विदेश की खबरें | प्राचीन पेड़ हमारे लिए इतने महत्वपूर्ण क्यों है और गिरने के बाद नए लगाना इतना जटिल क्यों है

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. अनोके एक पुजारी थे और माना जाता है कि वह जीवित व्यक्तियों और आत्माओं की दुनिया के बीच मध्यस्थ के रूप में कार्य करते थे। ऐसी मान्यता है जिस कोला पेड़ का नाम उनके नाम पर रखा गया था, वह बीमारियों को ठीक करने और शाप हटाने में सक्षम है।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

अनोके एक पुजारी थे और माना जाता है कि वह जीवित व्यक्तियों और आत्माओं की दुनिया के बीच मध्यस्थ के रूप में कार्य करते थे। ऐसी मान्यता है जिस कोला पेड़ का नाम उनके नाम पर रखा गया था, वह बीमारियों को ठीक करने और शाप हटाने में सक्षम है।

एक प्रमुख सड़क पर मौजूद कोम्फो अनोके पेड़ से जुड़ी इन दंतकथाओं ने इसे एक पर्यटक केंद्र और पैतृक जड़ों का प्रतीक बना दिया। इसका काटा जाना ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पारिस्थितिकी के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

इस प्रतिष्ठित वृक्ष की कटाई से लोगों में क्रोध और शोक की लहर दौड़ गई। इस पेड़ में ऐसा क्या था कि लोगों ने इस प्रकार की भावनात्मक प्रतिक्रिया दी? ये एक पेड़ इतना महत्वपूर्ण क्यों है? एक नया पेड़ लगाकर क्षति की भरपाई करने की हमारी प्रवृत्ति अप्रत्याशित रूप से जटिल क्यों साबित हो सकती है?

पेड़ की कटाई एक भावनात्मक मुद्दा

कोम्फो अनोके पेड़ की कटाई पहला ऐसा मामला नहीं है जिसमें भावनाओं का इतना सैलाब उमड़ा हो। श्रुस्बरी में अक्टूबर 2023 के अंत में 550 साल पुराने डार्विन ओक को काटने का निर्णय लिया गया। ‘वुडलैंड ट्रस्ट’ ने इस कटाई को ‘‘मृत्युदंड’’ के रूप में वर्णित किया था। नॉर्थम्बरलैंड में हैड्रियन वॉल के पास स्थित ‘सिकामोर गैप’ पेड़ की सितंबर 2023 में कटाई के बाद भी लोगों ने इसी प्रकार की प्रतिक्रिया दी थी।

पेड़ों की जानबूझकर कटाई अत्यधिक भावनात्मक मामला है। पेड़ जीवित अभिलेख हैं, जो हमारे ग्रह के अतीत और हमारे निजी इतिहास के गवाह हैं।

कुछ संस्कृतियों में मान्यता है कि पूर्वजों और परिवार के सदस्यों की आत्माएं अफ़्रीका में जलवायु के लिहाज से संवेदनशील ‘बाओबाब’ के पेड़ों पर निवास करती हैं।

हमारे 2021 के शोध ने उन विभिन्न तरीकों का पता लगाया जिनके जरिए लोग प्रकृति के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता देते हैं। कुछ लोग मानव लाभ के लिए प्रकृति की रक्षा करते हैं और कुछ अन्य अपने स्वयं के हित के लिए प्रकृति की रक्षा करना चाहते हैं।

प्राचीन पेड़ों के स्थान पर नए पेड़ लगाना

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वृक्षारोपण अहम है, लेकिन काटे गए पेड़ों को अपनी शर्तों पर और प्रभावी प्रबंधन के बिना बदलने की जल्दबाजी के परिणाम खराब हो सकते हैं।

कोई भी पौधा 300 साल पुराने पेड़ के अनूठे पारिस्थितिकी तंत्र की जगह कम से कम अगले 300 वर्षों तक नहीं ले सकता। यदि हम प्रकृति को आसानी से बदलने योग्य मानते हैं, तो हम ‘‘त्वरित सुधार’’ को अपनाते हैं और पारिस्थितिकी बदलाव पर मानव कार्यों के प्रभाव और पारिस्थितिकी प्रणाली की विशाल जटिलता को नजरअंदाज करते हैं।

पारिस्थितिकी तंत्र में विरासत का हस्तांतरण बदलाव की प्राकृतिक और सतत प्रक्रिया है । इसका उदाहरण जंगलों में आग लगने के बाद उस स्थान पर जंगल का अपने आप उग आना है।

मानवीय हस्तक्षेप पारिस्थितिकी बदलाव की प्रक्रिया को बाधित कर सकता है। एकल प्रजाति या गैर स्थानीय पेड़ों का रोपण पारिस्थितिकी तंत्र को कमजोर कर सकता है, मिट्टी के कटाव को तेज कर सकता है और कीटों एवं बीमारियों के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ा सकता है।

मृत पेड़ किसी भी जंगलात का एक महत्वपूर्ण घटक हैं क्योंकि वे पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण करते हैं, कवक के विकास में मददगार होते हैं, और विभिन्न प्रकार के पक्षियों, कीड़ों और स्तनधारियों के लिए घर प्रदान करते हैं।

वृक्षों के संरक्षण संबंधी बहसें आर्थिक या कार्यात्मक मानवीय लाभों से कहीं अधिक होनी चाहिए। उनमें प्राकृतिक दुनिया के साथ हमारे संबंधों के इतिहास, संस्कृति और मूल्यों का एकीकरण होना चाहिए।

द कन्वरसेशन

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