करता है तो आप हताश या आक्रामक हो जाते हैं।

यह बुनियादी मानव मनोविज्ञान है। जब कोई आपकी गाड़ी के आगे रुकावट पैदा करता है तो आपको गुस्सा आता है और आपको लगता है कि वह सही व्यवहार नहीं कर रहा है।

आप अपने मन में धारणा बना लेते हैं कि किसकी गलती है। जब आप गाड़ी चला रहे होते हैं तो आपके पास विस्तारपूर्वक आकलन का वक्त कम होता है। इसके बजाय आप स्थिति पर फौरन फैसला ले लेते हैं।

ये फैसले इस बात पर आधारित होते हैं कि आप उस वक्त कैसा महसूस कर रहे हैं। अगर आप कार चलाने से पहले ही झुंझलाए हुए हैं तो गाड़ी चलाते वक्त आसानी से झुंझलाहट होने की आशंका होती है और फिर यह आक्रामक ड्राइविंग के रूप में सामने आती है।

टेलीगेटिंग (बहुत कम दूरी पर पीछे गाड़ी चलाना) और तेज गति से गाड़ी चलाना इस आक्रामकता के उदाहरण हैं।

समस्या यह है कि आप गुस्से में होते हैं तो इस बात का अंदाजा नहीं लगा पाते कि इस आक्रामकता का क्या खतरा हो सकता है।

एक अध्ययन से पता चलता है कि टेलीगेटिंग और तेज गति से गाड़ी चलाने, दोनों से सड़क दुर्घटना का खतरा 13 से 14 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

आप क्या कर सकते हैं:

छुट्टियों के दौरान सड़क पर सुरक्षित रहने का एक तरीका ऐसी स्थितियों की पहचान करना है जिससे आप आक्रामक हो सकते हैं।

मोनाश यूनिवर्सिटी एक्सीडेंट रिसर्च सेंटर ने चालकों को आक्रामक ड्राइविंग कम करने में मदद करने के लिए एक कार्यक्रम बनाया है। इससे चालकों को गाड़ी चलाते वक्त शांत रहने की अपनी रणनीतियां बनाने में मदद मिलती है।

इनमें गाड़ी चलाने से पहले : यात्रा की बेहतर योजना बनाना, यात्रा के लिए पर्याप्त वक्त निकालना और कार चलाने से पहले यह पता लगाना शामिल है कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं।

गाड़ी चलाते वक्त : दायीं लेन में धीमी गति से गाड़ी चलाने वालों से बचने के लिए बायीं लेन में गाड़ी चलाना, गुस्सा लाने पर गहरी सांस लेना या संगीत सुनना शामिल हैं।

स्थिति के बारे में ‘पुन: सोचना’ : यह पहचानिए कि कुछ स्थितियों में आप केवल अपने सोचने का तरीका बदल सकते हैं। उदारहण के लिए, अपने आप से पूछे कि क्या जोखिम मोल लेना सही है?

इस कार्यक्रम को पूरा करने के चार महीने बाद चालकों में गाड़ी चलाते वक्त कम गुस्सा और आक्रामकता देखी गयी। इन चालकों के लिए जो रणनीतियां सबसे ज्यादा काम आयी, उनमें संगीत सुनना, शांत रहने पर ध्यान केंद्रित करना और समस्या के बारे में फिर से सोचना शामिल रहीं।

द कन्वरसेशन

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)