देश की खबरें | वॉट्सऐप ग्रुप : सैन्य अधिकारियों ने निलंबन आदेश पर पुनर्विचार के लिए न्यायालय का रुख किया
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नयी दिल्ली, 29 जुलाई एक पाकिस्तानी एजेंट के साथ वॉट्सऐप ग्रुप में कथित तौर पर जुड़ने के आरोप में निलंबित चार सैन्य खुफिया अधिकारियों ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय का रुख किया और अपने निलंबन की चुनौती को खारिज करने वाले उसके आदेश पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया।
अधिकारियों ने यह दावा करते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था कि उनके खिलाफ ‘कोर्ट ऑफ इंक्वायरी’ लंबित रहने तक निलंबित किए जाने से पहले उनका पक्ष नहीं सुना गया। अधिकारियों की याचिका को उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दिया था, जो उनकी इस दलील से असहमत था कि ‘कोर्ट ऑफ इंक्वायरी’ में उन्हें निलंबित करने से पहले उन्हें सुने जाने का एक अवसर प्रदान करना आवश्यक था।
न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने 14 जुलाई को सुनवाई में कहा, ‘‘विनियम 349 के तहत भी ऐसी प्रक्रिया का पालन करने की कोई आवश्यकता नहीं है। याचिकाकर्ताओं को ‘कोर्ट ऑफ इंक्वायरी’ के लंबित रहने तक निलंबित किया जा सकता है, जैसा कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा है कि इसका गठन पहले ही किया जा चुका है और जांच जारी है।’’
अधिकारियों ने अब एक पुनर्विचार याचिका दायर कर दावा किया है कि सेना के कानून के अनुसार ‘कोर्ट ऑफ इंक्वायरी’ और जांच दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। उन्होंने कहा है कि कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (सीओआई) ‘‘तथ्य का पता लगाने का साधन’’ है जो ‘‘अनुशासनात्मक कार्रवाई से पहले का चरण’’ है।
याचिका में कहा गया है कि सीओआई के निष्कर्षों के आधार पर कमांडिंग अधिकारी अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ आगे बढ़ने और सेना नियम 22 के तहत जांच करने का निर्णय ले सकता है और ऐसा करते समय वह अपने अधिकार क्षेत्र के तहत सैन्यकर्मियों को लंबित जांच के दौरान निलंबित करने का निर्णय ले सकता है, न कि ‘कोर्ट ऑफ इंक्वायरी’ के दौरान।
उन्होंने कहा कि सीओआई निलंबन, सैन्य हिरासत या गिरफ्तारी के संबंध में कोई निष्कर्ष निकालने पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में सहायता करने के लिए प्रशासनिक प्रकृति की कार्रवाई है।
अपने निलंबन आदेशों को ‘‘अवैध" और ‘‘प्रक्रियात्मक रूप से असंगत’’ बताते हुए अधिकारियों ने कहा कि उन्हें सुनवाई के अवसरों से वंचित करके सक्षम प्राधिकारी की निर्णय लेने की प्रक्रिया कानून के खिलाफ और मनमानी थी।
अधिकारियों को इस साल मई में निलंबित कर दिया गया था। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें उनके वरिष्ठों द्वारा अपने निजी मोबाइल फोन सौंपने का आदेश दिया गया था, जो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के किया और जांच में सहयोग किया। उन्होंने अपनी पहली याचिका में कहा था कि उन्हें बताया गया कि एक अधिकारी वॉट्सऐप ग्रुप का हिस्सा है, जिसमें एक पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव सक्रिय है, इसलिए उनकी सभी डिजिटल संपत्तियों की जांच की जानी चाहिए।
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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 29, 2022 08:27 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

